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दो साल से नही मिली टूल किट, जान जोखिम में डालकर काम कर रहे लाइनमैन
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झांसी। जिले के 55 बिजली घरों पर संविदा पर तैनात 660 लाइनमैन अपनी जान जोखिम में डालकर बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम कर रहे हैं। इन लाइनमैनों को दो साल से टूल किट नहीं दी गई है। जिससे उन्हें बिजली के खंभों और मशीनों पर काम करने के दौरान खतरा बना रहता है।
जिले के नगरीय वितरण खंड प्रथम और द्वितीय के 16 बिजली घरों पर 192, ग्रामीण वितरण खंड के 17 बिजली घरों पर 204 और मऊरानीपुर सब स्टेशन के 22 बिजली घरों पर कार्यरत 264 संविदा लाइनमैनों को पिछले दो साल से टूल किट नहीं मिली है। नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बिना टूल किट के ही पिछले दो साल से काम करने को मजबूर हैं। टूल किट की कमी के चलते कभी - कभी तो एक दूसरे से मांगकर या स्वयं के पैसों से उपकरणों को खरीदना पड़ता हैं। बताया कि हर मौसम में साइकिल और सीढ़ियां लेकर खंभों पर चढ़कर विद्युत फाल्ट सुधारने में लगे रहते हैं और लोगों को बिजली आपूर्ति मुहैया कराते हैं। जिले में पिछले दो साल में तकरीबन 50 से ज्यादा लाइनमैन बिजली लाइन पर काम करते हुए झुलस गए हैं। वहीं, तीन लाइनमैनों की मौत भी हो चुकी है। इसके बाद भी विभाग और ठेकेदार लापरवाह बने हुए हैं।
बाक्स
बिजली विभाग द्वारा संविदा कर्मियों से काम लेने से पहले टेंडर में ठेकेदार से पूर्ण टूल किट के साथ सभी सुरक्षा उपाय मुहैया कराने की शर्त रखी जाती है। सभी संविदा कर्मचारियों को प्लास, ग्लब्स, हैंड कैप सहित कई सुरक्षा के उपकरण देने का नियम होता है, लेकिन जिले में काम कर रहे 660 लाइनमैनों को पिछले दो साल से टूल किट उपलब्ध नहीं कराई गई है। उन्हें जो सुरक्षा किट पहले दी गई थी, वह खराब हो गई है। ऐसे में उन्हें बिना सुरक्षा उपकरणों के खंभों पर चढ़कर एलटी लाइन के साथ 11 और 33 हजार केवी विद्युत लाइन के फाल्टों को सुधारना होता है। इससे हमेशा उनकी जान का जोखिम बना रहता है।
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केस - 1
डेढ़ साल पहले मेडिकल रोड पर बने एक मॉल की बिजली सप्लाई बाधित होने पर बिना टूल किट के काम करने के दौरान एक लाइनमैन बिजली की चपेट में आकर झुलस गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी।
केस- 2
दो महीने पहले गल्लामंडी सब स्टेशन की बिजली सप्लाई बाधित होने पर बिना टूल किट के हाईटेंशन लाइन में आए फाल्ट को सही करा रहा था। इस दौरान बिजली की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया था।
हर छह महीने में कार्यदायी संस्था को संविदा कर्मचारियों को टूल किट देना होता है। अगर किसी भी संविदा कर्मचारी की टूल किट नहीं मिलने की शिकायत आती है, तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - राजकुमार, अधीक्षण अभियंता
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जिले के नगरीय वितरण खंड प्रथम और द्वितीय के 16 बिजली घरों पर 192, ग्रामीण वितरण खंड के 17 बिजली घरों पर 204 और मऊरानीपुर सब स्टेशन के 22 बिजली घरों पर कार्यरत 264 संविदा लाइनमैनों को पिछले दो साल से टूल किट नहीं मिली है। नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बिना टूल किट के ही पिछले दो साल से काम करने को मजबूर हैं। टूल किट की कमी के चलते कभी - कभी तो एक दूसरे से मांगकर या स्वयं के पैसों से उपकरणों को खरीदना पड़ता हैं। बताया कि हर मौसम में साइकिल और सीढ़ियां लेकर खंभों पर चढ़कर विद्युत फाल्ट सुधारने में लगे रहते हैं और लोगों को बिजली आपूर्ति मुहैया कराते हैं। जिले में पिछले दो साल में तकरीबन 50 से ज्यादा लाइनमैन बिजली लाइन पर काम करते हुए झुलस गए हैं। वहीं, तीन लाइनमैनों की मौत भी हो चुकी है। इसके बाद भी विभाग और ठेकेदार लापरवाह बने हुए हैं।
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बिजली विभाग द्वारा संविदा कर्मियों से काम लेने से पहले टेंडर में ठेकेदार से पूर्ण टूल किट के साथ सभी सुरक्षा उपाय मुहैया कराने की शर्त रखी जाती है। सभी संविदा कर्मचारियों को प्लास, ग्लब्स, हैंड कैप सहित कई सुरक्षा के उपकरण देने का नियम होता है, लेकिन जिले में काम कर रहे 660 लाइनमैनों को पिछले दो साल से टूल किट उपलब्ध नहीं कराई गई है। उन्हें जो सुरक्षा किट पहले दी गई थी, वह खराब हो गई है। ऐसे में उन्हें बिना सुरक्षा उपकरणों के खंभों पर चढ़कर एलटी लाइन के साथ 11 और 33 हजार केवी विद्युत लाइन के फाल्टों को सुधारना होता है। इससे हमेशा उनकी जान का जोखिम बना रहता है।
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केस - 1
डेढ़ साल पहले मेडिकल रोड पर बने एक मॉल की बिजली सप्लाई बाधित होने पर बिना टूल किट के काम करने के दौरान एक लाइनमैन बिजली की चपेट में आकर झुलस गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी।
केस- 2
दो महीने पहले गल्लामंडी सब स्टेशन की बिजली सप्लाई बाधित होने पर बिना टूल किट के हाईटेंशन लाइन में आए फाल्ट को सही करा रहा था। इस दौरान बिजली की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया था।
हर छह महीने में कार्यदायी संस्था को संविदा कर्मचारियों को टूल किट देना होता है। अगर किसी भी संविदा कर्मचारी की टूल किट नहीं मिलने की शिकायत आती है, तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - राजकुमार, अधीक्षण अभियंता