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बीयू में नहीं मिला तोमर का रिकॉर्ड
झांसी / ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jun 2015 01:10 AM IST
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पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर के फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट के मामले में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय पहुंची दिल्ली पुलिस की टीम ने रिकॉर्ड खंगाले। जांच में पूर्व मंत्री से संबंधित विश्वविद्यालय में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। टीम बंद लिफाफे में बीयू की ओर से दिए गए चार बिंदुओं का जवाब अपने साथ ले गई।
शनिवार पूर्वाह्न करीब ग्यारह बजे दिल्ली पुलिस की दो सदस्यीय टीम बुंदेलखंड विश्वविद्यालय स्थित कुलसचिव के कार्यालय में पहुंची। टीम में शामिल इंस्पेक्टर सुशील कुमार व सब इंस्पेक्टर गजेंद्र सिंह ने तोमर के माइग्रेशन सर्टिफिकेट के संबंध में कुलसचिव अखिलेश चंद्र से जानकारी की। हालांकि, टीम माइग्रेशन प्रमाण पत्र साथ नहीं लाई थी। बीयू अधिकारियों ने पुुलिस को बताया कि 20-04-1993 को 156 नंबर माइग्रेशन सर्टिफिकेट यहां से निर्गत नहीं हुआ है।
सूत्रों की मानें तो टीम जिन चार बिंदुओं पर बीयू का जवाब ले गई है उनमें तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय और बीयू के बीच हुए पत्राचार, पूर्व मंत्री द्वारा बीयू या उससे संबद्ध किसी कॉलेज से कोई कोर्स करना आदि शामिल हैं। करीब 45 मिनट तक चली जांच पड़ताल के बाद टीम बीयू से रवाना हो गई। अब यह सभी रिकॉर्ड दिल्ली पुलिस अदालत में तोमर के खिलाफ सबूत के तौर पर पेश करेगी।
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हो सकता है बड़े रैकेट का भंडाफोड़
झांसी। पूर्व कानून मंत्री के पास से मिले बीयू के फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट के मामले में टीम ने यहां के कर्मियों की संलिप्तता को भी जांच के दायरे में रखने से इन्कार नहीं किया है। टीम की ओर से संकेत मिले हैं कि वह किसी बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करने को जांच कर रही है। हो सकता है कि ठोस सबूत मिलने पर जल्द ही कुछ लोग कानून के शिकंजे में हों। मालूम हो कि पहले बीयू में फर्जी मार्कशीट, डिग्रियां आदि बनवाने का काम बड़े पैमाने पर चलता रहा है, लेकिन पूर्व अधिकारियों की ओर से कभी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। चूंकि, तोमर के पास से बीयू का फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट मिलने पर मामला हाईप्रोफाइल हो गया है, इसलिए पूर्व में की गईं धांधलियों की पोल खुलने की संभावना जताई जा रही है।
...तो सिस्टम को करें कड़क
झांसी। जांच के लिए आई टीम ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा कई प्रकार के सिक्योरिटी फीचर से लैस डिग्री को भी देखा। कुलसचिव ने टीम को डिग्री की खूबियों के बारे में बताया। इस पर टीम के एक सदस्य ने चुटकी भी ली कि डिग्री बनवाने में इतना रुपये खर्च करने से बेहतर सिस्टम कड़क कर दिया जाए।
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शनिवार पूर्वाह्न करीब ग्यारह बजे दिल्ली पुलिस की दो सदस्यीय टीम बुंदेलखंड विश्वविद्यालय स्थित कुलसचिव के कार्यालय में पहुंची। टीम में शामिल इंस्पेक्टर सुशील कुमार व सब इंस्पेक्टर गजेंद्र सिंह ने तोमर के माइग्रेशन सर्टिफिकेट के संबंध में कुलसचिव अखिलेश चंद्र से जानकारी की। हालांकि, टीम माइग्रेशन प्रमाण पत्र साथ नहीं लाई थी। बीयू अधिकारियों ने पुुलिस को बताया कि 20-04-1993 को 156 नंबर माइग्रेशन सर्टिफिकेट यहां से निर्गत नहीं हुआ है।
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सूत्रों की मानें तो टीम जिन चार बिंदुओं पर बीयू का जवाब ले गई है उनमें तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय और बीयू के बीच हुए पत्राचार, पूर्व मंत्री द्वारा बीयू या उससे संबद्ध किसी कॉलेज से कोई कोर्स करना आदि शामिल हैं। करीब 45 मिनट तक चली जांच पड़ताल के बाद टीम बीयू से रवाना हो गई। अब यह सभी रिकॉर्ड दिल्ली पुलिस अदालत में तोमर के खिलाफ सबूत के तौर पर पेश करेगी।
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हो सकता है बड़े रैकेट का भंडाफोड़
झांसी। पूर्व कानून मंत्री के पास से मिले बीयू के फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट के मामले में टीम ने यहां के कर्मियों की संलिप्तता को भी जांच के दायरे में रखने से इन्कार नहीं किया है। टीम की ओर से संकेत मिले हैं कि वह किसी बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करने को जांच कर रही है। हो सकता है कि ठोस सबूत मिलने पर जल्द ही कुछ लोग कानून के शिकंजे में हों। मालूम हो कि पहले बीयू में फर्जी मार्कशीट, डिग्रियां आदि बनवाने का काम बड़े पैमाने पर चलता रहा है, लेकिन पूर्व अधिकारियों की ओर से कभी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। चूंकि, तोमर के पास से बीयू का फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट मिलने पर मामला हाईप्रोफाइल हो गया है, इसलिए पूर्व में की गईं धांधलियों की पोल खुलने की संभावना जताई जा रही है।
...तो सिस्टम को करें कड़क
झांसी। जांच के लिए आई टीम ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा कई प्रकार के सिक्योरिटी फीचर से लैस डिग्री को भी देखा। कुलसचिव ने टीम को डिग्री की खूबियों के बारे में बताया। इस पर टीम के एक सदस्य ने चुटकी भी ली कि डिग्री बनवाने में इतना रुपये खर्च करने से बेहतर सिस्टम कड़क कर दिया जाए।