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किसानों में टिड्डियों का खौफ, दिन भर कर रहे खेतों में पहरेदारी

Mon, 01 Jun 2020 10:32 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2020 10:32 AM IST
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locusts fear in Farmers, guarding fields throughout the day
सिमराह के एक सब्जी के खेत पर टिड्डी दल को भगाने के लिए ढोल व थालियां बजाते किसान।

खेती के लिए गंभीर चुनौती बन चुके टिड्डी दल ने पहली बार बाइस मई को झांसी में दस्तक दी थी। इन कीटों ने पहला हमला नगर से सटे सिमरधा गांव में बोला था। यहां खेतों लगी सब्जियों की फसल को तहस - नहस कर दिया था। इसके बाद बरुआसागर, पारीछा आदि इलाकों में आतंक मचाया था। पिछले दो दिनों से कोई नया टिड्डी दल तो यहां नहीं आया है, परंतु ग्रामीण अब भी भयभीत हैं। वे दिन भर कड़ी धूप में अपने खेतों की निगरानी में जुटे रहते हैं।

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उनके साथ हर समय टिड्डियों से निपटने के लिए थाली, कनस्तर, ढोलक जैसी चीजें रखते हैं, ताकि टिड्डियों के पहुंचने पर शोर मचाकर उन्हें भगाया जा सके। इतना ही नहीं, कई इलाकों में तो खेतों के इर्दगिर्द बाकायदा साउंड सिस्टम रख रखे हैं, ताकि टिड्डी दल के पहुंचने पर तत्काल उन्हें भगाने के लिए शोर मचाया जा सके।
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शिवपुरी - गुना में कीटों की मौजूदगी
टिड्डी दल भले ही झांसी में नहीं है, परंतु आसपास खतरा बना हुआ है। टिड्डी दल की मौजूदगी झांसी के समीपवर्ती मध्य प्रदेश के जिले शिवपुरी और गुना में बताई जा रही है। हवा का रुख अनुरूप न होने की वजह से ये झांसी नहीं पहुंच पा रहा है। शिवपुरी और गुना में इन्हें खत्म करने के लगाता प्रयास किए जा रहे हैं। रात में इन प्रवास के दौरान कीटनाशकों का छिड़काव किया जा रहा है।
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झांसी में सबसे पहले टिड्डी दल हमारे गांव सिमरधा में आया था। इससे पहले कि हम कुछ समय पाते कीट खेतों में बैठ गए और देखते ही देखते तुरई और पत्ता गोभी की फसल को तहस-नहस कर दिया। दुबारा से फसल खड़ी कर रहे हैं, लेकिन टिड्डी दल से निपटने के लिए बराबर पहरा देना पड़ता है। तेज आवाज के भी इंतजाम रखने पड़ते हैं।

- पवन यादव, किसान

एक साथ लाखों की संख्या में टिड्डियां पहुंची थीं। ये देखकर सभी घबरा गए थे। फसलों की सुरक्षा तो छोड़ो, खेतों पर काम कर रहे लोग अपनी रक्षा के जुट गए थे। मुंह तक बांध लिए थे। हालांकि, अब कीटों से बचने के उपाय पता चल गए हैं। इसलिए दिन भर खेतों में पहरेदारी करते रहते हैं। धुआं करने के इंतजाम साथ रखते हैं और तेज आवाज के भी प्रबंध किए गए हैं।
- प्रेमनारायण, किसान

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