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ये पब्लिक है सब जानती है....माननीय शहर को भरपूर पानी देने का वादा पूरा नहीं कर पाए

Wed, 02 Jun 2021 01:46 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 02 Jun 2021 01:46 AM IST
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This is public, everyone knows. Honorable people could not fulfill the promise of providing plenty of water to the city.
झांसी। महानगर के कई इलाके ऐसे हैं, जिनमें पिछले कई दशकों से पानी का संकट बना हुआ है। केवल गर्मी में ही नहीं, बल्कि इन इलाकों के बाशिंदे साल भर पानी की खातिर परेशान रहते हैं। खास बात ये है कि इन क्षेत्रों में व्याप्त पानी की समस्या हर चुनाव में बड़ा मुद्दा होती है। लोकसभा, विधानसभा से लेकर नगर निगम के चुनाव तक में इन इलाकों में पहुंचने वाले नेता चुनाव के बाद जल समस्या के समाधान को अपनी पहली प्राथमिकता बताते हैं, लेकिन उनका के वादा चुनावी शिगूफा भर बनकर रह जाता है। चुनाव जीतने के बाद पलट कर इन क्षेत्रों की ओर नहीं देखा जाता है। गर्मी अपने चरम पर है। पानी की मांग बढ़ी हुई है। ऐसे में इन इलाकों के लोगों को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। हर सुख-दुख में साथ खड़े होने का दावा करने वाले नेता सिरे से गायब हैं।
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क्षेत्र - बड़ागांव गेट बाहर
आबादी - तीन हजार
हालात - भूगर्भ जल का स्तर काफी नीचे सरक गया है। हैंडपंप व बोरिंग शोपीस भर बनकर रह गए हैं। नल पानी उगल नहीं रहे हैं। पीने का पानी का इंतजाम दूर दराज के इलाकों से करना होता है। सरकारी टैंकर आते हैं, लेकिन वो क्षेत्र की पूरी आबादी की प्यास नहीं बुझा पाते हैं। कूलर तक में भरने के लिए पानी का इंतजाम नहीं हो पाता है। अन्य घरेलू उपयोग के लिए पानी का इंतजाम करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ जाता है।
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क्षेत्र - सत्यम कॉलोनी
आबादी - एक हजार
हालात - प्राइवेट पाइप लाइन के सहारे क्षेत्र के लोगों का काम चल रहा था, परंतु अब उसने भी साथ छोड़ दिया है। बताया गया कि मोटर में बड़ी खराबी आ गई है, ठीक कराने के लिए हर घर से छह-छह सौ रुपये लिए गए, बावजूद एक सप्ताह से अधिक समय गुजरने के बाद भी जलापूर्ति सुचारु नहीं हो पाई है। क्षेत्र में सरकारी टैंकर भी नियमित रूप से नहीं आ रहे हैं। सुबह उठते ही पानी की चिंता सताने लगती है। दिन इंतजाम करने में गुजरता है।
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क्षेत्र - अन्नपूर्णा कॉलोनी
आबादी - दो हजार
हालात - पानी पाने के लिए इलाके में खूब दबंगई चल रही है। प्रभावशाली लोगों के घर पर टैंकर आकर खड़े जाते हैं और उनके लिए पानी का भरपूर इंतजाम कर दिया जाता है। बचाखुचा पानी क्षेत्र के अन्य लोगों के हिस्से में आता है। फिर चाहे उनकी जरूरत पूरी हो पाए या नहीं। स्थिति ये है कि पानी भरने के लिए नारायण बाग तक जाना पड़ता है। जिन परिवारों में बाहर से पानी लाने वाला कोई नहीं है, उन्हें पैसे देकर घर का पानी भरवाना पड़ता है।
क्षेत्र - वीरांगना नगर
आबादी - डेढ़ हजार
हालात - क्षेत्र में पानी की नई पाइप लाइन डाली गई है। लेकिन, इससे कई जगहों पर पानी की समस्या और बढ़ गई है। पानी का प्रेशर पहले से काफी कम हो गया है। एक-एक बाल्टी भरने के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ जाता है। हां, लेकिन क्षेत्रवासियों का कहना है कि क्षेत्र का जो पॉश इलाका है वहां भरपूर पानी आ रहा है। कई बार टैंकरों की मांग की जा चुकी है, लेकिन क्षेत्र को मिल नहीं पा रहेे हैं। हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।
पानी वितरण में भी पक्षपात हो रहा है। सरकारी टैंकर पहले क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों के घर के सामने रुकते हैं। उसके बाद दूसरों को मौका मिल पाता है।
- चंद्रप्रकाश साहू, अन्नपूर्णा कॉलोनी
हर चुनाव में क्षेत्र की पानी की समस्या मुद्दा होती है। नेता वादा करते हैं कि अगली गर्मी में जल संकट नहीं रहेगा। लेकिन, चुनाव बाद इसे भुला दिया जाता है।
- आकाश गुप्ता, अन्नपूर्णा कॉलोनी
पानी की कमी की वजह से घर के कामकाज तक प्रभावित हो जाते हैं। सालों ऐसे ही बीत गए। उम्मीद सब जगाते हैं, लेकिन निराकरण कोई नहीं करता है।
- सुनीता, अन्नपूर्णा कॉलोनी
पानी सबसे जरूरी चीजों में से एक है। बावजूद, हमारे क्षेत्र की जल समस्या को सालों से नजरअंदाज किया जा रहा है। नेता वादे करते हैं, लेकिन वादों को हकीकत में नहीं बदलते।
- रजनी, अन्नपूर्णा कॉलोनी
पानी की कमी के मामले में हमारा पूरा क्षेत्र बदनाम हो चुका है। लगातार ये समस्या उठाई जाती रही है, लेकिन दुर्भाग्य से जिम्मेदारों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है।
- रश्मि, बड़ागांव गेट बाहर
कोरोना काल में जहां लोग संक्रमण से बचाव के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, वहीं हमारे क्षेत्र के लोग पानी के इंतजाम में जुटे रहते हैं। कोरोना खत्म होने को है, लेकिन पानी की समस्या जमी हुई है।
- प्रदीप, बड़ागांव गेट बाहर
अब तो क्षेत्र में डली पानी की प्राइवेट लाइन ने भी साथ छोड़ दिया है। टैंकरों के भरोसे पर ही क्षेत्र की आबादी। लेकिन, उनकी आपूर्ति भी सुचारु रूप से नहीं हो रही है।
- बॉवी रावत, सत्यम कॉलोनी
पानी के इंतजाम के लिए सरकारों की ओर से करोड़ों रुपये खर्च करने की खबरें अक्सर मिलती हैं, लेकिन ये रकम जाती कहां है, ये समझ में नहीं आता। हमारा क्षेत्र तो सालों से जूझ रहा है।
- सविता साहू, सत्यम कॉलोनी
क्षेत्र में नई पाइप लाइन डाले जाने के बाद से जलापूर्ति की स्थिति और भी बिगड़ गई है। नलों में प्रेशर न के बराबर है। एक-एक बाल्टी भरने में भी काफी समय लग जाता है।

- हरिओम, वीरांगना नगर
कॉलोनी के कई इलाकों में पर्याप्त पानी मिल रहा है, जबकि कई हिस्सा तरस रहे हैं। ये भेदभाव नहीं होना चाहिए। सभी को पर्याप्त पानी दिया जाना चाहिए।
- आशा, वीरांगना नगर
नेताओं की जुबान से पानी की बातें चुनाव तक ही सुनने को मिलती हैं। इसके बाद कोई ध्यान नहीं देता है। जनता की समस्या से कोई सरोकार नहीं रखता।
- वीरेंद्र ठाकुर, वीरांगना नगर
झांसी को स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन, पानी जैसी बुनियादी सुविधा के विकास पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ये स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है।
- सुमन, वीरांगना नगर
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