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ये मुलायम वाली नहीं, नई ट्विटर सपा है...
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मध्य प्रदेश के औरछा में चल रहे समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर में उमड़ी कार्यकर्
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झांसी। मध्य प्रदेश के ओरछा में चल रहे सपा के कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर में झांसी मंडल के दूर-दराज के इलाकों समेत मप्र के भी कई जगहों से कार्यकर्ता हिस्सा लेने पहुंचे। लखनऊ तक न पहुंच पाने वाले कार्यकर्ता यहां अखिलेश को देखना, उनसे मिलना चाहते थे लेकिन, यहां भी अखिलेश ज्यादातर समय ‘लखनवी’ नेताओं से ही घिरे नजर आए। उन तक न पहुंच पाने से कार्यकर्ता मायूस नजर आए। कई पुराने कार्यकर्ताओं के मुंह से यह कहते हुए दर्द भी फूट पड़ा कि अब यह मुलायम वाली नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं से दूरी बनाने वाली नई सपा हो गई है।
मप्र, टीकमगढ़ से राजेश कौसनिया अपने भाई के संग शीशे के खूबसूरत बाक्स में साइकिल की प्रतिकृति लेकर पहुंचे थे। दोनाें भाई इसे अपने हाथ से सपा सुप्रीमो को देना चाहते थे। बैठने की सीट नहीं मिली तब काफी देर तक पीछे खड़े रहे। अखिलेश के पहुंचने पर किसी तरह आगे बढ़ने की कोशिश की लेकिन, सभागार में व्यवस्था दुरुस्त रखने के नाम पर तैनात पहलवानों ने उनको बेदर्दी से पीछे ठेल दिया। आखिरकार मायूस दोनों भाई ‘साइकिल’ लेकर वापस लौट गए।
उधर, करीब आधे घंटे ठहरने के बाद अखिलेश सभास्थल से निकलकर ओरछा पैलेस पहुंचे। उनके भीतर घुसते ही होटल के विशालकाय गेट बंद हो गए। कार्यकर्ताओं को यहां बाहर खड़े होने की भी इजाजत नहीं दी गई। सभी वहां से खदेड़ दिए गए। विधायक और कार्यक्रम संयोजक रामवृक्ष यादव, एमएलसी मान सिंह भी भीतर जाने के लिए आधे घंटे तक चिरौरी करते रहे। विधायकों का नाम सुनने के बावजूद सुरक्षाकर्मी नहीं पसीजे। समर्थकों के काफी देर तक मानमनौैव्वल करने पर दोनों विधायक किसी तरह भीतर जा पाए हालांकि इसी बीच एक चर्चित नेता पुत्र भी पहुंच गए लेकिन, कार्यकर्ताओं के बीच से रास्ता बनाते हुए उनको भीतर इंट्री दे दी गई। कार्यकर्ताओं का दल प्रयागराज से भी पहुंचा था।
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पूरा दृश्य देख पास में खड़े वरिष्ठ कार्यकर्ता शिवमूरत के मुंह से बरबस निकल पड़ा कि अब यह नेता जी वाली सपा नहीं, जिसमें मुलायम किसी कार्यकर्ता को कभी मायूस नहीं लौटाते थे। वे याद करते हुए बताते हैं वर्ष 2006-2007 में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे। इलाहाबाद के परेड ग्राउंड में बेरोजगारी भत्ता बांटने के सरकारी कार्यक्रम में आए थे लेकिन, प्रशासन ने बल्लियां लगाकर कार्यकर्ताओं को काफी दूर बैठाया था। हेलिपैड से उतरकर मुलायम सीधे उसी ब्लॉक के करीब गए। उम्रदराज होने के बावजूद बल्लियां लांघकर कार्यकर्ताओं के बीच पहुंच गए। उस वाकये को याद करते हुए कहते हैं अब नेताओं में बल्लियां लांघने का हौसला नहीं रह गया। अब नेता लोहे के दरवाजे के पीछे बैठकर ट्विटर चलाते हैं हालांकि इसके बावजूद अखिलेश से मिलने की ख्वाहिश में कई घंटे तक कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम वहां जमा रहा।
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मप्र, टीकमगढ़ से राजेश कौसनिया अपने भाई के संग शीशे के खूबसूरत बाक्स में साइकिल की प्रतिकृति लेकर पहुंचे थे। दोनाें भाई इसे अपने हाथ से सपा सुप्रीमो को देना चाहते थे। बैठने की सीट नहीं मिली तब काफी देर तक पीछे खड़े रहे। अखिलेश के पहुंचने पर किसी तरह आगे बढ़ने की कोशिश की लेकिन, सभागार में व्यवस्था दुरुस्त रखने के नाम पर तैनात पहलवानों ने उनको बेदर्दी से पीछे ठेल दिया। आखिरकार मायूस दोनों भाई ‘साइकिल’ लेकर वापस लौट गए।
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उधर, करीब आधे घंटे ठहरने के बाद अखिलेश सभास्थल से निकलकर ओरछा पैलेस पहुंचे। उनके भीतर घुसते ही होटल के विशालकाय गेट बंद हो गए। कार्यकर्ताओं को यहां बाहर खड़े होने की भी इजाजत नहीं दी गई। सभी वहां से खदेड़ दिए गए। विधायक और कार्यक्रम संयोजक रामवृक्ष यादव, एमएलसी मान सिंह भी भीतर जाने के लिए आधे घंटे तक चिरौरी करते रहे। विधायकों का नाम सुनने के बावजूद सुरक्षाकर्मी नहीं पसीजे। समर्थकों के काफी देर तक मानमनौैव्वल करने पर दोनों विधायक किसी तरह भीतर जा पाए हालांकि इसी बीच एक चर्चित नेता पुत्र भी पहुंच गए लेकिन, कार्यकर्ताओं के बीच से रास्ता बनाते हुए उनको भीतर इंट्री दे दी गई। कार्यकर्ताओं का दल प्रयागराज से भी पहुंचा था।
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पूरा दृश्य देख पास में खड़े वरिष्ठ कार्यकर्ता शिवमूरत के मुंह से बरबस निकल पड़ा कि अब यह नेता जी वाली सपा नहीं, जिसमें मुलायम किसी कार्यकर्ता को कभी मायूस नहीं लौटाते थे। वे याद करते हुए बताते हैं वर्ष 2006-2007 में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे। इलाहाबाद के परेड ग्राउंड में बेरोजगारी भत्ता बांटने के सरकारी कार्यक्रम में आए थे लेकिन, प्रशासन ने बल्लियां लगाकर कार्यकर्ताओं को काफी दूर बैठाया था। हेलिपैड से उतरकर मुलायम सीधे उसी ब्लॉक के करीब गए। उम्रदराज होने के बावजूद बल्लियां लांघकर कार्यकर्ताओं के बीच पहुंच गए। उस वाकये को याद करते हुए कहते हैं अब नेताओं में बल्लियां लांघने का हौसला नहीं रह गया। अब नेता लोहे के दरवाजे के पीछे बैठकर ट्विटर चलाते हैं हालांकि इसके बावजूद अखिलेश से मिलने की ख्वाहिश में कई घंटे तक कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम वहां जमा रहा।