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सर्दी में भी गर्मी जैसे हालात
ब्यूरो
Updated Fri, 01 Jan 2016 01:34 AM IST
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झांसी। इस साल भी महानगर की चालीस फीसदी आबादी के लिए पानी का इंतजाम नहीं हो सका। सर्दियों में भी गर्मी की तरह लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण इस समस्या से जल्द निजात मिलती नजर नहीं आ रही है।
आंकड़ों के मुताबिक अब भी शहर की आबादी का बड़ा हिस्सा सरकारी पेयजल व्यवस्था पर निर्भर होने की बजाय हैंडपंप या अन्य स्रोतों पर आश्रित है। महानगर में 95 हजार मकान हैं, जिनमें से सिर्फ पचास हजार मकानों तक जल संस्थान की पाइप लाइन पहुंची है।
आबादी के हिसाब से देखें तो यहां कम से कम 90 एमएलडी पानी की जरूरत है, लेकिन आपूर्ति इससे काफी कम मात्र 60 एमएलडी ही हो रही है। यह स्थिति सामान्य दिनों की है। गर्मियों में तो हालात बेकाबू ही नजर आते हैं। उस समय हैंडपंप भी कोढ़ में खाज का काम करते हैं। जल स्तर नीचे जाने के कारण उनसे भी पानी नहीं निकलता।
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ऐसे में लोगों के पास जल संस्थान के टैंकरों से मुहैया कराये जाने वाले पानी के सिवा कोई विकल्प नहीं बचता है। जलापूर्ति की यह व्यवस्था पिछले तीन दशकों से एक जैसी ही है, जबकि, इस अवधि में आबादी में तीन गुना बढ़ोतरी हो चुकी है। क्षेत्रफल भी बढ़ कर दोगुना हो चुका है।
ऐसे में पाइप लाइन पूरी क्षमता से पानी उगलने के बाद भी अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचा पा रही। नगर के तीन दर्जन से अधिक मुहल्ले सिर्फ इसी वजह से जल संकट झेलने को विवश हैं।
जिम्मेदार अधिकारी स्माल एंड मीडियम टाउन के तहत बनी पेयजल महायोजना की फाइल (जवाहर लाल नेहरू न्यू अरबन यूनिक इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम) को पिछले चार साल से एक टेबल से दूसरे टेबल पर भेज कर जिम्मेदारी से बच रहे हैं। स्थिति यह है कि केंद्र सरकार ने प्रस्ताव को वापस कर शून्य पर पहुंचा दिया है और दोबारा ‘अमृत’ (अटल पुनरोद्धार व परिवर्तन मिशन) के तहत योजना बनाने के निर्देश दिए हैं।
यानी, प्यास बुझाने का काम फाइलों तक ही सिमटा हुआ है। यह महायोजना धरातल पर कब दौड़ सकेगी, इसका सवाल अब भी अबूझ पहेली है। हां, अफसर यह जरूर कहते हैं कि स्वीकृति मिल जाए और बजट जारी हो जाए तो पांच से सात साल में योजना के सारे काम पूरे कर लिए जाएंगे।
कोट-
‘केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत पुन: रिपोर्ट बनाने का काम पूरा कर लिया गया है। जल्द ही इस रिपोर्ट को स्वीकृति के लिए राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। ’
- एपी यादव, अधिशासी अभियंता निर्माण खंड जल निगम
एक नजर में महानगर की जलापूर्ति व्यवस्था
कुल आबादी:5,45,000
वार्ड की संख्या:60
इतने हैं मकान:95,000
घरेलू जल संयोजन:35,862
स्टैंड पोस्ट:150(आधे से अधिक खराब)
हैंडपंपों की संख्या:2921
टंकियों की कुल संख्या: 13
नल-कूपों की संख्या- 29
90 एमएलडी:पानी की है आवश्यकता
60 एमएलडी:पानी की हो रही आपूर्ति
यहां है सबसे अधिक समस्या
करगुवां जी, पिछोर, गुमनावारा, महाराणा प्रताप नगर, वकील कालोनी, राजपूत कालोनी, वीरांगना नगर, मयूर विहार कालोनी, सराय, सिलवटगंज, डड़ियापुरा, मद्रासी कालोनी, सत्यम कालोनी, भगवंतपुरा, कोछाभांवर, सिमरधा, गड़ियागांव, वीरांगना नगर, पाल कालोनी, सिद्धेश्वर नगर, अलीगोल, मेवातीपुरा, बाहर उन्नाव गेट।
चार लाख लोगों तक पानी पहुंचाने का दावा
नगर की आबादी 5.45 लाख है। जल संस्थान का दावा है कि इनमें साढ़े तीन लाख से अधिक लोगों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। नए क्षेत्र को छोड़ दें तो अन्य इलाकों में प्रति व्यक्ति औसतन 135 लीटर पानी मुहैया कराया जा रहा है।
हैंडपंप भी दे रहे धोखा
नगर में स्थापित 2921 हैंड पंपों में से कई ने भूगर्भ जल स्तर गिरने के कारण अभी से जवाब देना शुरू कर दिया है। गर्मी के सीजन में हालात और बदतर हो सकते हैं। जल संकट ग्रस्त क्षेत्र के लोगों की प्यास बुझाने के साधन हैंडपंप और निजी बोरिंग ही हैं।
इधर बिजली गई, उधर पानी ने छोड़ा साथ
झांसी में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित करनेवाले कारकों में बिजली प्रमुख है। नगर क्षेत्र के लोगों को पानी मुहैया कराने के लिए स्थापित की गईं टंकियां बिजली आपूर्ति बाधित रहने के कारण भर नहीं पाती हैं। ऐसे में कई हिस्सों में थोड़ी देर के लिए ही पानी की आपूर्ति हो पाती है।
वहीं, बिजली के अभाव में 29 स्थानों पर स्थापित नल कूप भी साथ छोड़ जाते हैं। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि पिछले पांच वर्ष से गर्मी में इन नलकूपों में जेनरेटर लगाने का प्रस्ताव तैयार किया जाता है, लेकिन कभी इसे अमलीजामा नहीं पहनाया गया।
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आंकड़ों के मुताबिक अब भी शहर की आबादी का बड़ा हिस्सा सरकारी पेयजल व्यवस्था पर निर्भर होने की बजाय हैंडपंप या अन्य स्रोतों पर आश्रित है। महानगर में 95 हजार मकान हैं, जिनमें से सिर्फ पचास हजार मकानों तक जल संस्थान की पाइप लाइन पहुंची है।
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आबादी के हिसाब से देखें तो यहां कम से कम 90 एमएलडी पानी की जरूरत है, लेकिन आपूर्ति इससे काफी कम मात्र 60 एमएलडी ही हो रही है। यह स्थिति सामान्य दिनों की है। गर्मियों में तो हालात बेकाबू ही नजर आते हैं। उस समय हैंडपंप भी कोढ़ में खाज का काम करते हैं। जल स्तर नीचे जाने के कारण उनसे भी पानी नहीं निकलता।
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ऐसे में लोगों के पास जल संस्थान के टैंकरों से मुहैया कराये जाने वाले पानी के सिवा कोई विकल्प नहीं बचता है। जलापूर्ति की यह व्यवस्था पिछले तीन दशकों से एक जैसी ही है, जबकि, इस अवधि में आबादी में तीन गुना बढ़ोतरी हो चुकी है। क्षेत्रफल भी बढ़ कर दोगुना हो चुका है।
ऐसे में पाइप लाइन पूरी क्षमता से पानी उगलने के बाद भी अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचा पा रही। नगर के तीन दर्जन से अधिक मुहल्ले सिर्फ इसी वजह से जल संकट झेलने को विवश हैं।
जिम्मेदार अधिकारी स्माल एंड मीडियम टाउन के तहत बनी पेयजल महायोजना की फाइल (जवाहर लाल नेहरू न्यू अरबन यूनिक इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम) को पिछले चार साल से एक टेबल से दूसरे टेबल पर भेज कर जिम्मेदारी से बच रहे हैं। स्थिति यह है कि केंद्र सरकार ने प्रस्ताव को वापस कर शून्य पर पहुंचा दिया है और दोबारा ‘अमृत’ (अटल पुनरोद्धार व परिवर्तन मिशन) के तहत योजना बनाने के निर्देश दिए हैं।
यानी, प्यास बुझाने का काम फाइलों तक ही सिमटा हुआ है। यह महायोजना धरातल पर कब दौड़ सकेगी, इसका सवाल अब भी अबूझ पहेली है। हां, अफसर यह जरूर कहते हैं कि स्वीकृति मिल जाए और बजट जारी हो जाए तो पांच से सात साल में योजना के सारे काम पूरे कर लिए जाएंगे।
कोट-
‘केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत पुन: रिपोर्ट बनाने का काम पूरा कर लिया गया है। जल्द ही इस रिपोर्ट को स्वीकृति के लिए राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। ’
- एपी यादव, अधिशासी अभियंता निर्माण खंड जल निगम
एक नजर में महानगर की जलापूर्ति व्यवस्था
कुल आबादी:5,45,000
वार्ड की संख्या:60
इतने हैं मकान:95,000
घरेलू जल संयोजन:35,862
स्टैंड पोस्ट:150(आधे से अधिक खराब)
हैंडपंपों की संख्या:2921
टंकियों की कुल संख्या: 13
नल-कूपों की संख्या- 29
90 एमएलडी:पानी की है आवश्यकता
60 एमएलडी:पानी की हो रही आपूर्ति
यहां है सबसे अधिक समस्या
करगुवां जी, पिछोर, गुमनावारा, महाराणा प्रताप नगर, वकील कालोनी, राजपूत कालोनी, वीरांगना नगर, मयूर विहार कालोनी, सराय, सिलवटगंज, डड़ियापुरा, मद्रासी कालोनी, सत्यम कालोनी, भगवंतपुरा, कोछाभांवर, सिमरधा, गड़ियागांव, वीरांगना नगर, पाल कालोनी, सिद्धेश्वर नगर, अलीगोल, मेवातीपुरा, बाहर उन्नाव गेट।
चार लाख लोगों तक पानी पहुंचाने का दावा
नगर की आबादी 5.45 लाख है। जल संस्थान का दावा है कि इनमें साढ़े तीन लाख से अधिक लोगों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। नए क्षेत्र को छोड़ दें तो अन्य इलाकों में प्रति व्यक्ति औसतन 135 लीटर पानी मुहैया कराया जा रहा है।
हैंडपंप भी दे रहे धोखा
नगर में स्थापित 2921 हैंड पंपों में से कई ने भूगर्भ जल स्तर गिरने के कारण अभी से जवाब देना शुरू कर दिया है। गर्मी के सीजन में हालात और बदतर हो सकते हैं। जल संकट ग्रस्त क्षेत्र के लोगों की प्यास बुझाने के साधन हैंडपंप और निजी बोरिंग ही हैं।
इधर बिजली गई, उधर पानी ने छोड़ा साथ
झांसी में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित करनेवाले कारकों में बिजली प्रमुख है। नगर क्षेत्र के लोगों को पानी मुहैया कराने के लिए स्थापित की गईं टंकियां बिजली आपूर्ति बाधित रहने के कारण भर नहीं पाती हैं। ऐसे में कई हिस्सों में थोड़ी देर के लिए ही पानी की आपूर्ति हो पाती है।
वहीं, बिजली के अभाव में 29 स्थानों पर स्थापित नल कूप भी साथ छोड़ जाते हैं। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि पिछले पांच वर्ष से गर्मी में इन नलकूपों में जेनरेटर लगाने का प्रस्ताव तैयार किया जाता है, लेकिन कभी इसे अमलीजामा नहीं पहनाया गया।