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फिर एक साल का हो सकता है बीएड
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 12 Dec 2016 12:49 AM IST
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b ed, jhansi news
- फोटो : demo
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अब फिर से बीएड कोर्स एक साल का हो सकता है। दो वर्षीय कोर्स हो जाने के बाद छात्र-छात्राओं का रुझान भी कम हुआ है। इस पर एनसीटीई कोर्स को फिर से एक साल का करने पर विचार कर रहा है। इस संबंध में एनसीटीई ने वेबसाइट पर लोगों से सुझाव भी मांग चुका है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षण संस्थान (एनसीटीई) ने बीते साल से बीएड और एमएड को दो वर्षीय कर दिया गया था। कोर्स दो वर्षीय होने के बाद फिजिकल एजूकेशन को विषय बना दिया गया। इसके अलावा पहले साल इंटर्नशिप चार सप्ताह और दूसरे साल 16 सप्ताह की कर दी गई। बीएड दो साल होने से अतिरिक्त पाठ्यक्रम गतिविधियों को ही बढ़ाया गया। बीएड संस्थानों की बात करें तो उन पर भी कोर्स का समय दोगुना होने से शिक्षक दो गुने करने का भार पड़ गया। नए नियम के अनुसार 100 सीटों को 50-50 सीटों के सेक्शन में विभाजित कर दिया गया। ऐसे में जहां पहले कॉलेजों को सौ सीटों पर 8 शिक्षक रखने का प्रावधान था, वो दो सेक्शन पर 16 हो गया। इसलिए अधिकांश कॉलेजों ने एक ही सेक्शन में प्रवेश दिया। वहीं, फीस को लेकर भी मानदंड तय नहीं हो सके।
इस वजह से शिक्षण संस्थानों ने अपनी मनमर्जी से फीस तय की। एक वर्षीय कोर्स में 55,000 रुपये फीस तय थी लेकिन दो वर्षीय कोर्स होने के बाद बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने ही 85,000 रुपये फीस ली। हर साल करीब 20 फीसदी छात्र कम होते गए। बीयू की बात करें तो इस साल कुल सीटों की तुलना में सिर्फ एक तिहाई छात्र-छात्रों ने बीएड प्रवेश परीक्षा दी। बीयू शिक्षा संस्थान के सूत्रों के अनुसार एनसीटीई अब कोर्स को फिर से एक साल का कर सकता है। इसको बल इसलिए भी मिलता है, क्योंकि एनसीटीई ने हाल ही में वेबसाइट पर लोगों से बीएड को लेकर सुझाव मांगे थे।
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गौरतलब है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षण संस्थान (एनसीटीई) ने बीते साल से बीएड और एमएड को दो वर्षीय कर दिया गया था। कोर्स दो वर्षीय होने के बाद फिजिकल एजूकेशन को विषय बना दिया गया। इसके अलावा पहले साल इंटर्नशिप चार सप्ताह और दूसरे साल 16 सप्ताह की कर दी गई। बीएड दो साल होने से अतिरिक्त पाठ्यक्रम गतिविधियों को ही बढ़ाया गया। बीएड संस्थानों की बात करें तो उन पर भी कोर्स का समय दोगुना होने से शिक्षक दो गुने करने का भार पड़ गया। नए नियम के अनुसार 100 सीटों को 50-50 सीटों के सेक्शन में विभाजित कर दिया गया। ऐसे में जहां पहले कॉलेजों को सौ सीटों पर 8 शिक्षक रखने का प्रावधान था, वो दो सेक्शन पर 16 हो गया। इसलिए अधिकांश कॉलेजों ने एक ही सेक्शन में प्रवेश दिया। वहीं, फीस को लेकर भी मानदंड तय नहीं हो सके।
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इस वजह से शिक्षण संस्थानों ने अपनी मनमर्जी से फीस तय की। एक वर्षीय कोर्स में 55,000 रुपये फीस तय थी लेकिन दो वर्षीय कोर्स होने के बाद बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने ही 85,000 रुपये फीस ली। हर साल करीब 20 फीसदी छात्र कम होते गए। बीयू की बात करें तो इस साल कुल सीटों की तुलना में सिर्फ एक तिहाई छात्र-छात्रों ने बीएड प्रवेश परीक्षा दी। बीयू शिक्षा संस्थान के सूत्रों के अनुसार एनसीटीई अब कोर्स को फिर से एक साल का कर सकता है। इसको बल इसलिए भी मिलता है, क्योंकि एनसीटीई ने हाल ही में वेबसाइट पर लोगों से बीएड को लेकर सुझाव मांगे थे।
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