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झांसी वर्कशाप में बनेंगे ‘दीनदयालु कोच’

Fri, 14 Oct 2016 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/झांसी
अमर उजाला ब्यूरो/झांसी Updated Fri, 14 Oct 2016 12:32 AM IST
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The workshop will be in Jhansi 'Dindyalu coach'
train, jhansi news - फोटो : demo pic
झांसी।  
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झांसी कोच मरम्मत कारखाने में अब ‘दीनदयालु कोच’ भी तैयार होंगे, जिनमें अन्य खूबियों के अलावा प्यूरीफाई मशीन भी लगाई जाएगी। इससे यात्रियों को चलती ट्रेन में पीने का साफ पानी उपलब्ध हो सकेगा। शुरूआत में जनरल कोचों में इस सिस्टम को लगाया जाएगा, इसके बाद अन्य श्रेणी की बोगियों में लगाने का काम होगा। इसे लगाने के लिए रेलवे वर्कशाप में काम शुरू हो गया है। अभी तक ये कोच चेन्नई और कपूरथला कोच फैक्टरी में तैयार हो रहे हैं।
रेल मंत्री ने बजट में जनरल कोचों में यात्रा की गुणवत्ता सुधारने के लिए आधुनिक अनारक्षित कोच ‘दीनदयालु’ बनाने की घोषणा की थी। इन कोचों में मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट, डस्टबिन, सामान रखने के लिए अधिक जगह व एक्वागार्ड (प्यूरीफाई मशीन) जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें एलईडी लाइटें और आग बुझाने के उपकरण भी होंगे। शुरूआत में इन कोचों को उन मार्गों पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां जनरल कोचों में सीटों के लिए भारी मांग है। इन कोचों में गद्देदार सीट व कोट हुक पर लगाए जा रहे हैं।
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रेलवे बोर्ड ने झांसी कोच मरम्मत कारखाने को भी अब ‘दीनदयालु कोच’ बनाने के निर्देश दिए है। इसे लगाने के लिए वर्कशाप में काम शुरू हो गया है। हाल में ही वर्कशाप अधिकारियों ने कुछ ठेकेदारों को बुलाकर इस सिस्टम को लगाने के लिए वार्ता की।
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‘प्यूरीफाइड मशीन लगाने का काम जनरल कोचों से शुरू होगा। इसके बाद स्लीपर व एसी कोच में भी यह सिस्टम लगाया जाएगा। गाइड लाइन मिलते ही योजना पर काम शुरू हो जाएगा।’
एडब्लू खान, डिप्टी सीएमई (कोच मरम्मत कारखाना)

अभी निकले हैं सिर्फ 38 कोच
भले ही झांसी कोच मरम्मत कारखाने में कर्मचारियों की कमी से अभी तक 38 कोच ही अब तक तैयार होकर निकले हैं। मगर जो कोच अभी तक निकले हैं, उनमें अन्य वर्कशॉप की तुलना में कुछ हटकर काम किए गए और यह प्रयोग लगातार जारी है।


कोचों में अभी यह चल रहे बदलाव
-  बायोटॉयलेट लगाए जा रहे हैं। उद्देश्य है कि स्टेशन व पटरियों से गंदगी को हटाया जा सके।
- अभी तक रेलवे जनरल व स्लीपर कोच में दरवाजे के निकट मोबाइल चार्ज करने के लिए दो प्वाइंट उपलब्ध कराता था, मगर अब मरम्मत होकर नये बनाए जा रहे सभी कोचों में 18-18 मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट लगाए जा रहे हैं।
- नए कोचों में अग्निरोधक सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे आग लगने की स्थिति में एकदम आग नहीं भड़क सकेगी। बर्थ धीरे-धीरे सुलगेगी।

एक कोच में आता है 18 सौ लीटर पानी
एक कोच की चार टंकियों की क्षमता 18 सौ लीटर पानी की होती है। इस हिसाब से एक ट्रेन के सभी कोचों को कम से कम 45 हजार लीटर पानी होता है।
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