{"_id":"6223c05eb09805707b27e3fe","slug":"the-voice-opened-due-to-the-bomb-blast-life-was-in-danger-every-moment-for-four-days-jhansi-news-jhs2161969106","type":"story","status":"publish","title_hn":"बम धमाके से खुल गई आवाज, चार दिन तक हर पल जोखिम में रही जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बम धमाके से खुल गई आवाज, चार दिन तक हर पल जोखिम में रही जान
विज्ञापन
झांसी। 24 फरवरी को मेरी बिल्डिंग से दो किलोमीटर दूर बम धमाका हुआ था। उसकी आवाज से सुबह पांच बजे नींद खुल गई थी। बिल्डिंग हिल गई थी। कुछ समझ नहीं आया क्या हुआ। फिर कुछ देर बाद दूसरा बम गिरा। तब पता चला कि रूस का यूक्रेन में हमला हो गया है। चार दिन वहां से निकलने में लग गए। यूक्रेन से झांसी लौटे बृजेंद्र राजपूत ने अपनी आपबीती बताई।
बृजेंद्र यूक्रेन के डेनिप्रो शहर में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। उसने बताया कि आज तक उसने कभी भी बम की आवाज नहीं सुनी थी। इसलिए हमले को वह समझ ही नहीं पाया। जब हमला तेज हो गया, तो लगने लगा कि अब शायद ही यूक्रेन से निकल पाऊंगा। रोजाना चार दिनों तक साइरन बजते ही बंकर में चला जाता था। पैसा और खाना खत्म हो गया था। बैंक, एटीएम काम नहीं कर रहे थे। दोस्तों से उधार लेकर बस के किराए की व्यवस्था की। 28 फरवरी को बस मिली तब रोमानिया बॉर्डर पहुंच पाया। अगले ही दिन बॉर्डर पर एंट्री मिल गई। तीन दिन वहां रुकने के बाद चार मार्च को दिल्ली के लिए फ्लाइट मिली। शनिवार की सुबह दिल्ली पहुंच गया और शाम को ट्रेन से झांसी आ गया। उसे देखते ही मां मनोज देवी ने गले लगा लिया। खुशी के आंसू भी छलक पड़े। भाई राघवेंद्र, भाभी वर्षा, भाई अरविंद, बहनोई हरेंद्र राजपूत ने माला पहनाई और मिठाई खिलाई।
घर वालों से कहता रहा सब ठीक है
यूक्रेन में बृजेंद्र बहुत कठिन परिस्थितियों में था, मगर वो घरवालों को वहां के हालत के बारे में ज्यादा नहीं बता रहा था। उसने कहा कि यदि वो सही हालात बता देता तो घर वाले घबरा जाते।
विज्ञापन
चार छात्र भारत लौटे, इनमें से दो झांसी आ गए
झांसी के रहने वाले चार छात्र-छात्रा भी झांसी लौट आए हैं। इनमें मनु और हर्षाली झांसी पहुंच गए हैं। जबकि, शाहरूख कानपुर और विभू दिल्ली पहुंच गया है। अब 14 में से अधिकांश छात्र यूक्रेन से भारत आ चुके हैं।
विज्ञापन
बृजेंद्र यूक्रेन के डेनिप्रो शहर में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। उसने बताया कि आज तक उसने कभी भी बम की आवाज नहीं सुनी थी। इसलिए हमले को वह समझ ही नहीं पाया। जब हमला तेज हो गया, तो लगने लगा कि अब शायद ही यूक्रेन से निकल पाऊंगा। रोजाना चार दिनों तक साइरन बजते ही बंकर में चला जाता था। पैसा और खाना खत्म हो गया था। बैंक, एटीएम काम नहीं कर रहे थे। दोस्तों से उधार लेकर बस के किराए की व्यवस्था की। 28 फरवरी को बस मिली तब रोमानिया बॉर्डर पहुंच पाया। अगले ही दिन बॉर्डर पर एंट्री मिल गई। तीन दिन वहां रुकने के बाद चार मार्च को दिल्ली के लिए फ्लाइट मिली। शनिवार की सुबह दिल्ली पहुंच गया और शाम को ट्रेन से झांसी आ गया। उसे देखते ही मां मनोज देवी ने गले लगा लिया। खुशी के आंसू भी छलक पड़े। भाई राघवेंद्र, भाभी वर्षा, भाई अरविंद, बहनोई हरेंद्र राजपूत ने माला पहनाई और मिठाई खिलाई।
विज्ञापन
घर वालों से कहता रहा सब ठीक है
यूक्रेन में बृजेंद्र बहुत कठिन परिस्थितियों में था, मगर वो घरवालों को वहां के हालत के बारे में ज्यादा नहीं बता रहा था। उसने कहा कि यदि वो सही हालात बता देता तो घर वाले घबरा जाते।
विज्ञापन
चार छात्र भारत लौटे, इनमें से दो झांसी आ गए
झांसी के रहने वाले चार छात्र-छात्रा भी झांसी लौट आए हैं। इनमें मनु और हर्षाली झांसी पहुंच गए हैं। जबकि, शाहरूख कानपुर और विभू दिल्ली पहुंच गया है। अब 14 में से अधिकांश छात्र यूक्रेन से भारत आ चुके हैं।