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Jhansi News: नाले को पाटकर कर दी प्लाटिंग, नगर निगम ने बिल्डर को थमाया नोटिस
Thu, 11 Jun 2026 02:20 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Thu, 11 Jun 2026 02:20 AM IST
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झांसी। हंसारी गिर्द में नाले की जमीन को पाटकर सरकारी भूमि की प्लाटिंग कर दी गई। शिकायत मिलने के पर नगर निगम की जांच में भी यह जमीन नाले के रूप में दर्ज पाई गई। इस पर निगम की ओर से बिल्डर नंदनपुरा निवासी बिल्डर नरेंद्र राय को नोटिस जारी करते हुए जवाब देने को कहा है। नगर निगम ने एक सप्ताह के भीतर संतोषजनक जवाब न मिलने पर पूर्व में जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी निरस्त कर देने की चेतावनी दी है।
हंसारी द्वितीय वार्ड पार्षद राखी सिंह परिहार ने इस मामले की शिकायत करते हुए बताया कि हंसारी गिर्द स्थित भूमि संख्या 1216, रकबा 0.101 हेक्टेयर राजस्व अभिलेखों में नाले के रूप में दर्ज सरकारी भूमि है। इस नाले को पाटकर इसकी जमीन पर प्लाटिंग की जा रही है। इस पर एक बड़ी आवासीय कॉलोनी बसाई जा रही है। पार्षद के मुताबिक नाला बंद हो जाने की वजह से हंसारी पावर हाउस एवं मेन रोड पर पानी भर जाता है। अब बारिश आने वाली है, स्थानीय लोगों को फिर से परेशानी उठानी पड़ेगी। पार्षद की शिकायत के बाद क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक की ओर से पैमाइश कराई गई। इसमें यह जमीन राजस्व अभिलेखों में नगर निगम के नाले के रूप में दर्ज पाई गई। आरोप है कि नाले पर कब्जा कर उसका स्वरूप बदल दिया गया। उसके आकार और क्षेत्रफल में भी बदलाव किया गया जबकि वर्ष 2021 में जारी अनापत्ति प्रमाणपत्र में साफ तौर पर संबंधित स्थल से गुजरने वाले नाले को खुला छोड़ने की बात कही गई थी। निगम प्रशासन ने इसे शर्त का उल्लंघन मानते हुए बिल्डर को एक सप्ताह का समय दिया है।
अपर नगर आयुक्त राहुल यादव के मुताबिक संपत्ति अधिकारी को इस मामले की जांच सौंपी गई है।
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हंसारी द्वितीय वार्ड पार्षद राखी सिंह परिहार ने इस मामले की शिकायत करते हुए बताया कि हंसारी गिर्द स्थित भूमि संख्या 1216, रकबा 0.101 हेक्टेयर राजस्व अभिलेखों में नाले के रूप में दर्ज सरकारी भूमि है। इस नाले को पाटकर इसकी जमीन पर प्लाटिंग की जा रही है। इस पर एक बड़ी आवासीय कॉलोनी बसाई जा रही है। पार्षद के मुताबिक नाला बंद हो जाने की वजह से हंसारी पावर हाउस एवं मेन रोड पर पानी भर जाता है। अब बारिश आने वाली है, स्थानीय लोगों को फिर से परेशानी उठानी पड़ेगी। पार्षद की शिकायत के बाद क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक की ओर से पैमाइश कराई गई। इसमें यह जमीन राजस्व अभिलेखों में नगर निगम के नाले के रूप में दर्ज पाई गई। आरोप है कि नाले पर कब्जा कर उसका स्वरूप बदल दिया गया। उसके आकार और क्षेत्रफल में भी बदलाव किया गया जबकि वर्ष 2021 में जारी अनापत्ति प्रमाणपत्र में साफ तौर पर संबंधित स्थल से गुजरने वाले नाले को खुला छोड़ने की बात कही गई थी। निगम प्रशासन ने इसे शर्त का उल्लंघन मानते हुए बिल्डर को एक सप्ताह का समय दिया है।
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अपर नगर आयुक्त राहुल यादव के मुताबिक संपत्ति अधिकारी को इस मामले की जांच सौंपी गई है।