फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   The loss of millions of hawala rule

हवाला कारोबार से शासन को करोड़ों की चपत

Sun, 30 Aug 2015 11:17 PM IST
झांसी/ ब्यूरो
झांसी/ ब्यूरो Updated Sun, 30 Aug 2015 11:17 PM IST
विज्ञापन
हवाला कारोबार की शहर में जड़ें लगातार मजबूत होती जा रही हैं। काले धन के लेन- देन का यह एक बड़ा जरिया बन गया है। कारोबारी जगत में यह लगातार अपनी जगह बनाता जा रहा है। इस कारोबार को संचालित करने वाले खूब पैसा बटोर रहे हैं। जबकि, सरकार को राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बावजूद, इस पर नकेल कसने की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बाजार के सूत्रों के मुताबिक नगर में लगभग आधा दर्जन हवाला कारोबारी पैसे के इस लेनदेन के कारोबार को संचालित कर रहे हैं। करोड़ों रुपये का रोजाना लेन देन हो रहा है।
विज्ञापन

हवाला कारोबार के जरिये सरकार की नजरों से छुपाकर एक शहर से दूसरे शहर में पैसा भेजना बेहद आसान होता है। पैसा भेजने वाली पार्टी को अपनी रकम यहां बैठे हवाला कारोबारी के पास जमा करनी होती है, जिसकी तत्काल डिलेवरी संबंधित स्थान पर कर दी जाती है। इसके एवज में एक लाख रुपये पर एक हजार रुपये कमीशन लिया जा रहा है। यह दर उन शहरों के लिए है, जिनसे लगातार पैसे का ट्रांजेक्शन होता रहता है। जिन शहरों से पार्टियों का कभी कभार ही पैसे का लेनदेन होता है, वहां कमीशन बढ़ाकर लिया जाता है। हवाला के जरिये भेजी जाने वाली रकम सरकार की नजरों में नहीं आती है, जिससे सरकार को इनकम टैक्स व बैंक कमीशन के रूप में मिलने वाले राजस्व का नुकसान उठाना पड़ता है।
विज्ञापन


नोट का नंबर बताते ही हो जाती है डिलेवरी
झांसी। हवाला कारोबारियों ने धन के ट्रांजेक्शन का फूल प्रूफ सिस्टम बना रखा है, जिसमें त्रुटि की गुंजाइश न के बराबर ही होती है। मसलन, यहां से किसी पार्टी को बाहरी शहर में रकम भेजनी है, तो उसे हवाला कारोबारी के पास रकम व कमीशन जमा करना होता है। इसके अलावा उसे संबंधित शहर में डिलेवरी लेने आने वाले व्यक्ति का पहचान चिह्न बताना होता है। पहचान चिह्न के रूप में दस व बीस रुपये के नोट का इस्तेमाल किया जाता है। पैसा भेजने वाली पार्टी को डिलेवरी लेने वाली पार्टी के दस या बीस रुपये के नोट का नंबर बताना होता है। बताए गए नंबर का नोट दिखाने पर तत्काल डिलेवरी दे दी जाती है। यह नोट कारोबारी द्वारा रसीद के रूप में अपने पास रख लिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


एक लाख पर दस हजार है आयकर
झांसी। हवाला कारोबार के माध्यम से करोड़ों रुपये का आदान - प्रदान धड़ल्ले से हो रहा है। इससे सरकार को राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक लाख रुपये की आय पर नियमानुसार दस हजार रुपये आयकर बनता है। जबकि, कालाधन या अघोषित आय पकड़े जाने पर यह कर सीमा एक लाख पर तीस हजार तीन सौ रुपये हो जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed