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समाज के अंतिम बच्चे को भी मिले शिक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 15 May 2016 12:21 AM IST
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school , jhansi news
- फोटो : demo
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झांसी। सरकार प्राथमिक शिक्षा की दशा और दिशा सुधारने के लिए कटिबद्ध है। सरकार का मानना है कि समाज के अंतिम बच्चे को भी शिक्षा मिले। यह उद्गार बेसिक शिक्षा परिषद उप्र नामित किए गए सलाहकार श्रीप्रकाश राय ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि उप्र सरकार प्राथमिक शिक्षा के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कर रही है। इनमें विद्यालयों में सोलर लाइटें लगवाना, चाहरदीवारी बनाकर उसे सुरक्षित करना, मिड डे मील का वितरण, शिक्षा को गुणवत्ता परक बनाने की दिशा में सकारात्मक प्रयास करना, बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण आदि शामिल हैं।
वर्तमान में छात्रांकन व स्कूल चलो अभियान पर जोर दिया जा रहा है। इन सभी का असर जुलाई से दिखाई देने लगेगा। उन्होंने कहा कि छात्रांकन कम होने पर शिक्षक को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा। विद्यालयों में पठन-पाठन के स्तर में सुधार हुआ है। इसका लाभ बच्चों को मिल रहा है।
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उन्होंने इस अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक भी की और उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस मौके पर बीएसए सर्वदानंद, नगर शिक्षा अधिकारी राजकुमार विश्वकर्मा के अलावा सभी खंड शिक्षा अधिकारी उपस्थित रहे।
केंद्र सरकार नहीं दे रही अपने हिस्से का पूरा पैसा
बेसिक शिक्षा परिषद के सलाहकार श्री प्रकाश राय ने आरोप लगाते हुए बताया कि प्राथमिक शिक्षा में गुणवत्ता युक्त सुधार के लिए उप्र सरकार पूरी तरह संवेदनशील है। लेकिन केंद्र सरकार अपने हिस्से की निर्धारित धनराशि का पूरा पैसा समय पर नहीं दे रही है।
इससे विकास कार्य अवरुद्ध हो रहे हैं। उप्र सरकार की भांति यदि केंद्र सरकार अपने हिस्से का पूरा पैसा समय पर दे तो शिक्षा का स्तर एक अलग ही मुकाम पर पहुंचेगा।
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उन्होंने बताया कि उप्र सरकार प्राथमिक शिक्षा के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कर रही है। इनमें विद्यालयों में सोलर लाइटें लगवाना, चाहरदीवारी बनाकर उसे सुरक्षित करना, मिड डे मील का वितरण, शिक्षा को गुणवत्ता परक बनाने की दिशा में सकारात्मक प्रयास करना, बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण आदि शामिल हैं।
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वर्तमान में छात्रांकन व स्कूल चलो अभियान पर जोर दिया जा रहा है। इन सभी का असर जुलाई से दिखाई देने लगेगा। उन्होंने कहा कि छात्रांकन कम होने पर शिक्षक को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा। विद्यालयों में पठन-पाठन के स्तर में सुधार हुआ है। इसका लाभ बच्चों को मिल रहा है।
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उन्होंने इस अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक भी की और उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस मौके पर बीएसए सर्वदानंद, नगर शिक्षा अधिकारी राजकुमार विश्वकर्मा के अलावा सभी खंड शिक्षा अधिकारी उपस्थित रहे।
केंद्र सरकार नहीं दे रही अपने हिस्से का पूरा पैसा
बेसिक शिक्षा परिषद के सलाहकार श्री प्रकाश राय ने आरोप लगाते हुए बताया कि प्राथमिक शिक्षा में गुणवत्ता युक्त सुधार के लिए उप्र सरकार पूरी तरह संवेदनशील है। लेकिन केंद्र सरकार अपने हिस्से की निर्धारित धनराशि का पूरा पैसा समय पर नहीं दे रही है।
इससे विकास कार्य अवरुद्ध हो रहे हैं। उप्र सरकार की भांति यदि केंद्र सरकार अपने हिस्से का पूरा पैसा समय पर दे तो शिक्षा का स्तर एक अलग ही मुकाम पर पहुंचेगा।