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आठ सालों से अच्छी बारिश को तरस रही झांसी की धरती
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झांसी। पिछले आठ सालों से झांसी की धरती अच्छी बारिश को तरस रही है। इन वर्षों में एक भी बार औसत वर्षा नहीं हुई है। 2018 में सर्वाधिक 710 मिलीमीटर पानी गिरा था। फिर कभी 500 को कभी 600 मिलीमीटर के आसपास बारिश होती रही।
झांसी समेत बुंदेलखंड में मानसूनी बारिश 15 जून से शुरू होती है, जो कि 15 सितंबर तक चलती है। जनपद में औसत वर्षा 850 मिलीमीटर है। मगर झांसी में अक्सर बारिश औसत वर्षा का आंकड़ा नहीं छू पाती है। सबसे ज्यादा बारिश जुलाई और अगस्त में होती है। वर्ष 2014-15 से 2021-22 तक एक बार भी झांसी में बारिश 800 मिलीमीटर तक का आंकड़ा नहीं छू पाई है। इस दौरान वर्ष 2017-18 में सबसे कम महज 391.33 मिलीमीटर पानी गिरा था। इसके बाद दो साल पहले 2020-21 में 402.58 मिलीमीटर वर्षा हुई। हालांकि, इस बार 250 मिलीमीटर से ज्यादा पानी गिर चुका है। मगर कभी-कभी ही अच्छी बारिश हो रही है। अक्सर बदरा छाने के बाद हल्की बारिश कर उड़ जा रहे हैं। देखने वाली बात ये है कि इस बार झांसी में 850 मिलीमीटर बारिश होती है या फिर मानसून फिर रूठ जाता है।
वर्ष वर्षा
2014-15 542.77
2015-16 470.30
2016-17 561.11
2017-18 391.33
2018-19 710.17
2019-20 562.22
2020-21 402.58
2021-22 664.72
(नोट: बारिश के आंकड़े मिलीमीटर में)
खाली होते जा रहे बांध, माताटीला में बचा सिर्फ पीने लायक पानी
समय पर बारिश न होने से बुंदेलखंड के बांधों का जलस्तर भी लगातार गिरता जा रहा है। हालात यह कि झांसी एवं ललितपुर को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने के लिए बने माताटीला बांध में अब सिर्फ पीने का पानी ही बचा। सिंचाई विभाग अभियंताओं के मुताबिक माताटीला में सिर्फ 993 फुट तक ही पानी है जबकि 989 फुट ही पानी इस्तेमाल हो पाता है। इसके बाद यहां लगी मोटर काम को कम नहीं करती। यहां 136 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी बचा। इसी तरह सुकुवां-ढुुकुवां में 20.96 एमसीएम, पारीछा बांध में 12.26 एमसीएम, खपरारा में 2.66 एमसीएम, सपरार में 8.52 एमसीएम, पहाड़ी में 7.27 एमसीएम, लहचूरा में 12.42 एमसीएम पानी ही रह गया है। इन सभी बांधों में सिंचाई के लिए इस समय पानी नहीं बचा।
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पांच साल में 1.21 मीटर घट गया भूगर्भ जलस्तर
लगातार कम होने वाली बारिश से झांसी की जमीन सूखती जा रही है। भूगर्भ जल विभाग से मिले आंकड़ों को देखें तो वर्ष 2017 में झांसी का प्री मानसून भूजल स्तर 8.68 मीटर था। जबकि, 2021 में ये 9.89 मीटर पर पहुंच गया। यानी कि जल स्तर में 1.21 मीटर भूजल स्तर गिरा है। हालांकि, इन पांच सालों में वर्ष 2019, 2020 में भूजल स्तर में सुधार भी हुआ। मगर बाकी तीन सालों में स्थिति ठीक नहीं रही। सबसे बुरे हालात बंगरा के हैं। यहां से भूगर्भ जलस्तर पौने तीन मीटर तक खिसक गया है। हैंडपंप और नलकूप पानी का साथ छोड़ने लगे हैं। झांसी के एक बड़े इलाके में टैंकर से पानी की सप्लाई की जा रही है। जल संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक करीब डेढ़ सौ हैंडपंप सूखना पर उन्हें रीबोर कराया जा रहा है।
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झांसी समेत बुंदेलखंड में मानसूनी बारिश 15 जून से शुरू होती है, जो कि 15 सितंबर तक चलती है। जनपद में औसत वर्षा 850 मिलीमीटर है। मगर झांसी में अक्सर बारिश औसत वर्षा का आंकड़ा नहीं छू पाती है। सबसे ज्यादा बारिश जुलाई और अगस्त में होती है। वर्ष 2014-15 से 2021-22 तक एक बार भी झांसी में बारिश 800 मिलीमीटर तक का आंकड़ा नहीं छू पाई है। इस दौरान वर्ष 2017-18 में सबसे कम महज 391.33 मिलीमीटर पानी गिरा था। इसके बाद दो साल पहले 2020-21 में 402.58 मिलीमीटर वर्षा हुई। हालांकि, इस बार 250 मिलीमीटर से ज्यादा पानी गिर चुका है। मगर कभी-कभी ही अच्छी बारिश हो रही है। अक्सर बदरा छाने के बाद हल्की बारिश कर उड़ जा रहे हैं। देखने वाली बात ये है कि इस बार झांसी में 850 मिलीमीटर बारिश होती है या फिर मानसून फिर रूठ जाता है।
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वर्ष वर्षा
2014-15 542.77
2015-16 470.30
2016-17 561.11
2017-18 391.33
2018-19 710.17
2019-20 562.22
2020-21 402.58
2021-22 664.72
(नोट: बारिश के आंकड़े मिलीमीटर में)
खाली होते जा रहे बांध, माताटीला में बचा सिर्फ पीने लायक पानी
समय पर बारिश न होने से बुंदेलखंड के बांधों का जलस्तर भी लगातार गिरता जा रहा है। हालात यह कि झांसी एवं ललितपुर को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने के लिए बने माताटीला बांध में अब सिर्फ पीने का पानी ही बचा। सिंचाई विभाग अभियंताओं के मुताबिक माताटीला में सिर्फ 993 फुट तक ही पानी है जबकि 989 फुट ही पानी इस्तेमाल हो पाता है। इसके बाद यहां लगी मोटर काम को कम नहीं करती। यहां 136 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी बचा। इसी तरह सुकुवां-ढुुकुवां में 20.96 एमसीएम, पारीछा बांध में 12.26 एमसीएम, खपरारा में 2.66 एमसीएम, सपरार में 8.52 एमसीएम, पहाड़ी में 7.27 एमसीएम, लहचूरा में 12.42 एमसीएम पानी ही रह गया है। इन सभी बांधों में सिंचाई के लिए इस समय पानी नहीं बचा।
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पांच साल में 1.21 मीटर घट गया भूगर्भ जलस्तर
लगातार कम होने वाली बारिश से झांसी की जमीन सूखती जा रही है। भूगर्भ जल विभाग से मिले आंकड़ों को देखें तो वर्ष 2017 में झांसी का प्री मानसून भूजल स्तर 8.68 मीटर था। जबकि, 2021 में ये 9.89 मीटर पर पहुंच गया। यानी कि जल स्तर में 1.21 मीटर भूजल स्तर गिरा है। हालांकि, इन पांच सालों में वर्ष 2019, 2020 में भूजल स्तर में सुधार भी हुआ। मगर बाकी तीन सालों में स्थिति ठीक नहीं रही। सबसे बुरे हालात बंगरा के हैं। यहां से भूगर्भ जलस्तर पौने तीन मीटर तक खिसक गया है। हैंडपंप और नलकूप पानी का साथ छोड़ने लगे हैं। झांसी के एक बड़े इलाके में टैंकर से पानी की सप्लाई की जा रही है। जल संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक करीब डेढ़ सौ हैंडपंप सूखना पर उन्हें रीबोर कराया जा रहा है।