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आजाद भारत में दुर्दशाग्रस्त है आजाद के अज्ञातवास स्थल की कुटिया

Tue, 17 Aug 2021 01:33 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 17 Aug 2021 01:33 AM IST
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The hut of Azad's unknown place is in bad shape even in independent India
झांसी। सन 1925 में काकोरी कांड और सांडर्स की हत्या के बाद अंग्रेजी हुकूमत की पुलिस के पीछे पड़ जाने पर चंद्रशेखर आजाद ओरछा के निकट स्थित सातार नदी के तट पर अज्ञातवास में रहे थे। दिन के समय वह सातार के तट पर बनी कुटिया में रहकर हनुमान जी की पूजा करते थेे तथा लोग उन्हें हरिशंकर ब्रह्मचारी के नाम से जानते थे। रात के समय वह मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर जंगल में एक पत्थर की गुफा के अंदर जाकर सो जाया करते थे। सातार नदी के तट पर स्थित इसी कुटिया से क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन करते थे। पर, आज आजाद भारत में चंद्रशेखर आजाद की राष्ट्रभक्ति की यादों को संजोकर रखने वाली यह कुटिया जर्जर हालत में है। कई जगह से दरारें आ चुकी हैं। ढंग से साफ सफाई भी नहीं होती है। जंगल में स्थित पत्थर की गुफा तक पहुंचने के लिए भी सरकार अब तक सड़क नहीं बना सकी है।
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सभागार और आवासों पर लाखों खर्च हो गए पर कुटिया ज्यों की त्यों बदहाल रही
आजादपुरा (ढिमरपुरा) निवासी शिव सिंह तोमर का कहना है कि उनके ही परिवार के मलखान सिंह तोमर ने चंद्रशेखर आजाद को सातार तट पर स्थित मंदिर पर हनुमान जी के मंदिर पर पुजारी नियुक्त किया था, वे ढिमरपुरा (आजादपुरा ) के तोमर परिवार के बच्चों को पढ़ाते भी थे। इसके बदले में उनके भोजन की व्यवस्था होती थी। हरिशंकर ब्रह्मचारी के रूप में रहने वाले आजाद के लिए मंदिर के पास ही एक कुटिया रहने के लिए दी गई थी, जिसमें उन्होंने लंबे समय तक निवास किया। देश आजाद होने के बाद भी यह कुटिया बदहाल है। इसमें जगह-जगह दरारें आ गईं हैं, हर बार आजाद की जयंती और बलिदान दिवस पर कार्यक्रम होते हैं, पर सरकार के नुमाइंदे इस कुटिया की ओर ध्यान नहीं देते हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सातार तट पर लाखों रुपये की लागत से चंद्रशेखर आजाद की आदमकद प्रतिमा का अनावरण व सभागार व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए आवासों का लोकार्पण किया था। पर, आजाद को अज्ञातवास के समय अपने आंचल में छुपाकर रखने वाली कुटिया ज्यों की त्यों बदहाल ही रही। इतना ही नहीं कुटिया से करीब एक किलोमीटर दूर पत्थर की गुफा है, जहां आजाद रात के समय सोते थे, इस गुफा तक जाने के लिए सरकार अब तक मार्ग नहीं बना सकी है।
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आजाद स्मारक को बना डाला विवाह घर
ग्रामीण हरचरन पाल बताते हैं कि उनके परिजन आजादपुरा (ढिमरपुरा) में रहते हैं, इस कारण उनका आजाद स्मारक पर अधिकांश आना जाना लगा रहता है। स्मारक की देखरेख नगर पंचायत ओरछा करती है। हालत यह है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए बनाए गए आवास व सभागार समेत पूरे आजाद स्मारक परिसर को विवाह घर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। शादियों के सीजन में नगर पंचायत इसे शादी समारोह के लिए किराये पर दे देती है। हर साल लाखों रुपये की आय होने के बाद भी नगर पंचायत आजाद की कुटिया की ढंग से देखरेख नहीं कर पा रही है। सैकड़ों सीसी मार्ग बनाने वाली नगर पंचायत आजाद की पत्थर की गुफा तक मार्ग नहीं बना पा रही है जो कि बेहद शर्मनाक है।
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