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झांसी के युवाओं पर चढ़ा ऑनलाइन गैंबलिंग का ‘भूत’, लाखों दे रहे फूंक

Tue, 26 Jul 2022 12:57 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 26 Jul 2022 12:57 AM IST
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The 'ghost' of online gambling mounted on the youth of Jhansi, giving millions
झांसी। इन दिनों किशोरों और युवाओं पर ऑनलाइन गैंबलिंग का भूत सवार है। खासकर कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चों के हाथों में मोबाइल फोन पहुंचा तो झांसी जैसे छोटे शहर में भी इस तरह के मामले तेजी से सामने आने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब किशोर और युवाओं में इसकी लत पड़ जाती है तो ये बीमारी बन जाती है। जिसे पैथोलॉजिकल गैंबलिंग कहते हैं।
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आजकल मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलकर पैसे जीतने के कई विज्ञापन आते रहते हैं। पैसे कमाने के लालच में 14 साल के किशोर से लेकर 18 से अधिक उम्र के युवा तक ऑनलाइन गेम खेलना शुरू कर देते हैं। शुरू में कुछ पैसे जीत जाते हैं तो गेम खेलने में और मन लगने लगता है। जब पैसे हारना शुरू करते हैं तो नुकसान की भरपाई करने के लिए बड़े-बड़े दांव लगाने लगते हैं। ऐसे में कई युवा लाखों रुपये फूंकने के बाद कर्जदार भी हो गए हैं, क्योंकि उन्होंने अपने दोस्तों, परिचितों से पैसे उधार लेकर भी ऑनलाइन गेम में दांव लगा दिया। ऑनलाइन कसीनो समेत अलग-अलग गेम खेलने के लिए पैसे इकट्ठा करने को किशोरों, युवाओं ने घरों के सामान से लेकर रिश्तेदारों के खाते तक से पैसे निकाल लिए। तंग आकर अभिभावक मनोचिकित्सकों के पास बच्चों का इलाज कराने पहुंच रहे हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि कोरोना काल के पहले झांसी समेत बुंदेलखंड के आसपास के जिलों में इस तरह के मामले सामने नहीं आते थे। मगर पिछले एक साल से हर महीने एक-दो केस मिल रहे हैं।
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अभिभावक इन बातों का रखें ध्यान
- मोबाइल पर बच्चा क्या कर रहा
- जरूरत न हो तो स्मार्ट फोन न दें
- बच्चे के बैंक में ज्यादा पैसे न रखें
- देखें कि फोन पर पैसे लगाने वाले गेम की एप तो नहीं है
- अकेले के बजाए ज्वाइंट बैंक खाता खुलवाएं
ये हैं मामले
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केस-1
ऑनलाइन कसीनो खेलकर हार गया 5.90 लाख
छतरपुर निवासी एक धनवान परिवार का 22 वर्षीय युवक ऑनलाइन कसीनो खेलते-खेलते तीन लाख रुपये हार गया। इसके लिए उसने बैंक से भी एक लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया। परिजनों को जानकारी हुई तो खाता बंद करा दिया। फिर ऑनलाइन एप से लोन लेकर युवक एक लाख रुपये हार गया। यही नहीं उसने आस पड़ोस में रहने वाले लोगों से भी करीब 90 हजार रुपये उधार लिए। तब जाकर परिजन उसे मनोचिकित्सक के पास लाए। उसका इलाज चल रहा है।
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केस-2
घर और दुकान का समान बेचकर खेलता था गेम
सिविल लाइन का रहने वाला एक युवक घर और दुकान का सामान बेचकर ऑनलाइन गेम में पैसे लगाता रहा। बताया गया कि दोस्तों के जरिए उसे ऑनलाइन गेम खेलने की लत लगी। शुरू में वो पैसे जीत गया तो खेलने की इच्छा और बढ़ गई। मगर जब वो पैसे हारने लगा तो उसकी गेम में पैसे लगाने के लिए सामान बेचना शुरू कर दिया। एक दिन वो घर पर रखी ज्वैलरी बेचने जा रहा था तब परिजन ने पकड़ लिया। फिर मनोचिकित्सक के पास लेकर आए।
केस-3
मौसी की ऑनलाइन बैंकिंग का पासवर्ड चुरा हारा 25 हजार
सीपरी बाजार का 10वीं में पढ़ने वाला किशोर अपनी मौसी की ऑनलाइन बैंकिंग का पासवर्ड चुनाकर मोबाइल पर कसीनो खेलकर दांव लगाता रहा। जैसे ही उनके मोबाइल पर पैसे कटने का मेसेज आता तो उसको डिलीट कर देता। एक दिन मौसी के मोबाइव से वो गेम खेलते-खेलते मेसेज डिलीट करना भूल गया। जब मौसी के बेटे ने पैसे कटने का मेसेज पढ़ा तो बैंक जाकर रिकॉर्ड निकलवाया। तब मामला खुला और जानकारी हुई कि तीन-चार महीने में खाते 25 हजार रुपये निकल चुके हैं।
केस-4
ट्यूशन फीस को गेम खेलकर कर दिया खर्च
शहर के रहने वाले एक युवक ने अपनी ट्यूशन फीस तक ऑनलाइन गेम में खर्च कर दी। इसके बाद वो पापा के क्रेडिट कार्ड से भी 50 हजार रुपये ऑनलाइन गेम में हार गया। परिजनों को इसकी जानकारी हुई तो मोबाइल छुड़ा दिया। इसके बाद वो परिजनों से बुरा बर्ताव करने लगा। मोबाइल न देने पर खाना-पीना तक छोड़ दिया। फिर परिजनों ने उसका मनोचिकित्सक से इलाज करवाया। अब वो पहले से काफी ठीक हो चुका है।
ऑनलाइन गैंबलिंग जब बीमारी बन जाती है तो इसे पैथोलॉजिकल गैंबलिंग कहते हैं। अब कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें किशोर, युवा लाखों रुपये ऑनलाइन गेम खेलकर खर्च कर दे रहे हैं। कोई परिजनों के क्रेडिट कार्ड से पैसे खर्च कर दे रहा है तो काई घर का सामान बेचकर। - डॉ. अर्जित गौरव, मनेाचिकित्सक।

पैथोलॉजिकल गैंबलिंग ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिस्ऑर्डर के तहत होने वाली बीमारी है। कोरोना काल के पहले ऐसे मामले सामने नहीं आते थे। मगर बच्चों के हाथ में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल पहुंचा तो अब हर महीने एक-दो केस सामने आने लगे हैं। - डॉ. शिकाफा जाफरीन, मनोचिकित्सक।
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