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राज्य में पहली बार मनेगा वजन दिवस
ब्यूरो
Updated Fri, 28 Aug 2015 12:49 AM IST
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उत्तर प्रदेश शासन ने राज्य में पहली बार वजन दिवस मनाने का फैसला किया
है। इस दौरान कुपोषण के शिकार बच्चों के वजन को तौल कर ब्योरा शासन को भेजा
जाएगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में करीब चौबीस लाख बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। प्रतिमाह जिले स्तर से कुपोषित बच्चों के वजन का ब्योरा शासन को भेजना होता है। मौजूदा समय में शासन के पास प्रतिमाह ढाई लाख बच्चों के वजन का ही ब्योरा भेजा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो आंगनबाड़ी केंद्रों से राज्य पोषण मिशन के अंतर्गत गोद लिए गांवों का ही ब्योरा भेजने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
इसी के मद्देनजर शासन ने वजन दिवस मनाने का फैसला लिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनोद कुमार यादव ने बताया कि कार्यक्रम के लिए सभी जिलों को दो चरणों में लक्ष्य पूरा करना होगा। सात और दस सितंबर को वजन दिवस मनाया जाएगा। इससे पूर्व जागरूकता रैली, पोस्टर, बैनर के जरिए इसका प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा। पोलियो की तरह ही इस दिवस पर भी बूथ स्थापना कराई जाएगी। कोशिश रहेगी की शहरी इलाकों के क्षेत्रों को ज्यादा से ज्यादा कवर किया जा सके। स्वास्थ्य और जिला प्रशासन के अधिकारियों की देखरेख में यह कार्यक्रम संपन्न होगा।
धुंधला हो रहा सीएम का सपना
झांसी। कुपोषण का शिकार मिलने पर बच्चों को विभिन्न ग्रेडों में रखा जाता है, इसके बाद पोषाहार देकर उनके वजन में बढ़ोतरी की जाती है। लंबाई के हिसाब से वजन बढ़ता है, तो ग्रेड में सुधार होता जाता है। चूंकि, अभी शासन के पास संपूर्ण ब्योरा नहीं पहुंचने से वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री के कुपोषण मुक्त राज्य का सपना पूरा होने की उम्मीद भी धुंधली हो रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में करीब चौबीस लाख बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। प्रतिमाह जिले स्तर से कुपोषित बच्चों के वजन का ब्योरा शासन को भेजना होता है। मौजूदा समय में शासन के पास प्रतिमाह ढाई लाख बच्चों के वजन का ही ब्योरा भेजा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो आंगनबाड़ी केंद्रों से राज्य पोषण मिशन के अंतर्गत गोद लिए गांवों का ही ब्योरा भेजने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
इसी के मद्देनजर शासन ने वजन दिवस मनाने का फैसला लिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनोद कुमार यादव ने बताया कि कार्यक्रम के लिए सभी जिलों को दो चरणों में लक्ष्य पूरा करना होगा। सात और दस सितंबर को वजन दिवस मनाया जाएगा। इससे पूर्व जागरूकता रैली, पोस्टर, बैनर के जरिए इसका प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा। पोलियो की तरह ही इस दिवस पर भी बूथ स्थापना कराई जाएगी। कोशिश रहेगी की शहरी इलाकों के क्षेत्रों को ज्यादा से ज्यादा कवर किया जा सके। स्वास्थ्य और जिला प्रशासन के अधिकारियों की देखरेख में यह कार्यक्रम संपन्न होगा।
धुंधला हो रहा सीएम का सपना
झांसी। कुपोषण का शिकार मिलने पर बच्चों को विभिन्न ग्रेडों में रखा जाता है, इसके बाद पोषाहार देकर उनके वजन में बढ़ोतरी की जाती है। लंबाई के हिसाब से वजन बढ़ता है, तो ग्रेड में सुधार होता जाता है। चूंकि, अभी शासन के पास संपूर्ण ब्योरा नहीं पहुंचने से वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री के कुपोषण मुक्त राज्य का सपना पूरा होने की उम्मीद भी धुंधली हो रही है।