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अभियान नहीं आंदोलन बने ‘जल क्रांति’
ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Sat, 06 Jun 2015 12:27 AM IST
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झांसी। जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय भारत सरकार के मुख्य सलाहकार बीएन नवलावाला ने कहा कि बुंदेलखंड ही नहीं संपूर्ण मानव जाति जल संकट से जूझ रही है। पांच हजार वर्ष पूर्व जो जल की उपलब्धता थी, वह अब भी है। लेकिन आबादी के पचास गुना हो जाने व अव्यवस्थित ढंग से पानी के उपभोग से समस्या उत्पन्न हुई है। आगे आने वाले 15 सालों में समस्या और बढ़ेगी। इससे निपटने के लिए सिर्फ सरकार कुछ नहीं कर सकती। लोगों को जागरूक होकर कदम बढ़ाना होगा। वह बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में जल क्रांति अभियान 2015-16 के शुभारंभ अवसर पर आयोजित समारोह को बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
उन्होेंने कहा कि जिस तरह स्वतंत्रता संग्राम की क्रांति का झांसी से सफल शुभारंभ हुआ, उसी तरह जल क्रांति अभियान भी सफल होगा। बुंदेलखंड क्षेत्र जल संरक्षण हेतु एक चुनौती है, परंतु इसके समाधान की दिशा में भारत सरकार काम कर रही है। जल क्रांति अभियान नहीं बल्कि आंदोलन होना चाहिए। उन्होंने केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नदियों के जल संग्रह को प्रथम रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। इससे एमपी व यूपी के करीब 13.2 लाख आबादी को लाभ होगा। वहीं, 6.33 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित किया जा सकेगा। दोनों प्रदेशों की सरकार से बलिदान देने की बात कहते हुए बीएन नवलावाला ने अपील की कि परियोजना लागू करने हेतु जो अवशेष कार्य हैं, उन्हें शीघ्र पूर्ण करें।
केंद्रीय जल आयोग, नई दिल्ली के अध्यक्ष एबी पांड्या ने कहा कि जल क्रांति अभियान झांसी, जयपुर व शिमला में शुरू किया जा रहा है। डीएम अनुराग यादव ने अभियान हेतु झांसी को चुने जाने पर भारत सरकार का आभार जताया। राज्यसभा सांसद चंद्रपाल यादव ने कहा कि यह अभियान न तो जल संसाधन विभाग द्वारा न ही सरकारी तंत्र द्वारा चलाया जा सकता है, इसके लिए जल क्रांति की आवश्यकता है।
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गरौठा विधायक दीपनारायण सिंह यादव ने कहा कि यदि पानी मिल जाए, तो हम संपूर्ण देश को खिला सकते हैं। नगर विधायक रवि शर्मा ने कहा कि जल संरक्षण हेतु हम देर से जागे हैं। लेकिन आज से ही जल संरक्षण करें तो स्थिति सुधार जाएगी। महापौर किरण वर्मा ने जल को अमृत बताते हुए कहा कि आज इसका संरक्षण नहीं करेंगे तो कल पीने को तरसेंगे। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने जल समस्या को बुंदेलखंड के लिए मुख्य चुनौती बताया। इस दौरान आईजीएफआरआई वैज्ञानिक रमेश सिंह एवं अनिल कुमार ने प्रोजेक्ट के जरिए जानकारी दी।
कार्यक्रम में सीडीओ संजय कुमार, डीएस मिश्रा, नगर आयुक्त अरुण प्रकाश, एस के अग्निहोत्री, डीडी कृषि डा. यूपी सिंह, एएस गोयल, बी एल अरुण, आदि लोग मौजूद रहे। संचालन डा. नीति शास्त्री ने किया। आभार केंद्रीय जल आयोग प्रबंधन निदेशालय आगरा के निदेशक राजेश यादव ने जताया।
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उन्होेंने कहा कि जिस तरह स्वतंत्रता संग्राम की क्रांति का झांसी से सफल शुभारंभ हुआ, उसी तरह जल क्रांति अभियान भी सफल होगा। बुंदेलखंड क्षेत्र जल संरक्षण हेतु एक चुनौती है, परंतु इसके समाधान की दिशा में भारत सरकार काम कर रही है। जल क्रांति अभियान नहीं बल्कि आंदोलन होना चाहिए। उन्होंने केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नदियों के जल संग्रह को प्रथम रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। इससे एमपी व यूपी के करीब 13.2 लाख आबादी को लाभ होगा। वहीं, 6.33 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित किया जा सकेगा। दोनों प्रदेशों की सरकार से बलिदान देने की बात कहते हुए बीएन नवलावाला ने अपील की कि परियोजना लागू करने हेतु जो अवशेष कार्य हैं, उन्हें शीघ्र पूर्ण करें।
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केंद्रीय जल आयोग, नई दिल्ली के अध्यक्ष एबी पांड्या ने कहा कि जल क्रांति अभियान झांसी, जयपुर व शिमला में शुरू किया जा रहा है। डीएम अनुराग यादव ने अभियान हेतु झांसी को चुने जाने पर भारत सरकार का आभार जताया। राज्यसभा सांसद चंद्रपाल यादव ने कहा कि यह अभियान न तो जल संसाधन विभाग द्वारा न ही सरकारी तंत्र द्वारा चलाया जा सकता है, इसके लिए जल क्रांति की आवश्यकता है।
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गरौठा विधायक दीपनारायण सिंह यादव ने कहा कि यदि पानी मिल जाए, तो हम संपूर्ण देश को खिला सकते हैं। नगर विधायक रवि शर्मा ने कहा कि जल संरक्षण हेतु हम देर से जागे हैं। लेकिन आज से ही जल संरक्षण करें तो स्थिति सुधार जाएगी। महापौर किरण वर्मा ने जल को अमृत बताते हुए कहा कि आज इसका संरक्षण नहीं करेंगे तो कल पीने को तरसेंगे। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने जल समस्या को बुंदेलखंड के लिए मुख्य चुनौती बताया। इस दौरान आईजीएफआरआई वैज्ञानिक रमेश सिंह एवं अनिल कुमार ने प्रोजेक्ट के जरिए जानकारी दी।
कार्यक्रम में सीडीओ संजय कुमार, डीएस मिश्रा, नगर आयुक्त अरुण प्रकाश, एस के अग्निहोत्री, डीडी कृषि डा. यूपी सिंह, एएस गोयल, बी एल अरुण, आदि लोग मौजूद रहे। संचालन डा. नीति शास्त्री ने किया। आभार केंद्रीय जल आयोग प्रबंधन निदेशालय आगरा के निदेशक राजेश यादव ने जताया।