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उत्तम त्याग कह्यो जग सारा, औषध शास्त्र अभय आहारा

Sat, 18 Sep 2021 02:02 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 18 Sep 2021 02:02 AM IST
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The best sacrifice did the foundation all, the drug care
झांसी। दशलक्षण पर्व पर मंदिरों में जिनेंद्र भगवान की पूजा करने के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। प्रात: काल से नगर के सभी मंदिरों में णमोकार मंत्र की गूंज सुनाई देती है। सायंकाल मंदिरों में हो रहे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देख जिनभक्त भाव विभोर हो रहे हैं।
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गांधी मार्ग स्थित बड़ा जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म के बारे में आर्यिका विविक्तश्री माताजी ने बताया कि त्याग परद्रव्यों में होने वाले राग और द्वेष का होता है। मात्र वस्तु त्याग देने से राग द्वेष समाप्त नहीं हो जाता पर पदार्थों में आसक्ति है। उनका त्याग आवश्यक है। सम्यक दृष्टि मनुष्य संसार और समाज में रहते हुए भी मानसिक राग द्वेष के अभाव में सन्यासी की तरह जीवन व्यतीत करने लगता है। उन्होंने कहा कि त्याग वह है जहां परिग्रह का त्याग किया जाता है। उन्होंने कहा कि दान चार प्रकार के होते हैं, औषधि, शास्त्र, अभय और आहार दान।
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पंचायत महामंत्री प्रवीण जैन ने बताया कि जैसे-जैसे पर्यूषण पर्व अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है श्रावकों का उत्साह बढ़ता जा रहा है। जिन मंदिरों में आत्म कल्याण के लिए भक्त बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। प्रात: काल प्रभु पूजन के दौरान पीत वस्त्र धारी श्रावक स्वर्ग के इंद्रों के समान प्रतीत होते हैं। इस दौरान श्रावक भक्तिभाव से नाचते-गाते हुए प्रभु की वंदना करते हैं। वहीं पर्व के दौरान श्रावक संयम का पालन कर व्रत और उपवास कर कर्मों की निर्जरा कर रहे हैं।
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इसके साथ ही नगरा, सदर बाजार, गुदरी, कटरा, घासमंडी, कैलाश रेजीडेंसी, राजगढ़ मंदिर में भी भक्तों ने पर्यूषण पर्व पर उत्तम त्याग धर्म की आराधना की।
दो घंटे में मिल गईं थी चोरी हुई मूर्तियां
झांसी। महानगर के मोहल्ला वैद्यराज स्थित पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन कटरा मंदिर के पार्श्वनाथ की महिमा अनूठी है। 700 वर्ष प्राचीन मंदिर का निर्माण वैसखिया परिवार ने कराया था। यहां भगवान पार्श्वनाथ समेत अन्य तीर्थकरों की करीब 90 मूर्तियां हैं। भगवान पार्श्वनाथ भक्तों के कष्ट दूर करते हैं। दिनेश जैन डीके बताते हैं कि वर्ष 2008 में मंदिर से रात 3 बजे करीब 84 मूर्तियां चोरी हो गई थीं। समाज को जब तक पता लगा तो सुबह पांच बजे तक मूर्तियां बरामद हो गईं। मंदिर प्रबंधक डॉ. प्रमोद जैन बताते हैं कि मंदिर में दो वेदी भगवान पार्श्वनाथ और एक वेदी भगवान शांतिनाथ की है। मंदिर में प्रतिदिन लगभग 150 घरों से श्रावक-श्राविकाएं अभिषेक और शांतिधारा पूजन और विधान करते हैं।
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