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दस का सिक्का: चलन में भी है और असली भी
अमर उजाला ब्यूरो/झांसी
Updated Fri, 16 Sep 2016 12:46 AM IST
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दस का सिक्का: चलन में भी है और असली भी
- फोटो : amar ujala
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दस रुपये के सिक्के को लेकर इन दिनों कई प्रकार की अफवाहें फैली हुई हैं। लोग सिक्के को चलन से बाहर बताकर इसे लेने से मना कर रहे हैं। सिक्के के नकली होने के कई तर्क भी दिए जा रहे हैं।
शहर में दस रुपये के सिक्कों के नकली होने को लेकर कई भ्रांतियां फैलाईं जा रही हैं, जिससे ऑटो चालक, दुकानदार और फेरी वाले इन सिक्कों को लेने से मना कर रहे हैं। लोग दस रुपये का सिक्का लेने से पहले उस पर भारतीय मुद्रा का चिन्ह और पीछे के हिस्से में खिंची लाइनें देख रहे हैं।
'
दस लाइनें होने पर सिक्के को असली मान रहे हैं, पीछे के भाग में पंद्रह लाइनें होने पर नकली मान रहे हैं। अमर उजाला ने जब आम लोगों से बात कर इसकी पड़ताल की तो पता चला कि सिक्का न तो चलन से बाहर हुआ है और न ही मार्केट में नकली सिक्के हैं, कोरी अफवाहों के कारण लोग सिक्कों को लेकर भ्रमित हैं। बैंक के अधिकारियों का कहना है कि सिक्के को नकली नहीं बनाया जा सकता है, क्योंकि सिक्कों के निर्माण की लागत सिक्के की कीमत से अधिक होती है। दस रुपये का सिक्का बनाने में लगभग बीस रुपये की लागत आती है। इस प्रकार नकली सिक्के बनाकर कोई घाटे का सौदा नहीं करना चाहेगा।
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रिजर्व बैंक द्वारा 2007 में दस रुपये के सिक्कों को मार्केट में उतारने का फैसला लिया था, जबकि भारतीय मुद्रा का चिन्ह 15 जुलाई 2010 को घोषित किया गया था। ऐसे में 2010 से पहले के सिक्कों पर भारतीय मुद्रा के चिन्ह होने का सवाल ही नहीं पैदा हो सकता।
सभी सिक्के हैं वैध
रिजर्व बैंक द्वारा संचालित सभी सिक्के वैध हैं, इनके नकली होने और प्रचलन बंद होने जैसी कोई सूचना नहीं आई है। बैंकों में भी स्वीकार्य किए जा रहे हैं। इनके नकली होने की सूचना कोरी अफवाह मात्र है, इन अफवाहों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है।
गिरीश कुमार अग्रवाल
मुख्य प्रबंधक
भारतीय स्टेट बैंक
नहीं है कोई कीमती धातु
सिक्कों में कोई कीमती धातु नहीं है और न ही इनको गलाया जा रहा है। इन सिक्कों में इतना पीतल नहीं है कि गलाने पर दस रुपये भी मिल सकें। यह अफवाहें ही हैं जो लोगों को परेशान करने के लिए फैलाई गई हैं।
सुनील अग्रवाल
सर्राफा व्यापारी
सवारियों को रुपये वापस करते हैं तो वे दस का सिक्का लेने से मना कर देते हैं। जब सवारियां सिक्के नहीं लेंगी तो हम सिक्कों को लेकर क्या करेंगे इसलिए हमने भी सिक्के लेने बंद कर दिए।
कृ ष्णकांत शुक्ला
आटो ड्राइवर
ग्राहक सामान लेने आते हैं तो यदि उन्हें दस का सिक्का वापस करो तो कहते हैं कि यह नकली है, हम नहीं लेंगे। मेरे पास खुद कई सिक्के इकट्ठे हो गए हैं, इसलिए मैंने भी लोगों से सिक्के लेने बंद कर दिए।
राजेश कुशवाहा
दुकानदार
सिक्कों में लाइनें कम ज्यादा होने से लोग सिक्के नहीं लेते और नकली बता कर चले जाते हैं। कहते हैं कि दस लाइन वाले सिक्के असली हैं जबकि ज्यादा लाइन वाले नकली हैं।
संजीव, दुकानदार
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शहर में दस रुपये के सिक्कों के नकली होने को लेकर कई भ्रांतियां फैलाईं जा रही हैं, जिससे ऑटो चालक, दुकानदार और फेरी वाले इन सिक्कों को लेने से मना कर रहे हैं। लोग दस रुपये का सिक्का लेने से पहले उस पर भारतीय मुद्रा का चिन्ह और पीछे के हिस्से में खिंची लाइनें देख रहे हैं।
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दस लाइनें होने पर सिक्के को असली मान रहे हैं, पीछे के भाग में पंद्रह लाइनें होने पर नकली मान रहे हैं। अमर उजाला ने जब आम लोगों से बात कर इसकी पड़ताल की तो पता चला कि सिक्का न तो चलन से बाहर हुआ है और न ही मार्केट में नकली सिक्के हैं, कोरी अफवाहों के कारण लोग सिक्कों को लेकर भ्रमित हैं। बैंक के अधिकारियों का कहना है कि सिक्के को नकली नहीं बनाया जा सकता है, क्योंकि सिक्कों के निर्माण की लागत सिक्के की कीमत से अधिक होती है। दस रुपये का सिक्का बनाने में लगभग बीस रुपये की लागत आती है। इस प्रकार नकली सिक्के बनाकर कोई घाटे का सौदा नहीं करना चाहेगा।
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रिजर्व बैंक द्वारा 2007 में दस रुपये के सिक्कों को मार्केट में उतारने का फैसला लिया था, जबकि भारतीय मुद्रा का चिन्ह 15 जुलाई 2010 को घोषित किया गया था। ऐसे में 2010 से पहले के सिक्कों पर भारतीय मुद्रा के चिन्ह होने का सवाल ही नहीं पैदा हो सकता।
सभी सिक्के हैं वैध
रिजर्व बैंक द्वारा संचालित सभी सिक्के वैध हैं, इनके नकली होने और प्रचलन बंद होने जैसी कोई सूचना नहीं आई है। बैंकों में भी स्वीकार्य किए जा रहे हैं। इनके नकली होने की सूचना कोरी अफवाह मात्र है, इन अफवाहों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है।
गिरीश कुमार अग्रवाल
मुख्य प्रबंधक
भारतीय स्टेट बैंक
नहीं है कोई कीमती धातु
सिक्कों में कोई कीमती धातु नहीं है और न ही इनको गलाया जा रहा है। इन सिक्कों में इतना पीतल नहीं है कि गलाने पर दस रुपये भी मिल सकें। यह अफवाहें ही हैं जो लोगों को परेशान करने के लिए फैलाई गई हैं।
सुनील अग्रवाल
सर्राफा व्यापारी
सवारियों को रुपये वापस करते हैं तो वे दस का सिक्का लेने से मना कर देते हैं। जब सवारियां सिक्के नहीं लेंगी तो हम सिक्कों को लेकर क्या करेंगे इसलिए हमने भी सिक्के लेने बंद कर दिए।
कृ ष्णकांत शुक्ला
आटो ड्राइवर
ग्राहक सामान लेने आते हैं तो यदि उन्हें दस का सिक्का वापस करो तो कहते हैं कि यह नकली है, हम नहीं लेंगे। मेरे पास खुद कई सिक्के इकट्ठे हो गए हैं, इसलिए मैंने भी लोगों से सिक्के लेने बंद कर दिए।
राजेश कुशवाहा
दुकानदार
सिक्कों में लाइनें कम ज्यादा होने से लोग सिक्के नहीं लेते और नकली बता कर चले जाते हैं। कहते हैं कि दस लाइन वाले सिक्के असली हैं जबकि ज्यादा लाइन वाले नकली हैं।
संजीव, दुकानदार