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इनकम टैक्स भरने में रहे आगे, सौ करोड़ से अधिक टैक्स भरा

Sun, 08 Aug 2021 01:30 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 08 Aug 2021 01:30 AM IST
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Taxpayers of Jhansi and Lalitpur paid more than 100 crore tax
झांसी। कोरोना काल की भयावह स्थिति के बाद भी झांसी- ललितपुर के करदाता पिछले साल 2020 में इनकम टैक्स भरने में पीछे नहीं रहे। पिछले सालों की तरह करदाताओं ने सौ करोड़ से अधिक इनकम टैक्स सरकार के खाते में जमा किया। इसमें छोटे- बड़े कारोबारियों से लेकर सरकारी व गैर सरकारी अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे। झांसी- ललितपुर परिक्षेत्र में 1.40 लाख करदाता है।
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वर्तमान समय में हरेक को आयकर रिटर्न भरना जरूरी है। केन्द्रीय आयकर प्रत्यक्ष बोर्ड ने निश्चित राशि से अधिक संपत्ति, सामान की खरीद फरोख्त, निवेश या किसी को सेवाएं प्रदान करने पर रिटर्न दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। दूसरा, हर खरीद, बिक्री, लोन लेने आदि में रिटर्न की आवश्यकता पड़ती है। झांसी- ललितपुर परिक्षेत्र के करदाता भी टैक्स भरने में आगे रहते हैं। यहां के करदाता पिछले कई सालों से लक्ष्य को पूरा करते आ रहे हैं। हर बार 100 करोड़ से 120 करोड़ के बीच लक्ष्य मिलता है जो पूरा होता है। पिछले साल कोरोना काल की भयावह स्थिति के कुछ महीनों में जरूर कारोबारियों के हालत खराब रहे। लेकिन इसके बाद भी वे इनकम टैक्स भरने में पीछे नहीं रहे। हर क्षेत्र के छोटे- बड़े कारोबारियों ने पिछले सालों की तरह ही टैक्स जमा किया। खासकर इसमें ऑटोमोबाइल्स, चिकित्सीय, बिल्डर, होटल, गल्ला, क्रशर, बालू जैसे व्यवसाय से जुड़े कारोबारी शामिल रहे।
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जमीन कारोबार में नहीं आई कमी
पिछले साल कोरोना काल में एक हजार लोगों ने जमीन की खरीद फरोख्त व फ्लैट खरीदे। इस अवधि में झांसी-ललितपुर परिक्षेत्र में एक हजार से अधिक ऐसे लोग थे, जिन्होंने 30 लाख से अधिक की संपत्तियां खरीदीं। चूंकि, आयकर विभाग को तीस लाख से अधिक की संपत्ति खरीदने या बेचने की जानकारी देना भी जरूरी है। विभाग ने ऐसे लोगों की जानकारी बैंकों और रजिस्ट्री कार्यालय से एकत्रित करने के बाद उन सबको नोटिस भेजा। जवाब से संतुष्ट न होने वालों से टैक्स वसूला गया।
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यह भी जानिए
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के आल इंडिया कॉस्ट इंडेक्स रूल के हिसाब से अगर किसी व्यक्ति ने बीस साल पहले कोई जमीन एक लाख रुपये में खरीदी थी और आज उसकी कीमत पांच लाख हो गई है। ऐसे में वह व्यक्ति पांच लाख की कीमत की जमीन को नौ लाख रुपये में बेच देता है, तो विक्रेता को चार लाख रुपये पर बीस प्रतिशत की दर से इनकम टैक्स जमा करना होगा। इसी तरह अगर कोई व्यक्ति छत्तीस महीने के अंदर जमीन खरीदता और उसे बेचता है तो ऐसे में जमीन खरीदने के बाद बेची गई राशि में जो अंतर होगा, उस पर टैक्स देना पड़ता है।
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