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सुस्त हुआ मनरेगा, अस्सी फीसद कार्य अब तक अधूरे
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झांसी। मनरेगा के जरिए शुरू कराए गए काम समय बीतने के साथ बेहद सुस्त पड़ते जा रहे। जनपद में करोड़ों रुपये से करीब 12,473 काम शुरू हुए। लेकिन अब तक करीब 2,201 काम ही पूरे हो सके। अधूरे पड़े अस्सी फीसदी कार्यों में कई काम बीच में ही बंद हो चुके। कार्य शुरू कराने में अफसर भी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।
कोविड-19 के प्रकोप के दौरान बड़ी संख्या में श्रमिक अपने गांव वापस लौटे थे। उनको रोजगार दिलाने के लिए सरकार ने मनरेगा में करोड़ों रुपये झोंक दिए। मनरेगा के जरिए सार्वजनिक कार्यों के साथ ही व्यक्तिगत लाभार्थी योजना भी आरंभ हुई। इसके जरिए मेड़बंधी, बकरी आश्रय स्थल, खेत समतल करने जैसे कार्य शामिल किए गए। अपने नंबर बढ़वाने की गरज से अफसरों ने सार्वजनिक एवं व्यक्तिगत लाभार्थी योजना में 12 हजार से अधिक कार्य चयनित कर लिए लेकिन, कुछ ही माह में काम पटरी से उतरने शुरू हो गए। जून और जुलाई में बारिश होने से कच्चे कार्य ठप हो गए।
उधर, मजदूरों के वापस जाने का सिलसिला भी आरंभ हो गया। मजदूरों की संख्या अचानक से कम हो गई। अब मौके पर पर्याप्त श्रमिक नहीं मिल रहे। ऐसी परिस्थितियों में काम प्रभावित होने लगे। कई जगह काम प्रारंभिक चरण से भी आगे नहीं बढ़ सके हैं। व्यक्तिगत लाभार्थी योजना भी बीच राह में ठप पड़ी है। इसी तरह करीब 77 लाख रुपये से कनेरा नदी की सफाई शुरू कराई गई थी लेकिन, यह काम भी समय पर पूरा नहीं हो सका। मनरेगा सेल के आंकड़ों के मुताबिक जिले में कुल 12,473 कार्य आरंभ कराए गए थे। इनमें से अभी तक सिर्फ 2,201 कार्य ही पूरे हो सके हैं।
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एक नजर में मनरेगा के आंकड़े
अब तक रोजगार पाने वाले परिवार 59,141।
अनुसूचित जाति 8.97 लाख।
अनुसूचित जनजाति 0.19 लाख।
कुल कार्य 12473।
पूर्ण कार्य 2201।
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कोविड-19 के प्रकोप के दौरान बड़ी संख्या में श्रमिक अपने गांव वापस लौटे थे। उनको रोजगार दिलाने के लिए सरकार ने मनरेगा में करोड़ों रुपये झोंक दिए। मनरेगा के जरिए सार्वजनिक कार्यों के साथ ही व्यक्तिगत लाभार्थी योजना भी आरंभ हुई। इसके जरिए मेड़बंधी, बकरी आश्रय स्थल, खेत समतल करने जैसे कार्य शामिल किए गए। अपने नंबर बढ़वाने की गरज से अफसरों ने सार्वजनिक एवं व्यक्तिगत लाभार्थी योजना में 12 हजार से अधिक कार्य चयनित कर लिए लेकिन, कुछ ही माह में काम पटरी से उतरने शुरू हो गए। जून और जुलाई में बारिश होने से कच्चे कार्य ठप हो गए।
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उधर, मजदूरों के वापस जाने का सिलसिला भी आरंभ हो गया। मजदूरों की संख्या अचानक से कम हो गई। अब मौके पर पर्याप्त श्रमिक नहीं मिल रहे। ऐसी परिस्थितियों में काम प्रभावित होने लगे। कई जगह काम प्रारंभिक चरण से भी आगे नहीं बढ़ सके हैं। व्यक्तिगत लाभार्थी योजना भी बीच राह में ठप पड़ी है। इसी तरह करीब 77 लाख रुपये से कनेरा नदी की सफाई शुरू कराई गई थी लेकिन, यह काम भी समय पर पूरा नहीं हो सका। मनरेगा सेल के आंकड़ों के मुताबिक जिले में कुल 12,473 कार्य आरंभ कराए गए थे। इनमें से अभी तक सिर्फ 2,201 कार्य ही पूरे हो सके हैं।
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एक नजर में मनरेगा के आंकड़े
अब तक रोजगार पाने वाले परिवार 59,141।
अनुसूचित जाति 8.97 लाख।
अनुसूचित जनजाति 0.19 लाख।
कुल कार्य 12473।
पूर्ण कार्य 2201।