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सुर और संगीत के अनूठे संगम हैं समीर भालेराव
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समीर भालेराव(
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सुर और संगीत के अनूठे संगम हैं समीर भालेराव
झांसी। ख्याल गायन के पुरोधा और संगीत जगत में ग्वालियर घराने की परंपरा सहेज रहे समीर भालेराव का नाम सुर और संगीतके संगम जैसा अनूठा है। अपने शास्त्रीय संगीत गायन के जरिए इन्होंने झांसी में संगीत के बड़े आयाम संजोए हैं। इनकी गायकी का हुनर दूर-दूर तक सराहा जाता है। संगीत कला रत्न एवं संगीत शिल्पी सहित कई पुरस्कार प्राप्त कर चुके समीर भालेराव को हाल ही में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के श्रेष्ठ अवार्ड में से एक ‘पंडित घनारंग प्रकाश सम्मान’ से सम्मानित किया गया है।
झांसी में दतिया गेट बाहर क्षेत्र में सरस्वती शिशु मंदिर के पास रहने वाले समीर भालेराव का जन्म 20 मई 1972 को झांसी में हुआ था। इनका परिवार अपनी गायन शैली के लिए मशहूर ग्वालियर घराने सेे जुड़ा है। इनके सुरों की साधना अपने घर से ही शुरू हुई थी। इन्होंने अपने पिता हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के पारखी पंडित प्रभाकर भालेराव से संगीत गायन की शिक्षा ली। इसके बाद इनकी साधना में ऐसा निखार आया कि वर्ष 1992 में ही इन्हें उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी लखनऊ द्वारा सम्मानित किया गया था। इन्होंने ऑल इंडिया म्यूजिक कॉफ्रेंस महाराष्ट्र और दिल्ली में भी हिस्सा लिया है।
ख्याल और सूफी गायन में पारंगत समीर भालेराव कादंबरी, भारत विकास परिषद, संस्कार भारती द्वारा सम्मानित किए जा चुके हैं। म्यूजिक संगीत कला केंद्र आगरा द्वारा संगीत सुमन, नाद साधक, 1997-1998 में मिली थी। 2012-13 में संगीत कला गौरव और एवार्ड मिला। इसके अलावा वह संगीत कला रत्न एवं संगीत शिल्पी सहित सैकड़ों पुरस्कार भी प्राप्त कर चुके हैं।
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इन्होंने पुणे, कोलकाता, ग्वालियर, दिल्ली, नागपुर, रायपुर, भिलाई, कानपुर, लखनऊ, बनारस, हिमाचल, पंजाब और हरियाणा में कई मंचों पर अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया। वह अपनी गुरुकुल म्यूजिक अकादमी के जरिए संगीत गायन विधा को आगे बढ़ा रहे हैं। इनके सिखाए कई शिष्य इंडियन आइडियल जैसे टीवी शो में बेहतरीन परफारमेंस दे चुके हैं। समीर भालेराव ख्याल, गजल, सेमी क्लासिकल और सूफी गायन में पारंगत हैं।
इनकी बेहतरीन गायकी के लोग कायल हैं। समीर भालेराव को हाल ही में 2020-21 पंडित घनारंग प्रकाश सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह एक प्रतिष्ठित अवार्ड है, डुमरांव घराना ध्रुपद गायन का अत्यंत प्राचीन घराना है। भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की प्रारंभिक शिक्षा इसी घराने से हुई थी। यह अवार्ड हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की अनमोल धरोहर को संपूर्ण भारत में प्रचार प्रसार करने के लिए देश के कई संगीत साधकों को प्रदान किया गया है।
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झांसी। ख्याल गायन के पुरोधा और संगीत जगत में ग्वालियर घराने की परंपरा सहेज रहे समीर भालेराव का नाम सुर और संगीतके संगम जैसा अनूठा है। अपने शास्त्रीय संगीत गायन के जरिए इन्होंने झांसी में संगीत के बड़े आयाम संजोए हैं। इनकी गायकी का हुनर दूर-दूर तक सराहा जाता है। संगीत कला रत्न एवं संगीत शिल्पी सहित कई पुरस्कार प्राप्त कर चुके समीर भालेराव को हाल ही में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के श्रेष्ठ अवार्ड में से एक ‘पंडित घनारंग प्रकाश सम्मान’ से सम्मानित किया गया है।
झांसी में दतिया गेट बाहर क्षेत्र में सरस्वती शिशु मंदिर के पास रहने वाले समीर भालेराव का जन्म 20 मई 1972 को झांसी में हुआ था। इनका परिवार अपनी गायन शैली के लिए मशहूर ग्वालियर घराने सेे जुड़ा है। इनके सुरों की साधना अपने घर से ही शुरू हुई थी। इन्होंने अपने पिता हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के पारखी पंडित प्रभाकर भालेराव से संगीत गायन की शिक्षा ली। इसके बाद इनकी साधना में ऐसा निखार आया कि वर्ष 1992 में ही इन्हें उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी लखनऊ द्वारा सम्मानित किया गया था। इन्होंने ऑल इंडिया म्यूजिक कॉफ्रेंस महाराष्ट्र और दिल्ली में भी हिस्सा लिया है।
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ख्याल और सूफी गायन में पारंगत समीर भालेराव कादंबरी, भारत विकास परिषद, संस्कार भारती द्वारा सम्मानित किए जा चुके हैं। म्यूजिक संगीत कला केंद्र आगरा द्वारा संगीत सुमन, नाद साधक, 1997-1998 में मिली थी। 2012-13 में संगीत कला गौरव और एवार्ड मिला। इसके अलावा वह संगीत कला रत्न एवं संगीत शिल्पी सहित सैकड़ों पुरस्कार भी प्राप्त कर चुके हैं।
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इन्होंने पुणे, कोलकाता, ग्वालियर, दिल्ली, नागपुर, रायपुर, भिलाई, कानपुर, लखनऊ, बनारस, हिमाचल, पंजाब और हरियाणा में कई मंचों पर अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया। वह अपनी गुरुकुल म्यूजिक अकादमी के जरिए संगीत गायन विधा को आगे बढ़ा रहे हैं। इनके सिखाए कई शिष्य इंडियन आइडियल जैसे टीवी शो में बेहतरीन परफारमेंस दे चुके हैं। समीर भालेराव ख्याल, गजल, सेमी क्लासिकल और सूफी गायन में पारंगत हैं।
इनकी बेहतरीन गायकी के लोग कायल हैं। समीर भालेराव को हाल ही में 2020-21 पंडित घनारंग प्रकाश सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह एक प्रतिष्ठित अवार्ड है, डुमरांव घराना ध्रुपद गायन का अत्यंत प्राचीन घराना है। भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की प्रारंभिक शिक्षा इसी घराने से हुई थी। यह अवार्ड हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की अनमोल धरोहर को संपूर्ण भारत में प्रचार प्रसार करने के लिए देश के कई संगीत साधकों को प्रदान किया गया है।