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संगत ने सुल्तान को बना दिया संत रामदास
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सुल्तान खान से बने संत रामदास।
- फोटो : DEHAT
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टहरौली (झांसी)। गरौठा तहसील के सिमरधा गांव में जन्मे सुल्तान खान संतों से ऐसे प्रभावित हुए कि वह संत रामदास बन गए। उन्होंने रामायण, गीता और वेदों का ज्ञान प्राप्त किया। पचास साल से प्रवचन कर रहे हैं। दूरदराज में होनी वाली कथाओं में प्रवचन के लिए उनको बुलाया जाता है। 70 वर्ष की उम्र में वह रोज एक घंटे योग करते हैं।
सुल्तान खान से संत रामदास बनने के बाद उन्होंने नर्मदा के किनारे संत रामदास योगी नाम से आश्रम बनवाया। वहां कई और संत भी रहते हैं। संत रामदास का कहना है कि वह बचपन में कथा सुनने के लिए जाते थे। वहां पर साधु और संतों के साथ उनका उठना बैठना हो गया। उनके साथ बैठ कर रामायण और गीता का ज्ञान लेते रहे। इसके बाद उन्होंने रामायण, श्रीमद्भागवत गीता के साथ वेदों का भी अध्ययन किया। उनके माता-पिता का निधन हो चुका है। एक बहन है जिसका नाम मदीना बानो है। वह गरौठा में ही अपने परिवार के साथ रहती है। उनका कहना है कि गांव में उनकी खेती है। वह अपने घर भी जाते हैं।
संतरामदास योगी ने बताया कि वह पचास साल से पूरे भारत में कथा कह रहे हैं। अच्छे आचरण से ही योगी की पहचान होती है। सभी लोगों को अपना कर्म अच्छा करना चाहिए। उन्होंने बताया कि मुस्लिम अभी उनको सुल्तान बाबा के नाम से जानते हैं। मुस्लिम उनको तकरीर करने के लिए भी बुलाते हैं। झांसी में भी एक बार तकरीर कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि वह वैष्णो संप्रदाय का पालन करते हैं। संत रामदास के करीबी संत राघवानंद बताते हैं कि ऐसा लगता है जैसे संत जी की उम्र ठहर गई हो। वह उनसे करीब 30 वर्षों से जुड़े हैं। उन्होंने संत रामदास को शुरू से ही कथा प्रवचन करते और ऐसे ही योगासन लगाते देखा है।
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सुल्तान खान से संत रामदास बनने के बाद उन्होंने नर्मदा के किनारे संत रामदास योगी नाम से आश्रम बनवाया। वहां कई और संत भी रहते हैं। संत रामदास का कहना है कि वह बचपन में कथा सुनने के लिए जाते थे। वहां पर साधु और संतों के साथ उनका उठना बैठना हो गया। उनके साथ बैठ कर रामायण और गीता का ज्ञान लेते रहे। इसके बाद उन्होंने रामायण, श्रीमद्भागवत गीता के साथ वेदों का भी अध्ययन किया। उनके माता-पिता का निधन हो चुका है। एक बहन है जिसका नाम मदीना बानो है। वह गरौठा में ही अपने परिवार के साथ रहती है। उनका कहना है कि गांव में उनकी खेती है। वह अपने घर भी जाते हैं।
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संतरामदास योगी ने बताया कि वह पचास साल से पूरे भारत में कथा कह रहे हैं। अच्छे आचरण से ही योगी की पहचान होती है। सभी लोगों को अपना कर्म अच्छा करना चाहिए। उन्होंने बताया कि मुस्लिम अभी उनको सुल्तान बाबा के नाम से जानते हैं। मुस्लिम उनको तकरीर करने के लिए भी बुलाते हैं। झांसी में भी एक बार तकरीर कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि वह वैष्णो संप्रदाय का पालन करते हैं। संत रामदास के करीबी संत राघवानंद बताते हैं कि ऐसा लगता है जैसे संत जी की उम्र ठहर गई हो। वह उनसे करीब 30 वर्षों से जुड़े हैं। उन्होंने संत रामदास को शुरू से ही कथा प्रवचन करते और ऐसे ही योगासन लगाते देखा है।
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