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पंद्रह साल से बदहाल है सुदामापुरी, न पानी की सुविधा है न सड़क
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झांसी। वार्ड नंबर तीस लहरगिर्द के मोहल्ला सुदामापुरी के हालात महानगर बनने के पंद्रह साल बाद भी जस के तस हैं। यहां पर न तो पानी की सुविधा के लिए पाइपलाइन है और न सड़क। नालियां नहीं होने के कारण घरों से निकला गंदा पानी रास्ते में भरा रहता है, जो लोगों के आवागमन में बाधा बनता है। कीचड़ होने के कारण स्कूली वाहन सुदामापुरी के अंदर जाने से कतराते हैं। स्कूल जाने के लिए बच्चों को करीब एक किलोमीटर दूर मेन रोड से ऑटो मिलते हैं। मोहल्ले वालों ने अपनी समस्या सभी जनप्रतिनिधियों को बताई, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिला।
सुदामापुरी (ढड़री) की आबादी करीब तीन हजार है। यहां पर पक्की सड़कें नहीं हैं। रास्तों में धूल उड़ती है। नालियां नहीं होने के कारण घरों से निकलने वाला गंदा पानी दरवाजों के सामने भरा रहता हैै। पानी बरसने पर रास्तों में कीचड़ हो जाता है। यहां के पढ़ने वाले बच्चे मेन रोड तक घर से पैदल ही जाते हैं, क्योंकि कोई भी ऑटो चालक सुदामापुरी के अंदर आने से कतराता है। यहां बिजली के खंभों की कमी है, इसलिए एक ही खंभे पर तारों का गुच्छा लटका है। लो वोल्टेज आता है। पानी की पाइपलाइन डली है, लेकिन अब तक जलापूर्ति नहीं हो रही हैै। इस कारण यहां के निवासी हैंडपंप या निजी बोरिंग पर निर्भर हैं।
सड़कों की स्थिति बहुत खराब है। कोई भी जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
- सीताराम
कीचड़ से होकर निकल रहे हैं। कई बार नगर निगम जाकर मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
- भोला सिंह
वोल्टेज बहुत कम आते हैं। गर्मियों में बिजली की भी परेशानी बढ़ जाती है।
- रामवती
अब तक बहुत प्रयास कर लिए, नगर निगम में भी अपनी समस्या बता चुके। लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई।
- धर्मेंद्र कुमार बघेल
जनप्रतिनिधियों से कहो तो बजट की कमी बताते हैं। जब वोट मांगने आते हैं तो सभी समस्याओं को हल करने का वादा करते हैं।
- रामगोपाल यादव
बरसात में मकान टापू बन जाता है, क्योंकि आसपास पानी भर जाने के कारण निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
- लक्ष्मण सिंह
नालियां नहीं होने के कारण बरसात में बहुत दिक्कत होती है। पूरे रास्ते में पानी भर जाता है।
- संतोषी
पानी की उचित निकासी नहीं होने से बरसात में मकान के अंदर पानी भर जाता है। परेशानी हो रही है, कोई सुनता नहीं।
- अनीता
स्कूल का ऑटो घर तक नहीं आता है। पैदल चलकर मेन रोड तक जाना पड़ता है। बस्ता टांगने से थक जाते हैं।
- प्रीति
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सुदामापुरी (ढड़री) की आबादी करीब तीन हजार है। यहां पर पक्की सड़कें नहीं हैं। रास्तों में धूल उड़ती है। नालियां नहीं होने के कारण घरों से निकलने वाला गंदा पानी दरवाजों के सामने भरा रहता हैै। पानी बरसने पर रास्तों में कीचड़ हो जाता है। यहां के पढ़ने वाले बच्चे मेन रोड तक घर से पैदल ही जाते हैं, क्योंकि कोई भी ऑटो चालक सुदामापुरी के अंदर आने से कतराता है। यहां बिजली के खंभों की कमी है, इसलिए एक ही खंभे पर तारों का गुच्छा लटका है। लो वोल्टेज आता है। पानी की पाइपलाइन डली है, लेकिन अब तक जलापूर्ति नहीं हो रही हैै। इस कारण यहां के निवासी हैंडपंप या निजी बोरिंग पर निर्भर हैं।
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सड़कों की स्थिति बहुत खराब है। कोई भी जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
- सीताराम
कीचड़ से होकर निकल रहे हैं। कई बार नगर निगम जाकर मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
- भोला सिंह
वोल्टेज बहुत कम आते हैं। गर्मियों में बिजली की भी परेशानी बढ़ जाती है।
- रामवती
अब तक बहुत प्रयास कर लिए, नगर निगम में भी अपनी समस्या बता चुके। लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई।
- धर्मेंद्र कुमार बघेल
जनप्रतिनिधियों से कहो तो बजट की कमी बताते हैं। जब वोट मांगने आते हैं तो सभी समस्याओं को हल करने का वादा करते हैं।
- रामगोपाल यादव
बरसात में मकान टापू बन जाता है, क्योंकि आसपास पानी भर जाने के कारण निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
- लक्ष्मण सिंह
नालियां नहीं होने के कारण बरसात में बहुत दिक्कत होती है। पूरे रास्ते में पानी भर जाता है।
- संतोषी
पानी की उचित निकासी नहीं होने से बरसात में मकान के अंदर पानी भर जाता है। परेशानी हो रही है, कोई सुनता नहीं।
- अनीता
स्कूल का ऑटो घर तक नहीं आता है। पैदल चलकर मेन रोड तक जाना पड़ता है। बस्ता टांगने से थक जाते हैं।
- प्रीति