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कोरोना के खौफ में पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए कोई नहीं आया तो मजदूर ने जान दी

Fri, 15 May 2020 11:36 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 15 May 2020 11:36 PM IST
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sucide
इसी कुएं में फंदा बनाकर भगवत ने दे दी जान - फोटो : DEHAT
झांसी। दिल्ली में मजदूरी न मिलने पर गर्भवती पत्नी के साथ पैदल चलकर अपने घर टहरौली क्षेत्र के पिपरा गांव आए भगवत को यह सपने में भी अंदाजा नहीं था कि साढ़े चार सौ से अधिक किलोमीटर सफर करके जिन अपनों के पास वह जा रहा है, कोरोना के डर से वे भी उससे दूरी बना लेंगे। गर्मी में इतना लंबा सफर पैदल तय करने के दौरान पत्नी की हालत बिगड़ गई। उसे मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया। वहां उसकी मौत हो गई। बृहस्पतिवार रात वह शव लेकर गांव पहुंचा, लेकिन कोरोना मरीज का संदेह होने पर कोई भी गांव वाला पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए आगे बढ़कर नहीं आया। इससे आहत युवक ने शव के पास ही पत्नी की साड़ी से फांसी लगाकर जान दे दी।
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शुक्रवार की सुबह पिपरा गांव के पास खेत में महिला का शव पड़ा था, जबकि युवक का शव कुएं में लटक रहा था। उसने फांसी लगाई थी। जानकारी होने पर गांव के लोग इकट्ठा हो गए। पुलिस भी पहुंच गई। बताया गया कि शव भगवत (35) व उसकी पत्नी शिवानी (28) के हैं। मौके पर टीबी की दवाई के पर्चे आदि पड़े थे। सुसाइड नोट भी पड़ा था।
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चाचा रामस्वरूप रायकवार ने बताया कि भगवत दिल्ली में मजदूरी करता था वहीं साथ में ही मजदूरी करने वाली शिवानी से उसने शादी कर ली थी। लॉकडाउन के कारण दिल्ली में जब काम नहीं मिली तो दोनों वहां से पैदल घर आए। पिछले दिनों तीन माह की गर्भवती शिवानी की तबियत बिगड़ गई। उसे मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया। बृहस्पतिवार को उसकी मौत हो गई। इसके बाद भगवत पत्नी का शव लेकर गांव पहुंचा। चूंकि पत्नी को टीबी की बीमारी थी, इसलिए कोरोना के भय से कोई भी व्यक्ति ने शव के पास जाना तक ठीक नहीं समझा। शव के पास भगवत ही रहा। रात में उसने पत्नी की साड़ी को पंपसेट से बांधकर कुएं में कूदकर फांसी लगा ली। थानाध्यक्ष टहरौली डॉ. आशीष मिश्रा ने बताया कि दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी ।
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सुसाइड नोट में लिखा न हमारा कोई है, न हम किसी के
एक पर्चे पर ही पीछे की ओर भगवत ने टूटी फूटी भाषा में सुसाइड नोट लिखा। इसमें लिखा गया कि हमारा जो भी सामान है परिवार में नहीं जाएगा। यह सब बुआ के पास जाएगा। पत्नी के न पिता है और न ही मां। दिल्ली से शादी करके लाया था। टीबी की मरीज थी। न हमारा कोई है न हम किसी के।
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