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स्ट्राइड प्रोग्राम में छह माह की परियोजनाओं पर होगा काम
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झांसी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के स्ट्राइड परियोजना के दूसरे बैच के मॉड्यूल-2 का समापन हो गया। कुलपति प्रो. जेवी वैशम्पायन ने सभी रिसोर्स पर्संस और प्रतिभागियों की ऑनलाइन बैठक ली। वीसी ने कहा कि अब प्रतिभागी मॉड्यूल-3 के अंतर्गत अपने गाइड्स के साथ सामाजिक सरोकार के विषयों में छह-छह महीने की परियोजनाओं को करेंगे।
सभी शिक्षकों और प्रतिभागियों से फीडबैक लेने के बाद कुलपति ने कहा कि आज सामाजिक समस्याओं का समावेशित प्रयास के तहत ही संपूर्ण समाधान संभव है। मॉड्यूल-3 में प्रतिभागियों को प्रोजेक्ट कार्य करने के लिए प्रति प्रतिभागी 10 हजार रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी। बैठक में डॉ. लवकुश द्विवेदी ने दोनों मॉड्यूल की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस दौरान कार्यक्रम संयोजक प्रो. एमएम सिंह, डॉ. सुनील त्रिवेदी, डॉ. इरा तिवारी, डॉ. शिल्पा मिश्रा, डॉ. योगेश गोस्वामी मौजूद रहे। दरअसल, भारत से 16 विश्वविद्यालयों और प्रदेश से बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को यह परियोजना मिली है। इसमें सामाजिक समस्याओं का वैज्ञानिक तरीकों से समाधान खोजने के लिए शोधकर्ता तैयार किए जा रहे हैं। द्वितीय बैच में जैव, रसायन, भौतिक, कृषि, फॉरेंसिक, जैव प्रौद्योगिकी, फूड साइंस टेक्नोलॉजी और सामाजिक विज्ञान सहित कुल 32 विद्यार्थियों को अवसर दिया गया है। इसमें से कई प्रतिभागी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बाहर जैसे कि इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ विश्वविद्यालय, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, ओस्मानिआ यूनिवर्सिटी, हैदराबाद से भी इस कार्यक्रम में प्रतिभाग कर रहे हैं। इनोवेशन सेंटर की ओर से मानव संसाधन एवं कौशल विकास के उद्देश्य से चलाए जा रही इस परियोजना में तीन वर्षों में लगभग 200 शिक्षकों, छात्रों व अन्य शोधार्थियों को चार चरणों में प्रशिक्षण के जरिए उत्तम शोध कार्य के लिए सक्षम बनाया जाएगा।
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सभी शिक्षकों और प्रतिभागियों से फीडबैक लेने के बाद कुलपति ने कहा कि आज सामाजिक समस्याओं का समावेशित प्रयास के तहत ही संपूर्ण समाधान संभव है। मॉड्यूल-3 में प्रतिभागियों को प्रोजेक्ट कार्य करने के लिए प्रति प्रतिभागी 10 हजार रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी। बैठक में डॉ. लवकुश द्विवेदी ने दोनों मॉड्यूल की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस दौरान कार्यक्रम संयोजक प्रो. एमएम सिंह, डॉ. सुनील त्रिवेदी, डॉ. इरा तिवारी, डॉ. शिल्पा मिश्रा, डॉ. योगेश गोस्वामी मौजूद रहे। दरअसल, भारत से 16 विश्वविद्यालयों और प्रदेश से बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को यह परियोजना मिली है। इसमें सामाजिक समस्याओं का वैज्ञानिक तरीकों से समाधान खोजने के लिए शोधकर्ता तैयार किए जा रहे हैं। द्वितीय बैच में जैव, रसायन, भौतिक, कृषि, फॉरेंसिक, जैव प्रौद्योगिकी, फूड साइंस टेक्नोलॉजी और सामाजिक विज्ञान सहित कुल 32 विद्यार्थियों को अवसर दिया गया है। इसमें से कई प्रतिभागी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बाहर जैसे कि इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ विश्वविद्यालय, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, ओस्मानिआ यूनिवर्सिटी, हैदराबाद से भी इस कार्यक्रम में प्रतिभाग कर रहे हैं। इनोवेशन सेंटर की ओर से मानव संसाधन एवं कौशल विकास के उद्देश्य से चलाए जा रही इस परियोजना में तीन वर्षों में लगभग 200 शिक्षकों, छात्रों व अन्य शोधार्थियों को चार चरणों में प्रशिक्षण के जरिए उत्तम शोध कार्य के लिए सक्षम बनाया जाएगा।
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