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लॉकडाउन में भी मनमानीः अब कॉपी-किताबों के लिए शुरू हुआ कमीशन का खेल
Sun, 03 May 2020 03:12 AM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 03 May 2020 03:12 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Social Media
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लॉकडाउन में स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगती नजर नहीं आ रही है। पहले स्कूलों की ओर से फीस जमा करने के लिए भेजे जा रहे संदेश परेशानी का सबब बने हुए थे, लेकिन अब कोर्स के लिए भी स्कूलों ने कमीशनखोरी का खेल शुरू कर दिया है।
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कॉपी-किताब की खरीद के लिए अभिभावकों के पास तय दुकान के संदेश भेजे जा रहे हैं। इस संदेश में होम डिलीवरी कराने के लिए स्कूल मोबाइल नंबर पर दे रहे हैं। इन दुकानों से कोर्स की खरीद करने के लिए अभिभावक मजबूर हैं।
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लॉकडाउन शुरू होने के बाद स्कूलों ने अभिभावकों को फीस के लिए संदेश भेजने शुरू कर दिए थे। इसे लेकर लगातार अभिभावकों ने विरोध दर्ज कराया।
अब स्कूलों ने कोर्स के नाम पर अभिभावकों को लूटने का खेल शुरू कर दिया है। स्कूलों में चल रही ऑनलाइन पढ़ाई के साथ कोर्स के लिए अभिभावकों को संदेश भेजे जा रहे हैं, जिसमें तय दुकान से कापी किताबें खरीदने का जिक्र है। इस संदेश में एक मोबाइल नंबर भी दिया जा रहा है, जिस पर कॉल कर होम डिलीवरी कराई जा रही है। इसके एवज में हजारों रुपये वसूल किए जा रहे हैं। इससे अभिभावकों की दिक्कत बढ़ रही है।
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तय रहता है स्कूलों का कमीशन
स्कूलों में कमीशनखोरी का खेल बहुत पुराना है। हर स्कूल अपने कमीशन के हिसाब से कोर्स बेचने के लिए दुकानदार तय कर लेते हैं। स्कूलों में किताबें भी वही लगाई जाती हैं, जो इन्हीं दुकानों पर मिलें। इसके साथ ही ड्रेस के नाम पर भी कमीशनखोरी खूब होती है। अभिभावकों को मजबूरी में किताबों और ड्रेस खरीदनी पड़ती है।
ये बोले अभिभावक
लॉकडाउन में स्कूलों को थोड़ी सहजता बरतने की जरूरत है। फीस में राहत नहीं मिली, तो कोर्स में राहत मिलनी चाहिए।
- श्वेता अग्रवाल, मिशन कंपाउंड
स्कूलों की ओर से कोर्स खरीदने के लिए संदेश भेजे जा रहे हैं। स्कूल लॉकडाउन में मददगार के तौर पर भूमिका निभाएं।
- शैलजा अग्रवाल, केकेपुरी कॉलोनी
लॉकडाउन में स्कूलों को फायदा न देखकर छात्रहित के बारे में पहल करने की जरूरत है। अब कोर्स में खेल चल रहा है।
- निशा, सीपरी बाजार
स्कूलों ने मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रख दिया है। मध्यम वर्ग स्कूलों की मनमानी के चलते बेहद परेशान है।
- ज्योति गुप्ता, गुदरी बाजार
कोर्स तो अभिभावकों को अपने स्तर से खरीदने की छूट मिलनी चाहिए, ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
- उपासना रायकवार, ब्रह्मनगर
स्कूलों की ओर से आ रहे संदेश परेशानी बढ़ा रहे हैं। लॉकडाउन में काम बंद है, तो कैसे अभिभावक फीस और कोर्स खरीद पाएंगे।
- अंजू सिंह, अमरीक बिहार