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ठंडी नहीं पड़नी चाहिए पहल, स्टेशन का नाम जल्द हो रानी के नाम पर
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झांसी। प्रदेश सरकार की ओर से झांसी रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन किए जाने का प्रस्ताव भेजा गया है। इससे झांसी का हर नागरिक गद्गद है और खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। लेकिन, लोगों का ये भी कहना है कि सरकार की ओर से की गई ये पहल अब ठंडी नहीं पड़ी चाहिए। अफसरों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आगे आकर स्टेशन का नाम बदलने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष पैरवी करनी चाहिए।
झांसी का रेलवे स्टेशन देश के पुराने स्टेशनों में से एक है। एक जनवरी 1889 को इसकी शुरुआत हुई थी। शुरुआत में भाप के इंजन से इक्का-दुक्का ट्रेनों का ही संचालन होता था। आज ये स्टेशन देश के प्रमुख स्टेशनों में से एक है। देश के हर कोने के लिए यहां से गाड़ियां उपलब्ध हैं। सामान्य दिनों में यहां से प्रतिदिन दो सौ से अधिक ट्रेनों गुजरती हैं। तेईस हजार से अधिक यात्रियों का रोजाना इस स्टेशन से आवागमन होता है। हालांकि, कोरोना काल में ये संख्या काफी कम हो गई है। लेकिन, हालात सामान्य होने के साथ-साथ गाड़ी और यात्रियों की संख्या भी अब बढ़ने लगी है। हाल ही में प्रदेश सरकार की ओर से केंद्र को स्टेशन का नाम बदलकर रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर रखे जाने का प्रस्ताव भेजा गया है। इससे झांसी के लोगों में खुशी की लहर है। उनकी मांग है कि केंद्र सरकार बगैर देरी किए नाम परिवर्तन की कार्यवाही पूरी कर ले। इसके अलावा लोगों का कहना है कि रानी के विषय में यहां से गुजरने वाले मुसाफिर ज्यादा से ज्यादा जान सकें, इसका भी बंदोबस्त किया जाए।
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झांसी की पहली पहचान वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई ही हैं। स्टेशन का नाम बदले जाने के साथ-साथ कुछ ऐसा प्रबंध भी किया जाना चाहिए, जिससे मुसाफिर ज्यादा से ज्यादा रानी के बारे में जान सकें।
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- अतुल पस्तोर, केके पुरी
वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई पूरी दुनिया में नारी सम्मान की प्रतीक हैं। उनके नाम पर झांसी स्टेशन का नाम किए जाने से महिला शक्ति को सम्मान देने का काम होगा। इसमें देरी नहीं की जानी चाहिए।
- राजेश परिहार, नई बस्ती
प्रदेश सरकार की ओर से पहल कर दी गई है, अब केंद्र में ये मामला लटक कर न रह जाए, इसके लिए सभी जनप्रतिनिधियों को एक राय होकर प्रयास शुरू कर देने चाहिए।
- नवीन माहेश्वरी, आशिक चौराहा
स्वराज्य की खातिर अंग्रेजों के खिलाफ संग्राम का सूत्रपात झांसी की धरती से रानी की अगुवाई में हुआ था। आजादी के बाद ही स्टेशन का नाम रानी के नाम पर हो जाना चाहिए था।
- अनूप अग्रवाल, झोकनबाग
रानी के बारे में देश और दुनिया के लोग ज्यादा से ज्यादा जानना चाहते हैं। स्टेशन का नाम रानी के नाम पर हो जाने से क्षेत्र के पर्यटन विकास में भी बड़ी मदद मिलेगी।
- राजेश प्रसाद श्रीवास्तव, खातीबाबा
स्टेशन का नाम बदले जाने को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा भेजे के प्रस्ताव पर केंद्र में मुहर लगवाने के लिए पैरोकारी की जानी चाहिए। अफसर व जनप्रतिनिधियों को इसके लिए आगे आना चाहिए।
- अशोक तिवारी, कारगिल पार्क
रानी ने झांसी और देश का मान पूरी दुनिया में बढ़ाया था। स्टेशन का नाम उनके नाम पर कर हम उनके प्रति कृतघभनता प्रकट करेंगे। इसमें देरी नहीं होनी चाहिए।
- कुमार उपाध्याय, सीपरी बाजार
जुबान पर वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई का नाम आते ही झांसी का नाम खुद ब खुद आ जाता है। प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र को अविलंब मुहर लगानी चाहिए।
- सत्येंद्र कुमार, नगरा
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झांसी का रेलवे स्टेशन देश के पुराने स्टेशनों में से एक है। एक जनवरी 1889 को इसकी शुरुआत हुई थी। शुरुआत में भाप के इंजन से इक्का-दुक्का ट्रेनों का ही संचालन होता था। आज ये स्टेशन देश के प्रमुख स्टेशनों में से एक है। देश के हर कोने के लिए यहां से गाड़ियां उपलब्ध हैं। सामान्य दिनों में यहां से प्रतिदिन दो सौ से अधिक ट्रेनों गुजरती हैं। तेईस हजार से अधिक यात्रियों का रोजाना इस स्टेशन से आवागमन होता है। हालांकि, कोरोना काल में ये संख्या काफी कम हो गई है। लेकिन, हालात सामान्य होने के साथ-साथ गाड़ी और यात्रियों की संख्या भी अब बढ़ने लगी है। हाल ही में प्रदेश सरकार की ओर से केंद्र को स्टेशन का नाम बदलकर रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर रखे जाने का प्रस्ताव भेजा गया है। इससे झांसी के लोगों में खुशी की लहर है। उनकी मांग है कि केंद्र सरकार बगैर देरी किए नाम परिवर्तन की कार्यवाही पूरी कर ले। इसके अलावा लोगों का कहना है कि रानी के विषय में यहां से गुजरने वाले मुसाफिर ज्यादा से ज्यादा जान सकें, इसका भी बंदोबस्त किया जाए।
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झांसी की पहली पहचान वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई ही हैं। स्टेशन का नाम बदले जाने के साथ-साथ कुछ ऐसा प्रबंध भी किया जाना चाहिए, जिससे मुसाफिर ज्यादा से ज्यादा रानी के बारे में जान सकें।
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- अतुल पस्तोर, केके पुरी
वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई पूरी दुनिया में नारी सम्मान की प्रतीक हैं। उनके नाम पर झांसी स्टेशन का नाम किए जाने से महिला शक्ति को सम्मान देने का काम होगा। इसमें देरी नहीं की जानी चाहिए।
- राजेश परिहार, नई बस्ती
प्रदेश सरकार की ओर से पहल कर दी गई है, अब केंद्र में ये मामला लटक कर न रह जाए, इसके लिए सभी जनप्रतिनिधियों को एक राय होकर प्रयास शुरू कर देने चाहिए।
- नवीन माहेश्वरी, आशिक चौराहा
स्वराज्य की खातिर अंग्रेजों के खिलाफ संग्राम का सूत्रपात झांसी की धरती से रानी की अगुवाई में हुआ था। आजादी के बाद ही स्टेशन का नाम रानी के नाम पर हो जाना चाहिए था।
- अनूप अग्रवाल, झोकनबाग
रानी के बारे में देश और दुनिया के लोग ज्यादा से ज्यादा जानना चाहते हैं। स्टेशन का नाम रानी के नाम पर हो जाने से क्षेत्र के पर्यटन विकास में भी बड़ी मदद मिलेगी।
- राजेश प्रसाद श्रीवास्तव, खातीबाबा
स्टेशन का नाम बदले जाने को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा भेजे के प्रस्ताव पर केंद्र में मुहर लगवाने के लिए पैरोकारी की जानी चाहिए। अफसर व जनप्रतिनिधियों को इसके लिए आगे आना चाहिए।
- अशोक तिवारी, कारगिल पार्क
रानी ने झांसी और देश का मान पूरी दुनिया में बढ़ाया था। स्टेशन का नाम उनके नाम पर कर हम उनके प्रति कृतघभनता प्रकट करेंगे। इसमें देरी नहीं होनी चाहिए।
- कुमार उपाध्याय, सीपरी बाजार
जुबान पर वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई का नाम आते ही झांसी का नाम खुद ब खुद आ जाता है। प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र को अविलंब मुहर लगानी चाहिए।
- सत्येंद्र कुमार, नगरा