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प्रदेश स्तर की बॉक्सिंग प्रतियोगिताओं में तीन मेडल हासिल कर चुकी थी कृतिका
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झांसी। कृतिका की उम्र महज 20 साल ही थी। लेकिन, जिंदगी के थोड़े से सफर में वह ऊंचा मुकाम हासिल कर चुकी थी। कृतिका प्रदेश स्तर की बॉक्सिंग की प्रतियोगिता में तीन मेडल हासिल कर चुकी थी। साथ ही नेशनल इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में भी कृतिका ने अपने शानदार खेल का प्रदर्शन किया था। उसकी इस उपलब्धि पर कृतिका का झांसी ही नहीं, बल्कि अलीगढ़ में भी सम्मान हुआ था।
कृतिका पढ़ाई में शुरू से ही होशियार थी। इसके अलावा उसकी रुचि खेलों में भी थी। खेल में सबसे ज्यादा रुचि उसकी बॉक्सिंग में थी। इस क्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल करने के लिए वह नियमित रूप से अभ्यास भी करती थी। यही वजह थी कि कम समय में ही कृतिका की गिनती प्रदेश की अच्छी महिला बॉक्सरों में होने लगी थी। प्रदेश स्तर पर एक के बाद एक आयोजित हुईं प्रतियोगिताओं में कृतिका ने तीन मेडल हासिल किए थे। इस कामयाबी के बलबूते पर उसे राष्ट्रीय स्तर पर हुई अंतरविश्वविद्यालीय प्रतियोगिता में भी हिस्सा लेने का मौका मिला था, जिसमें उसने शानदार खेल प्रदर्शन किया था।
जिला बॉक्सिंग संघ के अध्यक्ष डा. रोहित पांडेय ने बताया कि कृतिका में बॉक्सिंग के प्रति गजब का समर्पण था। नियमित अभ्यास की वजह से उसने प्रदेश की महिला बॉक्सरों में अपना स्थान बना लिया था। प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताओं में कृतिका ने तीन मेडल हासिल किए थे। आने वाले दिनों में देश की महिला बाक्सरों में कृतिका अग्रणी साबित होती।
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सभी बन जाते थे कृतिका के दोस्त
झांसी। कृतिका बेहद व्यवहार कुशल थी। साथ में पढ़ने वाली लड़कियां हों या लड़के, सभी की मदद के लिए वह हर समय आगे आ जाया करती थी। यही वजह थी कि सभी उसके दोस्त बन जाते थे। परिवार में भी वह सबकी अजीज थी। घर का कोई भी काम हो, तुरंत बाइक उठाकर दौड़ पड़ती थी। परिस्थितियां कैसी भी हों, कभी वह डरती या घबराती नहीं थी। बुंदेलखंड महाविद्यालय की एनसीसी की शिक्षिका नीलम में बताया कि वह अपने कॅरियर के प्रति बेहद गंभीर थी। नियमित रनिंग करती थी। एनसीसी की गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया करती थी।
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कृतिका पढ़ाई में शुरू से ही होशियार थी। इसके अलावा उसकी रुचि खेलों में भी थी। खेल में सबसे ज्यादा रुचि उसकी बॉक्सिंग में थी। इस क्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल करने के लिए वह नियमित रूप से अभ्यास भी करती थी। यही वजह थी कि कम समय में ही कृतिका की गिनती प्रदेश की अच्छी महिला बॉक्सरों में होने लगी थी। प्रदेश स्तर पर एक के बाद एक आयोजित हुईं प्रतियोगिताओं में कृतिका ने तीन मेडल हासिल किए थे। इस कामयाबी के बलबूते पर उसे राष्ट्रीय स्तर पर हुई अंतरविश्वविद्यालीय प्रतियोगिता में भी हिस्सा लेने का मौका मिला था, जिसमें उसने शानदार खेल प्रदर्शन किया था।
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जिला बॉक्सिंग संघ के अध्यक्ष डा. रोहित पांडेय ने बताया कि कृतिका में बॉक्सिंग के प्रति गजब का समर्पण था। नियमित अभ्यास की वजह से उसने प्रदेश की महिला बॉक्सरों में अपना स्थान बना लिया था। प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताओं में कृतिका ने तीन मेडल हासिल किए थे। आने वाले दिनों में देश की महिला बाक्सरों में कृतिका अग्रणी साबित होती।
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सभी बन जाते थे कृतिका के दोस्त
झांसी। कृतिका बेहद व्यवहार कुशल थी। साथ में पढ़ने वाली लड़कियां हों या लड़के, सभी की मदद के लिए वह हर समय आगे आ जाया करती थी। यही वजह थी कि सभी उसके दोस्त बन जाते थे। परिवार में भी वह सबकी अजीज थी। घर का कोई भी काम हो, तुरंत बाइक उठाकर दौड़ पड़ती थी। परिस्थितियां कैसी भी हों, कभी वह डरती या घबराती नहीं थी। बुंदेलखंड महाविद्यालय की एनसीसी की शिक्षिका नीलम में बताया कि वह अपने कॅरियर के प्रति बेहद गंभीर थी। नियमित रनिंग करती थी। एनसीसी की गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया करती थी।