{"_id":"570419214f1c1b0e35c815af","slug":"special-coach-for-common-passenger","type":"story","status":"publish","title_hn":"आम यात्रियों के लिए ‘खास’ कोच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आम यात्रियों के लिए ‘खास’ कोच
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 06 Apr 2016 01:29 AM IST
विज्ञापन
special coach, jhansi hindi news
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुकेश साहू
झांसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वच्छता अभियान का असर रेलवे स्टेशनों से लेकर ट्रेनों तक में दिखने लगा है। रेलवे कोच मरम्मत कारखाने में आम यात्रियों के कोचों में भी बायो टॉयलेट लगाए जा रहे हैं।
रेलवे वर्कशॉप के निकट महावीरन स्क्रैप यार्ड में बहुराष्ट्रीय कंपनी एलएनटी द्वारा एक सौ दस करोड़ की लागत से कोच मरम्मत कारखाने (सवारी डिब्बा) का निर्माण अक्तूबर 2014 में किया गया है। भले ही इस कारखाने में कर्मचारियों की कमी से बारह कोच ही अब तक तैयार होकर निकले हैं। मगर जो भी कोच अभी तक निकले हैं, उनमें अन्य वर्कशॉप की तुलना में कुछ हटकर काम किए गए और यह प्रयोग लगातार जारी है।
देश के अन्य वर्कशाप में जो कोच पीओएच (पीरियोडिक ओवर हालिंग) के लिए जाते हैं, उन्हें खराब पार्ट को उसी स्तर पर सुधार कर तैयार कर दिया जाता है, जबकि झांसी वर्कशाप में तैयार किए गए छह जनरल व छह स्लीपर कोचों में दो को छोड़कर अन्य सभी में बायो टॉयलेट लगाए गए हैं। उद्देश्य है कि स्टेशन व पटरियों से गंदगी को हटाया जा सके।
विज्ञापन
बायो टॉयलेट की यह है प्रक्रिया
बायो टॉयलेट में पॉट के नीचे एक टंकी बनी होती है, जिसमें बैक्टीरिया का घोल भरा रहता है। टंकी छह भागों में बंटी रहती है। यात्री जब इसे इस्तेमाल करते हैं तो मल हर हिस्से में बारी-बारी पहुंचता है। अंतिम हिस्से तक पहुंचते-पहुंचते मल साफ पानी में बदल जाता है। इस पानी को ट्रेन के अंतिम स्टेशन पर पहुंचने पर निकाल दिया जाता है।
बायो टॉयलेट का समझदारी से करें प्रयोग
मुख्य कारखाना प्रबंधक अतुल्य सिन्हा ने कहा कि बायो टॉयलेट का समझदारी से प्रयोग करना चाहिए। अगर कोई यात्री टॉयलेट में बोतल, कपड़ा या खाने-पीने की अन्य सामग्री फेंक देते हैं तो इससे टॉयलेट वर्किंग बंद कर देता है। सामान को फेंकने के लिए अलग से डस्टबीन रखी है।
दो ही जगह लगाए जा रहे 18 मोबाइल प्वाइंट
अभी तक रेलवे जनरल व स्लीपर कोच में दरवाजे के निकट मोबाइल चार्ज करने के लिए दो प्वाइंट उपलब्ध कराता था, मगर अब मरम्मत होकर नए बनाए जा रहे सभी कोचों में 18-18 मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट लगाए जा रहे हैं।
तुरंत नहीं भड़केगी आग
नए कोचों में अग्निरोधक सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे आग लगने की स्थिति में एकदम आग नहीं भड़क सकेगी। बर्थ धीरे-धीरे सुलगेगी। इससे ट्रेन को नजदीक के स्टेशन तक ले जाने में सहूलियत होगी। ट्रेन के स्टेशन पहुंचने पर आग बुझाने में आसानी हो जाएगी।
विज्ञापन
झांसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वच्छता अभियान का असर रेलवे स्टेशनों से लेकर ट्रेनों तक में दिखने लगा है। रेलवे कोच मरम्मत कारखाने में आम यात्रियों के कोचों में भी बायो टॉयलेट लगाए जा रहे हैं।
रेलवे वर्कशॉप के निकट महावीरन स्क्रैप यार्ड में बहुराष्ट्रीय कंपनी एलएनटी द्वारा एक सौ दस करोड़ की लागत से कोच मरम्मत कारखाने (सवारी डिब्बा) का निर्माण अक्तूबर 2014 में किया गया है। भले ही इस कारखाने में कर्मचारियों की कमी से बारह कोच ही अब तक तैयार होकर निकले हैं। मगर जो भी कोच अभी तक निकले हैं, उनमें अन्य वर्कशॉप की तुलना में कुछ हटकर काम किए गए और यह प्रयोग लगातार जारी है।
विज्ञापन
देश के अन्य वर्कशाप में जो कोच पीओएच (पीरियोडिक ओवर हालिंग) के लिए जाते हैं, उन्हें खराब पार्ट को उसी स्तर पर सुधार कर तैयार कर दिया जाता है, जबकि झांसी वर्कशाप में तैयार किए गए छह जनरल व छह स्लीपर कोचों में दो को छोड़कर अन्य सभी में बायो टॉयलेट लगाए गए हैं। उद्देश्य है कि स्टेशन व पटरियों से गंदगी को हटाया जा सके।
विज्ञापन
बायो टॉयलेट की यह है प्रक्रिया
बायो टॉयलेट में पॉट के नीचे एक टंकी बनी होती है, जिसमें बैक्टीरिया का घोल भरा रहता है। टंकी छह भागों में बंटी रहती है। यात्री जब इसे इस्तेमाल करते हैं तो मल हर हिस्से में बारी-बारी पहुंचता है। अंतिम हिस्से तक पहुंचते-पहुंचते मल साफ पानी में बदल जाता है। इस पानी को ट्रेन के अंतिम स्टेशन पर पहुंचने पर निकाल दिया जाता है।
बायो टॉयलेट का समझदारी से करें प्रयोग
मुख्य कारखाना प्रबंधक अतुल्य सिन्हा ने कहा कि बायो टॉयलेट का समझदारी से प्रयोग करना चाहिए। अगर कोई यात्री टॉयलेट में बोतल, कपड़ा या खाने-पीने की अन्य सामग्री फेंक देते हैं तो इससे टॉयलेट वर्किंग बंद कर देता है। सामान को फेंकने के लिए अलग से डस्टबीन रखी है।
दो ही जगह लगाए जा रहे 18 मोबाइल प्वाइंट
अभी तक रेलवे जनरल व स्लीपर कोच में दरवाजे के निकट मोबाइल चार्ज करने के लिए दो प्वाइंट उपलब्ध कराता था, मगर अब मरम्मत होकर नए बनाए जा रहे सभी कोचों में 18-18 मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट लगाए जा रहे हैं।
तुरंत नहीं भड़केगी आग
नए कोचों में अग्निरोधक सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे आग लगने की स्थिति में एकदम आग नहीं भड़क सकेगी। बर्थ धीरे-धीरे सुलगेगी। इससे ट्रेन को नजदीक के स्टेशन तक ले जाने में सहूलियत होगी। ट्रेन के स्टेशन पहुंचने पर आग बुझाने में आसानी हो जाएगी।