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महीने में डेढ़ लाख से अधिक नींद की गोली खा रहे झांसी वाले

Fri, 29 Nov 2019 01:48 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 29 Nov 2019 01:48 AM IST
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sleeping pills habit
महीने में डेढ़ लाख से अधिक नींद की गोली खा रहे झांसी वाले
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झांसी। जिले में नींद की गोलियों की खपत बहुत तेजी से बढ़ रही है। दवा कारोबार से जुड़े लोगों की मानें तो एक महीने में डेढ़ लाख से अधिक गोलियां महानगर में ही खप जाती हैं। अब इनका सेवन नींद के लिए डॉक्टरों की सलाह पर होता है या नशे के लिए यह पड़ताल का विषय है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि बहुत आवश्यक होने पर ही वे ऐसी दवा लिखते हैं। कुछ लोग तो इन गोलियों के इस कदर लती हो चुके हैं कि प्रतिदिन 20 से 25 नींद की गोलियां खा रहे हैं। उन्हें इस बात की भी चिंता नहीं है कि ये गोलियां स्वास्थ्य के लिए किस कदर हानिकारक हैं।
बिना बिल नहीं बेच सकते
शेड्यूल-एचवन (एनआर एक्ट) के तहत जनपद में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग से कुछ लोगों ने लाइसेंस ले रखा है। इसके तहत नींद न आने की समस्या समेत 46 प्रकार की दवाएं आती हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के सहायक आयुक्त अतुल उपाध्याय ने बताया कि बिना बिल के नींद की गोलियां नहीं बेच सकते हैं। मेडिकल स्टोर को मरीज को पूरा रिकॉर्ड रखना पड़ता है। यदि नियम का उल्लंघन किया गया तो सीधे नार्कोटिक एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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ये हैं कारण
- चिंता और मानसिक अवसाद
- शराब, सिगरेट आदि नशों की लत
- पारिवारिक विवाद या अनबन रहना
- दर्द या बीमारी
- चाय या कॉफी का अधिक सेवन
- अनुकूल वातावरण न मिलना
ये हो सकती समस्या
- गर्भस्थ शिशु को नुकसान : गर्भवती महिला को नींद की गोलियां नहीं लेनी चाहिए। इससे बेचैनी तो बढ़ती ही है, गर्भस्थ शिशु गंभीर विकृतियों का शिकार भी हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान नींद न आने की दिक्कत हो तो सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही कोई दवा लें।
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- हार्ट अटैक का खतरा : डॉक्टरों की मानें तो नींद की गोलियां ज्यादा खाने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों ने नींद की दवाओं में मौजूद तत्व जोपिडेम को दिल की बीमारियों की वजह बताया है। रोजमर्रा के रुटीन में फेरबदल कर नींद की गोलियों से बचा जा सकता है।
- कोमा में जाने का खतरा : जो लोग रोज एक गोली लेने के बजाए उससे ज्यादा गोलियां खाते हैं, उनके कोमा में जाने का खतरा होता है। रीढ़ की हड्डी और दमे की दिक्कत वाले मरीजों के लिए यह खतरा और ज्यादा होता है। इन गोलियों से ब्लड प्रेशर, सिरदर्द रोग हो जाते हैं।
- याददाश्त बिगड़ना : लंबे समय तक नींद की गोलियां लेने से याददाश्त कमजोर हो जाती है। नींद की गोलियां नर्वस सिस्टम को कमजोर कर देती हैं। इससे नर्वस सिस्टम संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। रक्त नलिकाओं में थक्के भी बन जाते हैं। हाई डोज में गोलियां लेने से भूख घट जाती है।
यहां कराएं इलाज
मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में काउंसलिंग सेंटर खुला हुआ है। हर बृहस्पतिवार को यहां पर मरीजों की काउंसलिंग की जाती है। यहां पर नशे, दवाइयों, सोशल मीडिया आदि की लती मरीजों की काउंसलिंग की जाती है। कई मरीजों को यहां इलाज कर ठीक किया जा चुका है।
ये बोले चिकित्सक
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नींद की गोलियों की लत बहुत खतरनाक है। मानसिक रोग विभाग के काउंसलिंग सेंटर में कई मरीज ऐसे आते हैं, जो दिन में 20-25 नींद की गोलियां खाते हैं। कुछ तो मरीज ऐसे भी आए जो रोज 70 से अधिक गोलियां रोज खाते थे। नींद की गोलियों का अधिक मात्रा में सेवन करने वाले लोग कंफ्यूज रहते हैं। साथ ही डिप्रेशन, एंजाइटी भी बढ़ जाती है। दिमाग के काम करने की क्षमता कम हो जाती है। बेचैनी, चक्कर आना, हाथ, पैरों में दर्द भी हो जाता है। - डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, मानसिक रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।

जिला अस्पताल के ओपीडी में प्रतिदिन 10-12 मरीज ऐसे आते हैं, जिन्हें नींद न आने की समस्या होती है। सीधे नींद की दवा नहीं लिखते हैं। ऐसे मरीजों को एंजाइटी की दवा दी जाती है। ताकि, उनकी नींद पूरी हो सके। बिना चिकित्सीय सलाह के नींद की दवा नहीं लेनी चाहिए। इससे हार्ट अटैक, कोमा में जाने का खतरा, याददाश्त बिगड़ने समेत कई मानसिक समस्याएं भी हो सकती हैं। साथ ही लिवर और किडनी पर भी असर पड़ सकता है। - डॉ. डीएस गुप्ता, वरिष्ठ फिजीशियन, जिला अस्पताल।
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