{"_id":"5a5a60634f1c1bad3f8b4b8f","slug":"six-employee-suspend","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीयू के छह कर्मचारियों को बर्खास्त करने की सिफारिश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीयू के छह कर्मचारियों को बर्खास्त करने की सिफारिश
Jhansi
Updated Sun, 14 Jan 2018 01:09 AM IST
विज्ञापन
Employee suspend
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में 18 मार्च 2017 को कुलपति के सामने हुई मारपीट की जांच रिपोर्ट खोली गई। जांच समिति ने स्ववित्त पोषित योजनांतर्गत कार्यरत छह कर्मचारियों को बर्खास्त करने की सिफारिश की है। अब बीयू प्रशासन आगे की कार्रवाई करेगा।
विश्वविद्यालय में 18 मार्च को दोपहर में कुछ कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते हुए काम बंद कर दिया था। अधिकतर कर्मचारी कांफ्रेंस हॉल में अधिकारियों से बातचीत करने के लिए इकट्ठा हुए। कुछ देर बाद कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे, तत्कालीन कुलसचिव वीएन सिंह समेत अन्य अधिकारी हॉल में पहुंचे। इसके बाद एक कर्मचारी नेता ने माइक से अपनी बात रखनी शुरू की। कर्मचारी नेता ने कहा कि उसके साथी को एक महिला कर्मचारी प्रताड़ित कर रही हैं। इस पर महिला कर्मचारी पुष्पा गौतम भड़क गईं। इस दौरान कुछ कर्मचारियों से पुष्पा की तू-तू, मैं-मैं शुरू हो गई। धीरे-धीरे विवाद बढ़ता गया और फिर एक कर्मचारी ने पुष्पा के साथ मारपीट शुरू कर दी। एक अन्य कर्मी ने उनके कंधे पर कुर्सी मार दी तो वे जमीन पर गिर पड़ीं। ये सब कुलपति, कुलसचिव स्तब्ध रह गए। बाद में दोनों पक्षों की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया। घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद भी हो गई। इस मामले में कर्मचारी नीरेंद्र यादव, मुकेश शर्मा, संतोष कुशवाहा, अशोक कुमार, अरविंद वर्मा को जेल भी जाना पड़ा। बाद में सभी को जमानत मिल गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच समिति गठित कर दी थी। शनिवार को कार्य परिषद की बैठक में जांच समिति की रिपोर्ट खोली गई।
पूर्व लोकायुक्त एचसी वर्मा, पूर्व डीआईजी जेके सिंह समेत तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच में नियमित कर्मचारी उमेश करौलिया समेत एसएफएस कर्मचारी नीरेंद्र यादव, मुकेश शर्मा, संतोष कुशवाहा, अशोक कुमार, अरविंद वर्मा को दोषी मानते हुए बर्खास्त करने की सिफारिश की है। वहीं, पुष्पा गौतम को चेतावनी जारी करते हुए बहाल करने की रिपोर्ट दी है। कुलसचिव सीपी तिवारी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अब नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों की मानें तो नियमित, एसएफएस नियमावली को ध्यान में रखकर बीयू प्रशासन फैसला लेगा।
विज्ञापन
लैब बनने से पूर्व जांचेंगे उपयोगिता
डीन एकेडमिक प्रो. एसपी सिंह ने अर्थ साइंस विभाग के पास ही भूजल पर शोध कार्य करने के लिए लैब बनाने के लिए प्रस्ताव दिया है। कार्य परिषद की बैठक में अधिकारियों ने लैब के महत्व एवं उपयोगिता की पड़ताल करने के बाद ही अग्रिम कार्रवाई करने की बात कही है।
विज्ञापन
विश्वविद्यालय में 18 मार्च को दोपहर में कुछ कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते हुए काम बंद कर दिया था। अधिकतर कर्मचारी कांफ्रेंस हॉल में अधिकारियों से बातचीत करने के लिए इकट्ठा हुए। कुछ देर बाद कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे, तत्कालीन कुलसचिव वीएन सिंह समेत अन्य अधिकारी हॉल में पहुंचे। इसके बाद एक कर्मचारी नेता ने माइक से अपनी बात रखनी शुरू की। कर्मचारी नेता ने कहा कि उसके साथी को एक महिला कर्मचारी प्रताड़ित कर रही हैं। इस पर महिला कर्मचारी पुष्पा गौतम भड़क गईं। इस दौरान कुछ कर्मचारियों से पुष्पा की तू-तू, मैं-मैं शुरू हो गई। धीरे-धीरे विवाद बढ़ता गया और फिर एक कर्मचारी ने पुष्पा के साथ मारपीट शुरू कर दी। एक अन्य कर्मी ने उनके कंधे पर कुर्सी मार दी तो वे जमीन पर गिर पड़ीं। ये सब कुलपति, कुलसचिव स्तब्ध रह गए। बाद में दोनों पक्षों की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया। घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद भी हो गई। इस मामले में कर्मचारी नीरेंद्र यादव, मुकेश शर्मा, संतोष कुशवाहा, अशोक कुमार, अरविंद वर्मा को जेल भी जाना पड़ा। बाद में सभी को जमानत मिल गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच समिति गठित कर दी थी। शनिवार को कार्य परिषद की बैठक में जांच समिति की रिपोर्ट खोली गई।
विज्ञापन
पूर्व लोकायुक्त एचसी वर्मा, पूर्व डीआईजी जेके सिंह समेत तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच में नियमित कर्मचारी उमेश करौलिया समेत एसएफएस कर्मचारी नीरेंद्र यादव, मुकेश शर्मा, संतोष कुशवाहा, अशोक कुमार, अरविंद वर्मा को दोषी मानते हुए बर्खास्त करने की सिफारिश की है। वहीं, पुष्पा गौतम को चेतावनी जारी करते हुए बहाल करने की रिपोर्ट दी है। कुलसचिव सीपी तिवारी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अब नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों की मानें तो नियमित, एसएफएस नियमावली को ध्यान में रखकर बीयू प्रशासन फैसला लेगा।
विज्ञापन
लैब बनने से पूर्व जांचेंगे उपयोगिता
डीन एकेडमिक प्रो. एसपी सिंह ने अर्थ साइंस विभाग के पास ही भूजल पर शोध कार्य करने के लिए लैब बनाने के लिए प्रस्ताव दिया है। कार्य परिषद की बैठक में अधिकारियों ने लैब के महत्व एवं उपयोगिता की पड़ताल करने के बाद ही अग्रिम कार्रवाई करने की बात कही है।