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Jhansi News: छह बिंदी की पढ़ाई, नेत्रहीनों के जीवन में रोशनी लाई
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झांसी। ब्रेल लिपि से पढ़ाई करके झांसी के कई दृष्टिबाधित युवा आज अपने परिवार पर बोझ नहीं हैं। बल्कि, सरकारी नौकरी पाकर खुद के पैरों पर खड़े हो चुके हैं। छह बिंदी की पढ़ाई करके उनके जीवन में रोशनी आ चुकी है। मौजूदा समय में कई युवा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी तो कई उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
दृष्टिबाधित बच्चों को ब्रेल लिपि से पढ़ाई कराने के लिए मौजूदा समय में बबीना, मोंठ और बंगरा के बेसिक स्कूल में एक-एक स्पेशल एजुकेटर तैनात हैं। जबकि, सेवानिवृत्त हो चुके सर्वेश सक्सेना भी निर्धन नेत्रहीन बच्चों को ब्रेन लिपि के जरिए अपने घर पर पढ़ाई कराते हैं। उन्होंने बताया कि ब्रेल लिपि से पढ़ने के बाद कई छात्र सरकारी स्कूल में बतौर शिक्षक तैनाती पा चुके हैं। एक छात्रा की तो सरकारी बैंक में भी नौकरी लग गई है। ब्रेल लिपि से पढ़ाई के दौरान छह बिंदी की जानकारी दी जाती है। इसे छूकर ही छात्र हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान की वर्णमाला बनाना सीखते हैं। बबीना के स्पेशल एजुकेटर हरगोविंद सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में 20 दृष्टिबाधित छात्र उनके स्कूल में पढ़ते हैं। छात्रों को ब्रेल टाइपराइटर का भी ज्ञान कराया जाता है। ताकि, वह टाइपिंग भी सीख सकें। इसमें भी छह की (बटन) होते हैं। इन्हीं बटनों के जरिए वह टाइप करते हैं। उनके पढ़ाए कई बच्चे सरकारी नौकरी पा चुके हैं। अभी कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं तो कई उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दृष्टिबाधित छात्रों को परीक्षा में लेखक और 30 मिनट अतिरिक्त मिलते हैं।
ब्रेल लिपि से पढ़ाई कर ये पा चुके नौकरी
- झांसी की सुरुचि झा मथुरा में सरकारी बैंक में मैनेजर हैं।
- मऊरानीपुर के मनीष एक नेत्रहीन विद्यालय में शिक्षक हैं।
- मऊरानीपुर के पृथ्वीपुर के अनिल कुमार सरकारी शिक्षक हैं।
- मऊरानीपुर के अनिल बिजरौनिया सरकारी संस्थान में उप पुस्तकालयाध्यक्ष हैं।
- जितेंद्र वर्मा ललितपुर में बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूल में तैनात हैं। उन्हें राज्य स्तर पर दिव्यांगता पुरस्कार भी मिल चुका है।
दृष्टि गई तो टूट गए थे अभय, अब खुद नेत्रहीनों को पढ़ा रहे
ललितपुर के बीआरसी जखौरा में तैनात अभय राज शर्मा को शुरुआत से ही कम दिखाई देता था। जब वह कक्षा आठ में थे तो उनकी आंख में गेंद लग गई। उन्होंने बताया कि इस घटना के छह महीने बाद उनकी आंख की रोशनी पूरी तरह चली गई। फिर वह मानसिक रूप से टूट गए। तभी उनके एक शिक्षक ने उन्हें ब्रेल लिपि से पढ़ाई करने की सलाह दी। फिर उन्होंने मध्य प्रदेश के रीवा के नेत्रहीन विद्यालय में प्रवेश ले लिया। चार महीने में वह ब्रेल लिपि सीख गए। 2010 में उन्हें मध्य प्रदेश के कटनी में संविदा शिक्षक की नौकरी मिल गई। मानदेय कम था तो उन्होंने नौकरी की तलाश जारी रखी। 2011 में उनकी तैनाती ललितपुर में बेसिक शिक्षा परिषद में बतौर शिक्षक के रूप में हो गई। अब वह स्पेशल एजुकेटर हैं और खुद दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं।
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दृष्टिबाधित बच्चों को ब्रेल लिपि से पढ़ाई कराने के लिए मौजूदा समय में बबीना, मोंठ और बंगरा के बेसिक स्कूल में एक-एक स्पेशल एजुकेटर तैनात हैं। जबकि, सेवानिवृत्त हो चुके सर्वेश सक्सेना भी निर्धन नेत्रहीन बच्चों को ब्रेन लिपि के जरिए अपने घर पर पढ़ाई कराते हैं। उन्होंने बताया कि ब्रेल लिपि से पढ़ने के बाद कई छात्र सरकारी स्कूल में बतौर शिक्षक तैनाती पा चुके हैं। एक छात्रा की तो सरकारी बैंक में भी नौकरी लग गई है। ब्रेल लिपि से पढ़ाई के दौरान छह बिंदी की जानकारी दी जाती है। इसे छूकर ही छात्र हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान की वर्णमाला बनाना सीखते हैं। बबीना के स्पेशल एजुकेटर हरगोविंद सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में 20 दृष्टिबाधित छात्र उनके स्कूल में पढ़ते हैं। छात्रों को ब्रेल टाइपराइटर का भी ज्ञान कराया जाता है। ताकि, वह टाइपिंग भी सीख सकें। इसमें भी छह की (बटन) होते हैं। इन्हीं बटनों के जरिए वह टाइप करते हैं। उनके पढ़ाए कई बच्चे सरकारी नौकरी पा चुके हैं। अभी कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं तो कई उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दृष्टिबाधित छात्रों को परीक्षा में लेखक और 30 मिनट अतिरिक्त मिलते हैं।
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ब्रेल लिपि से पढ़ाई कर ये पा चुके नौकरी
- झांसी की सुरुचि झा मथुरा में सरकारी बैंक में मैनेजर हैं।
- मऊरानीपुर के मनीष एक नेत्रहीन विद्यालय में शिक्षक हैं।
- मऊरानीपुर के पृथ्वीपुर के अनिल कुमार सरकारी शिक्षक हैं।
- मऊरानीपुर के अनिल बिजरौनिया सरकारी संस्थान में उप पुस्तकालयाध्यक्ष हैं।
- जितेंद्र वर्मा ललितपुर में बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूल में तैनात हैं। उन्हें राज्य स्तर पर दिव्यांगता पुरस्कार भी मिल चुका है।
दृष्टि गई तो टूट गए थे अभय, अब खुद नेत्रहीनों को पढ़ा रहे
ललितपुर के बीआरसी जखौरा में तैनात अभय राज शर्मा को शुरुआत से ही कम दिखाई देता था। जब वह कक्षा आठ में थे तो उनकी आंख में गेंद लग गई। उन्होंने बताया कि इस घटना के छह महीने बाद उनकी आंख की रोशनी पूरी तरह चली गई। फिर वह मानसिक रूप से टूट गए। तभी उनके एक शिक्षक ने उन्हें ब्रेल लिपि से पढ़ाई करने की सलाह दी। फिर उन्होंने मध्य प्रदेश के रीवा के नेत्रहीन विद्यालय में प्रवेश ले लिया। चार महीने में वह ब्रेल लिपि सीख गए। 2010 में उन्हें मध्य प्रदेश के कटनी में संविदा शिक्षक की नौकरी मिल गई। मानदेय कम था तो उन्होंने नौकरी की तलाश जारी रखी। 2011 में उनकी तैनाती ललितपुर में बेसिक शिक्षा परिषद में बतौर शिक्षक के रूप में हो गई। अब वह स्पेशल एजुकेटर हैं और खुद दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं।
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