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सीपरी ओवरब्रिज: मार्च में भी नहीं मिल सका लोहा
Fri, 29 Mar 2019 01:14 AM IST
देवेंद्र कुमार
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Fri, 29 Mar 2019 01:14 AM IST
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सीपरी ओवरब्रिज: मार्च में भी नहीं मिल सका लोहा
झांसी।
सीपरी बाजार ओवरब्रिज के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड मार्च में भी गार्डर बनाने के लिए लोहा नहीं दे सका। इससे ओवरब्रिज का निर्माण होने की अवधि बढ़ती ही जा रही है। इस साल भी काम पूरा होने की कम उम्मीद लग रही है। हालांकि, अभी निर्माण कंपनी ने चित्रा चौराहे की तरफ (जहां गार्डर रखे गए हैं) सरिया लगाने का काम पूरा कर लिया है। जल्द ही यहां पर सड़क डाली जाएगी।
सीपरी बाजार ओवर ब्रिज का काम गार्डर न आने के कारण पिछले आठ महीने से गति नहीं पकड़ पा रहा है। अभी पटरियों के ऊपर 50 मीटर के छह और सीपरी बाजार टंकी की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखने का काम बाकी रह गया है। यहां के लिए उत्तराखंड के काशीपुर से गार्डर बनकर आने हैं। मगर स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड से गार्डर बनाने के लिए लोहा नहीं मिल पा रहा है। उम्मीद थी कि मार्च में लोहा मिलने पर तीन महीने में गार्डर मिल जाएंगे, लेकिन यह महीना भी बीत गया। गार्डर आने के बाद कम से कम छह महीने निर्माण कार्य पूरा होने में लग जाएंगे। इससे इस साल भी ब्रिज का निर्माण पूरा होने की कम उम्मीद लग रही है। रेलवे के निर्माण शाखा के अधिकारी भी अब इस मामले में कुछ भी कहने से बचने लगे हैं। प्रदेश सरकार ने 2012 में ओवर ब्रिज निर्माण को स्वीकृति दी थी। राज्य सेतु निगम अपने हिस्से का काम 2016 में पूरा कर चुका है। रेलवे अपने हिस्से का काम पिछले ढाई साल से कर रहा है।
यह काम बाकी है
सीपरी बाजार ओवरब्रिज निर्माण में रेलवे के हिस्से के चारों पिलर बनाने और उनके ऊपर बीम डालने का काम पूरा हो गया है। चित्रा चौराहे की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखे जा चुके हैं। इसमें एक गार्डर का वजन 75 टन है जो उत्तराखंड में बनकर आए हैं। अब पटरियों के ऊपर 50 मीटर के छह और सीपरी बाजार टंकी की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखने का काम बाकी रह गया है। गार्डर आने के बाद पहले सीपरी बाजार टंकी की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखने का काम होगा। इसके बाद एक साथ 50 और 36 मीटरों के गार्डर के बीच शटरिंग लगाने, सरिया बांधने और सड़क बनाने का काम होगा।
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झांसी।
सीपरी बाजार ओवरब्रिज के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड मार्च में भी गार्डर बनाने के लिए लोहा नहीं दे सका। इससे ओवरब्रिज का निर्माण होने की अवधि बढ़ती ही जा रही है। इस साल भी काम पूरा होने की कम उम्मीद लग रही है। हालांकि, अभी निर्माण कंपनी ने चित्रा चौराहे की तरफ (जहां गार्डर रखे गए हैं) सरिया लगाने का काम पूरा कर लिया है। जल्द ही यहां पर सड़क डाली जाएगी।
सीपरी बाजार ओवर ब्रिज का काम गार्डर न आने के कारण पिछले आठ महीने से गति नहीं पकड़ पा रहा है। अभी पटरियों के ऊपर 50 मीटर के छह और सीपरी बाजार टंकी की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखने का काम बाकी रह गया है। यहां के लिए उत्तराखंड के काशीपुर से गार्डर बनकर आने हैं। मगर स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड से गार्डर बनाने के लिए लोहा नहीं मिल पा रहा है। उम्मीद थी कि मार्च में लोहा मिलने पर तीन महीने में गार्डर मिल जाएंगे, लेकिन यह महीना भी बीत गया। गार्डर आने के बाद कम से कम छह महीने निर्माण कार्य पूरा होने में लग जाएंगे। इससे इस साल भी ब्रिज का निर्माण पूरा होने की कम उम्मीद लग रही है। रेलवे के निर्माण शाखा के अधिकारी भी अब इस मामले में कुछ भी कहने से बचने लगे हैं। प्रदेश सरकार ने 2012 में ओवर ब्रिज निर्माण को स्वीकृति दी थी। राज्य सेतु निगम अपने हिस्से का काम 2016 में पूरा कर चुका है। रेलवे अपने हिस्से का काम पिछले ढाई साल से कर रहा है।
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यह काम बाकी है
सीपरी बाजार ओवरब्रिज निर्माण में रेलवे के हिस्से के चारों पिलर बनाने और उनके ऊपर बीम डालने का काम पूरा हो गया है। चित्रा चौराहे की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखे जा चुके हैं। इसमें एक गार्डर का वजन 75 टन है जो उत्तराखंड में बनकर आए हैं। अब पटरियों के ऊपर 50 मीटर के छह और सीपरी बाजार टंकी की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखने का काम बाकी रह गया है। गार्डर आने के बाद पहले सीपरी बाजार टंकी की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखने का काम होगा। इसके बाद एक साथ 50 और 36 मीटरों के गार्डर के बीच शटरिंग लगाने, सरिया बांधने और सड़क बनाने का काम होगा।
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