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बजट ने रोकी सिंचाई, धरातल पर नहीं उतरा इस्राइल मॉडल
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झांसी। बुंदेलखंड में पानी की कमी को देखते हुए सिंचाई के परंपरागत तरीके की जगह इजराइल मॉडल को अमल में आने की तैयारी थी। इसके लिए गुरसरांय ब्लॉक के दो दर्जन से अधिक गांव चिह्नित कर यहां स्प्रिंकलर सेट लगाए जाने थे लेकिन, करीब एक साल से बजट जारी नहीं होने से यह योजना पिछड़ती जा रही है। योजना के जरिए 1,950 हेक्टेयर असिंचित क्षेत्र को सिंचित किया जाना था।
सिंचाई के लिए नहर परंपरागत तरीका है, लेकिन इसका चालीस फीसदी पानी इस्तेमाल नहीं हो पाता। बुंदेलखंड में पानी की कमी को देखते हुए इजराइल मॉडल अपनाने की कवायद शुरू हुई। इसके लिए सिंचाई विभाग ने पिछले वर्ष बड़ा प्रोजेक्ट तैयार किया। इसके तहत ब्लॉकवार खेतों तक सीधे पाइप से पानी पहुंचाया जाना था। करीब 250 करोड़ रुपये की इस योजना में किसानों को स्प्रिंकलर सेट दिए जाने थे और सिंचाई का इलेक्ट्रानिक सिस्टम तैयार किया जाना था। इसमें पानी शुरू होने की सूचना देने के लिए जीपीएस आधारित रेडियो सिग्नल टॉवर लगाए जाने थे।
पानी की व्यवस्था के लिए लहचूरा बांध के डाउन स्ट्रीम में 16.20 किलोमीटर दूर कुल 9.200 एमसीएम पानी स्टोर किया जाना था। इससे रबी में 1,950 हेक्टेयर एवं खरीफ में 1,650 हेक्टेयर जमीन सिंचित की जानी थी। गुरसरांय ब्लॉक के लघु एवं सीमांत 1,750 किसान परिवारों समेत कुल 7,762 किसानों को फायदा मिलना था। पायलट प्रोजेक्ट में ग्राम खड़ौरा, खेेरी, मधुनिया, जलालपुरा, मारकुआं, गुढ़ा, सोनकपुरा, बरौठा, इमलौटा, शाहपुरा गांव को चयनित कर लिया गया। प्रोजेक्ट से किसानों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन एक साल बाद भी इसे अमली जामा नहीं पहनाया जा सका।
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अधिशासी अभियंता एसके सचान ने बताया कि प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका। बजट मिलने पर ही इसे आगे बढ़ाया जा सकेगा।
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सिंचाई के लिए नहर परंपरागत तरीका है, लेकिन इसका चालीस फीसदी पानी इस्तेमाल नहीं हो पाता। बुंदेलखंड में पानी की कमी को देखते हुए इजराइल मॉडल अपनाने की कवायद शुरू हुई। इसके लिए सिंचाई विभाग ने पिछले वर्ष बड़ा प्रोजेक्ट तैयार किया। इसके तहत ब्लॉकवार खेतों तक सीधे पाइप से पानी पहुंचाया जाना था। करीब 250 करोड़ रुपये की इस योजना में किसानों को स्प्रिंकलर सेट दिए जाने थे और सिंचाई का इलेक्ट्रानिक सिस्टम तैयार किया जाना था। इसमें पानी शुरू होने की सूचना देने के लिए जीपीएस आधारित रेडियो सिग्नल टॉवर लगाए जाने थे।
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पानी की व्यवस्था के लिए लहचूरा बांध के डाउन स्ट्रीम में 16.20 किलोमीटर दूर कुल 9.200 एमसीएम पानी स्टोर किया जाना था। इससे रबी में 1,950 हेक्टेयर एवं खरीफ में 1,650 हेक्टेयर जमीन सिंचित की जानी थी। गुरसरांय ब्लॉक के लघु एवं सीमांत 1,750 किसान परिवारों समेत कुल 7,762 किसानों को फायदा मिलना था। पायलट प्रोजेक्ट में ग्राम खड़ौरा, खेेरी, मधुनिया, जलालपुरा, मारकुआं, गुढ़ा, सोनकपुरा, बरौठा, इमलौटा, शाहपुरा गांव को चयनित कर लिया गया। प्रोजेक्ट से किसानों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन एक साल बाद भी इसे अमली जामा नहीं पहनाया जा सका।
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अधिशासी अभियंता एसके सचान ने बताया कि प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका। बजट मिलने पर ही इसे आगे बढ़ाया जा सकेगा।