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ट्रेनों के थमने के बाद झांसी स्टेशन पर पसरा सन्नाटा
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रेल सेवाएं बंद होने से झांसी रेलवे स्टेशन पर पसरा सन्नाटा।
झांसी। रेलवे स्टेशन पर सोमवार की दोपहर 12.20 बजे प्लेटफार्म चार पर 12651 तमिलनाडु संपर्क क्रांति आखिरी गाड़ी आई। इस ट्रेन के दिल्ली की तरफ रवाना होने के बाद सवारी गाड़ियों का संचालन 31 मार्च तक के लिए पूरी तरह बंद हो गया। आखिरी ट्रेन से 68 मुसाफिर उतरे, जिनका मुख्य गेट पर थर्मल स्कैनर से परीक्षण किया गया। साथ ही 12.40 बजे स्टेशन को मुसाफिरों के लिए पूरी तरह लॉक कर दिया गया।
कोरोना वायरस के चलते रेलवे ने पैसेंजर, मेल, एक्सप्रेस, इंटरसिटी व प्रीमियम गाड़ियों का संचालन 31 मार्च तक के लिए निरस्त कर दिया है। सोमवार की दोपहर 12.20 बजे चेन्नई से निजामुद्दीन जाने वाली 12651 तमिलनाडु संपर्क क्रांति प्लेटफार्म चार पर आखिरी गाड़ी आई। इस ट्रेन से 68 यात्री उतरे, जिनमें अधिकांश को कानपुर और लखनऊ की तरफ जाना था। मगर, कानपुर रूट पर की तरफ कोई ट्रेन न होने के कारण उक्त यात्रियों को रोडवेज बस से अपना सफर पूरा करना पड़ा। परिवहन विभाग ने यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशन पर ही बसों का इंतजाम किया था।
वहीं, उक्त यात्रियों के स्टेशन से बाहर निकलते ही सभी यात्री सुविधाओं को लॉक कर दिया गया। पार्सल, बुकिंग व मुख्य द्वार बंद कर दिया गया। स्टेशन के अंदर बुकिंग काउंटर, प्लेटफार्म, भोजनालय, स्टॉल बंद हो गए। स्टेशन के अंदर कोई व्यक्ति न जा सके, इसके लिए आरपीएफ ने सुरक्षा व्यवस्था अपने हाथों में ले ली। स्टेशन पर सिर्फ परिचालन के कर्मचारी काम करते रहे। साथ ही कर्मचारियों को निर्देशित कर दिया गया कि वे घर से ऑफिस का काम करते रहे। अपने मोबाइल ऑन रखे, उनको ड्यूटी अवधि में कभी भी बुलाया जा सकता है।
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झांसी रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन औसत 120 सवारी ट्रेनें गुजरतीं हैं। वैसे सप्ताह में दो या तीन चलने वाली अथवा साप्ताहिक गाड़ियों को मिला लिया जाए तो 200 से अधिक गाड़ियों का संचालन होता है।
फोटो (पति- पत्नी की फोटो)
मैं रामेश्वरम में पत्नी आरती के साथ पिछले पांच साल से मंदिर के पास दुकान चलाता हूं। पांच अप्रैल तक के लिए मंदिर बंद कर दिया गया है। इस कारण मैं अपने घर गोरखपुर वापस जा रहा हूं। मेरे बच्चे गोरखपुर में ही रहते हैं। छुट्टी थी, इसलिए घर जा रहा हूं। मगर झांसी से गोरखपुर जाने के लिए ट्रेन नहीं मिल रही है। मजबूरन अब बस से जाना होेगा।
वीरेंद्र कुमार, गोरखपुर।
वैसे में नागालैंड का रहने वाला हूं। लखनऊ में नौकरी करता हूं। बच्चे चेन्नई के हॉस्टल में पढ़ते हैं। कोरोना वायरस के चलते बच्चों को हॉस्टल से वापस ले आया। तमिलनाडु संपर्क क्रांति से आया हूं, लेकिन यहां से आगे के लिए ट्रेन नहीं मिल रही है। अब बस से बच्चों को लेकर जा रहा हूं।
मैथ्यू, लखनऊ।
मैं परिवार व अन्य रिश्तेदारों के साथ 10 मार्च को मदुरई घूमने गया था। तमिलनाडु संपर्क क्रांति से झांसी लौटा हूं। अब यहां से कानपुर जाने के लिए ट्रेन नहीं मिल रही है। प्राइवेट गाड़ी वाले महंगा किराया मांग रहे हैं। रोडवेज बस का इंतजार कर रहे हैं। अब हम उसी में बैठकर जाएंगे।
प्रशांत, कानपुर।
मैं पिछले दिनों पारीछा थर्मल कॉलोनी में रहने वाली अपनी बहन के यहां आया था। आज अलीगढ़ वापस जाने के लिए झांसी आया, लेकिन यहां पता लगा कि कोई ट्रेन नहीं चल रही है। मजबूरन अब दोबारा बहन के घर वापस जा रहा हूं।
भुवनेश्वर शर्मा, अलीगढ़।
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कोरोना वायरस के चलते रेलवे ने पैसेंजर, मेल, एक्सप्रेस, इंटरसिटी व प्रीमियम गाड़ियों का संचालन 31 मार्च तक के लिए निरस्त कर दिया है। सोमवार की दोपहर 12.20 बजे चेन्नई से निजामुद्दीन जाने वाली 12651 तमिलनाडु संपर्क क्रांति प्लेटफार्म चार पर आखिरी गाड़ी आई। इस ट्रेन से 68 यात्री उतरे, जिनमें अधिकांश को कानपुर और लखनऊ की तरफ जाना था। मगर, कानपुर रूट पर की तरफ कोई ट्रेन न होने के कारण उक्त यात्रियों को रोडवेज बस से अपना सफर पूरा करना पड़ा। परिवहन विभाग ने यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशन पर ही बसों का इंतजाम किया था।
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वहीं, उक्त यात्रियों के स्टेशन से बाहर निकलते ही सभी यात्री सुविधाओं को लॉक कर दिया गया। पार्सल, बुकिंग व मुख्य द्वार बंद कर दिया गया। स्टेशन के अंदर बुकिंग काउंटर, प्लेटफार्म, भोजनालय, स्टॉल बंद हो गए। स्टेशन के अंदर कोई व्यक्ति न जा सके, इसके लिए आरपीएफ ने सुरक्षा व्यवस्था अपने हाथों में ले ली। स्टेशन पर सिर्फ परिचालन के कर्मचारी काम करते रहे। साथ ही कर्मचारियों को निर्देशित कर दिया गया कि वे घर से ऑफिस का काम करते रहे। अपने मोबाइल ऑन रखे, उनको ड्यूटी अवधि में कभी भी बुलाया जा सकता है।
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झांसी रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन औसत 120 सवारी ट्रेनें गुजरतीं हैं। वैसे सप्ताह में दो या तीन चलने वाली अथवा साप्ताहिक गाड़ियों को मिला लिया जाए तो 200 से अधिक गाड़ियों का संचालन होता है।
फोटो (पति- पत्नी की फोटो)
मैं रामेश्वरम में पत्नी आरती के साथ पिछले पांच साल से मंदिर के पास दुकान चलाता हूं। पांच अप्रैल तक के लिए मंदिर बंद कर दिया गया है। इस कारण मैं अपने घर गोरखपुर वापस जा रहा हूं। मेरे बच्चे गोरखपुर में ही रहते हैं। छुट्टी थी, इसलिए घर जा रहा हूं। मगर झांसी से गोरखपुर जाने के लिए ट्रेन नहीं मिल रही है। मजबूरन अब बस से जाना होेगा।
वीरेंद्र कुमार, गोरखपुर।
वैसे में नागालैंड का रहने वाला हूं। लखनऊ में नौकरी करता हूं। बच्चे चेन्नई के हॉस्टल में पढ़ते हैं। कोरोना वायरस के चलते बच्चों को हॉस्टल से वापस ले आया। तमिलनाडु संपर्क क्रांति से आया हूं, लेकिन यहां से आगे के लिए ट्रेन नहीं मिल रही है। अब बस से बच्चों को लेकर जा रहा हूं।
मैथ्यू, लखनऊ।
मैं परिवार व अन्य रिश्तेदारों के साथ 10 मार्च को मदुरई घूमने गया था। तमिलनाडु संपर्क क्रांति से झांसी लौटा हूं। अब यहां से कानपुर जाने के लिए ट्रेन नहीं मिल रही है। प्राइवेट गाड़ी वाले महंगा किराया मांग रहे हैं। रोडवेज बस का इंतजार कर रहे हैं। अब हम उसी में बैठकर जाएंगे।
प्रशांत, कानपुर।
मैं पिछले दिनों पारीछा थर्मल कॉलोनी में रहने वाली अपनी बहन के यहां आया था। आज अलीगढ़ वापस जाने के लिए झांसी आया, लेकिन यहां पता लगा कि कोई ट्रेन नहीं चल रही है। मजबूरन अब दोबारा बहन के घर वापस जा रहा हूं।
भुवनेश्वर शर्मा, अलीगढ़।