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Jhansi News: भक्ति, ज्ञान व वैराग्य का त्रिवेणी है श्रीमद्भागवत

Mon, 12 Jan 2026 12:51 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jan 2026 12:51 AM IST
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Shrimad Bhagwat is the confluence of devotion, knowledge and renunciation.
झांसी। अयोध्यापुरी कॉलोनी में सुंदरकांड महिला सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास आचार्य हरिओम थापक ने दूसरे दिन रविवार को कथा आगे बढ़ाते हुए परीक्षित (अर्जुन के पौत्र) प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि ऋषि के शाप के कारण तक्षक नाग के काटने से सात दिन में उनकी मृत्यु तय थी। ऐसे में उन्होंने सर्व प्रथम सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा सुनकर मोक्ष प्राप्त किया। इससे ही कलियुग की शुरुआत मानी जाती है। यह कथा ज्ञान, भक्ति और शक्ति के विवेकपूर्ण उपयोग का संदेश देती है। भागवत कथा के श्रवण से प्राणी का कल्याण हो जाता है। भागवत से भक्ति और भक्ति से शक्ति प्राप्त होती है। जन्म जन्मांतर के सारे विकार नष्ट होते हैं। साध्वी आस्था व्यास ने पूजन-अर्चन के साथ आरती की।
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इस अवसर पर मुख्य परीक्षित शशि सतीश कुमार गुप्ता, सुनीता शर्मा, शांति थापक, सुधा खरे, निशा चतुर्वेदी, गणेश खरे, उमा पांडेय, डा. प्रदीप पांडेय, अनुपमा पांडेय पुरुषोत्तम गुप्ता, आनंद पांडेय आदि मौजूद रहे। संचालन सियाराम शरण चतुर्वेदी एवं आभार आलोक चतुर्वेदी ने व्यक्त किया।
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