फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Shop set up on the footpath... treating patients with churan and chutney, putting the lives of patients in danger

Jhansi News: फुटपाथ पर लगाई दुकान... चूरन-चटनी से कर रहे इलाज, खतरे में डाल रहे मरीजों की जान

Fri, 19 Apr 2024 04:46 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 19 Apr 2024 04:46 AM IST
विज्ञापन
Shop set up on the footpath... treating patients with churan and chutney, putting the lives of patients in danger
हेडिंग ये भी - बड़े से बड़ा मर्ज कर देंगे ठीक... इलाज के नाम पर ठग रहे फुटपाथ वाले नीम-हकीम
विज्ञापन

अमर उजाला पड़ताल
...........................
बीमारी ठीक करने के लिए कोई दुकानदार तीन हफ्ते तो कोई एक महीने के कोर्स का पैकेज बताता
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। चूरन-चटनी के बड़े बड़े पैकेट इनके पास मिलेंगे। कागज की थैलियों में लकड़ी के टुकड़े भी रखे होते हैं जिन्हें यह लोग पहाड़ों पर जाकर इकट्ठा की गईं जड़ी बूटियां बताकर इनके जरिए असाध्य रोगों के इलाज का दावा करते हैं। न इनके पास कोई डिग्री होती है और न ही कोई डिप्लोमा। यह अपनी बातों में फंसाकर मरीजों को बीमारी के शर्तिया ठीक होने का दिलासा देकर जमकर लूट रहे हैं। कोई चूरन से कैंसर ठीक होने तो कोई एक शीशी दवा से किडनी की बीमारी चुटकियों में दूर करने की बात कहता है। बीमारी ठीक करने के लिए कोई तीन हफ्ते तो कोई एक महीने का पैकेज बताता है। बीमारी से निजात पाने की आस में तमाम लोग इनके पास पहुंचते भी हैं, लेकिन जब तक उनको असलियत पता लगती है, तब तक शायद देर हो चुकी होती है। मरीज हालत बिगड़ने पर इनके पास पहुंचते हैं तो ये गायब हो जाते हैं। जगह-जगह फुटपाथ पर लगी इन दुकानों के सामने से रोज स्वास्थ्य विभाग और जिले के बड़े अधिकारियों की गाड़ियां गुजरती हैं, मगर किसी को यह दुकानें नजर नहीं आतीं। बृहस्पतिवार को अमर उजाला टीम ने जब पड़ताल की ताे असलियत सामने आई। पढि़ए रिपोर्ट...।
.........
तस्वीर-एक
चूरन से डायबिटीज के इलाज का दावा
मेडिकल कॉलेज के गेट नंबर तीन के आगे फुटपाथ पर एक फड़ लगी हुई थी। हमने यहां पहुंचकर आवाज लगाई तो पास ही बनी झोपड़ी से एक युवक निकलकर आया। उसने बताया कि पिता जी दुकान पर बैठते हैं, मगर वो अभी नहीं है। युवक ने हमसे समस्या पूछी फिर मोबाइल निकालकर अपने पिता से बात कराई। हमने बताया कि एक रिश्तेदार को पेट में गांठ है और पस भी पड़ गया है। क्या ठीक कर पाओगे। फोन पर बात करने वाले व्यक्ति ने कहा कि सब ठीक हो जाएगा। मरीज को लेकर आओ। खर्च पूछा गया तो बोला कि साढ़े तीन हजार रुपये लगेंगे और फोन काट दिया। इसके बाद हमने दुकान पर मौजूद युवक से पूछा कि और कौन-कौन सी बीमारियां ठीक कर देते हो। उसने कहा कि डायबिटीज तो जड़ से समाप्त कर देते हैं। 22 दिन का कोर्स होता है और 1680 रुपये खर्च आता है। मोतियाबिंद ठीक करने में 2200 रुपये खर्च आता है। एक ही बार चूरन खाने से पेट में गैस बनना बंद हो जाती है। लंबे समय से बनी खांसी, नजला समेत सभी रोग ठीक हो जाते हैं। युवक ने बताया कि उत्तराखंड से जड़ी-बूटी लाकर उनका चूर्ण बनाकर देते हैं, जो कि बहुत कारगर होती है। मरीज को लेकर आइए और इलाज शुरू कराइए।
विज्ञापन

----------


तस्वीर-दो
एक महीने में कैंसर ठीक कर दूंगा...
मेडिकल कॉलेज के बाद हम रिसाला चुंगी की ओर बढ़े। यहां फुटपाथ पर एक और दुकान लगी मिली। दुकान के बाहर दो-तीन लोग बैठे थे। हमें देखकर दुकानदार ने पूछा कि क्या समस्या है। जब हमने बताया कि एक परिचित की किडनी और लिवर दोनों खराब हो गए हैं। इन जड़ी बूटियों से इलाज कराने पर ठीक हो जाएगा तो दुकानदार बोला कि हम तो कैंसर तक ठीक कर देते हैं। बस बीमारी की अंतिम स्टेज न हो। जब हमने खर्च पूछा तो बोला कि मरीज लेकर आओ। पहले नब्ज देखेंगे। फिर बताएंगे कि समस्या कितनी गंभीर है। ये मानकर चलो कि एक महीने कोर्स चलेगा तो लगभग छह हजार रुपये खर्च आएगा। स्वर्ण भस्म से इलाज करते हैं। इस भस्म को बाहर से मंगवाना पड़ता है। दुकानदार ने कहा कि हमारे पास शर्तिया इलाज होता है। मरीज जब दवा खाना शुरू करेगा तो दस दिन में ही परिणाम दिखाई देने लगते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

-------------
डायलिसिस कराने के लिए बोलते तो कई मरीज जड़ी-बूटी खाने लगते

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. एनएस सेंगर का कहना है कि किडनी खराब हो जाने पर जब मरीज को डायलिसिस कराने की सलाह दी जाती है तो कई रोगी जड़ी-बूटी खाने लगते हैं। जब बीमारी बढ़ जाती है तो दोबारा इलाज कराने आते हैं। उन्होंने कहा कि जो दुकानदार फुटपाथ पर दुकान लगाकर जड़ी-बूटी से इलाज का दावा करते हैं, वो किसी लैब से प्रमाणित नहीं होती है। ऐसे में इनका सेवन करने से दुष्प्रभाव होता है।
--------
छाले का इलाज करते रहते, कैंसर की बढ़ जाती स्टेज
मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. सचिन माहुर ने बताया कि अस्पताल में कैंसर के कई ऐसे मरीज आते हैं, जो जागरूकता के अभाव में पहले देसी दवाई या फिर झाड़-फूंक से बीमारी ठीक कराते रहते हैं। जड़ी-बूटी की दुकान लगाने वाले कई-कई महीने किसी मरीज के मुंह के छाले का इलाज करते रहते हैं। अस्पताल आने पर जांच कराने पर वो कैंसर निकलता है। बीमारी की स्टेज भी बढ़ जाती है।

-----------

वर्जन..
बिना चिकित्सीय सलाह के मरीजों को दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए। फुटपाथ पर जड़ी-बूटी की दुकानें लगाकर मर्ज को ठीक करने का दावा करने वाले दुकानदार वैध नहीं हैं। इसलिए मरीज विशेषज्ञ को ही दिखाएं। - डॉ. जगजीवन राम, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed