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शिवालय सजे, जलाभिषेक को उमडे़गे भोले के भक्त
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 25 Jul 2016 12:51 AM IST
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shivaratry, jhansi hindi news
- फोटो : demo
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झांसी। पवित्र सावन माह के पहले सोमवार को लेकर महानगर के शिवालयों में तैयारियां पूरी हो चुकी है। सुबह तड़के से ही भगवान शिव का जलाभिषेक करने और रुद्रि पाठ के लिए श्रद्धालु उमड़ने लगेंगे। मंगला व महाआरती में ऊं जय शिव ओमकारा के स्वर गूंजेंगे। इस दौरान क ई शिवालयों, मंदिरों व स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे और हर हर महादेव के जयघोष गूंजेंगे।
शिव को समर्पित सावन महीने का प्रत्येक सोमवार भक्तों के लिए अत्यधिक पवित्र और महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि सोमवार को अभिषेक, पूजन करने से भक्त पर शिव की विशेष कृपा हो जाती है। इस कृपा को पाने के लिए महानगर के सभी शिवालयों में भक्त ब्रह्म मुहूर्त से दिनभर तक जलाभिषेक करने के लिए उमडे़ंगे।
महानगर के प्राचीन शिवालयों पानी वाली धर्मशाला स्थित हजारिया महादेव मंदिर, सुंदर पुरी का बाग बाहर बड़ागांव गेट स्थित राजा बाबा, महाकालेश्वर, बाहर बड़ागांव गेट स्थित भूतनाथ, ग्वालियर मार्ग स्थित श्री सिद्धेश्वर पीठ, गोविंद चौराहा स्थित मढ़िया महादेव मंदिर सहित कई शिव मंदिरों में भोले बाबा की पूजा व आराधना के लिए श्रद्धालु उमड़ेंगे। श्रद्धालुओं की भीड़ क्रम से पूजा करे, इसके लिए भी व्यवस्था की गई है।
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बेलपत्र, अकउवा के फूल व धतूरा अवश्य चढ़ाएं
शिव के जलाभिषेक व पूजन में बेलपत्र, चावल, अकउवा के फू ल, धतूरा चढ़ाए, इसके बाद इत्र, चंदन, धूप आदि भी अर्पित करे। नारद पुराण के अनुसार सोमवार व्रत में श्रद्धालु सुबह शिव को तो जल चढ़ाए, बल्कि मां गौरी की भी विधि विधान से पूजा करे। धर्मग्रंथों के अनुसार सोमवार के व्रत तीन प्रकार के होते है, जो सौम्य प्रदोष व्रत, पति सोमवार व्रत और सोलह सोमवार व्रत है।
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शिवालयों में मंगला आरती व महा आरती का समय
मंदिर मंगला आरती महा आरती
पानी वाली धर्मशाला सुबह 5 बजे रात 8 बजे
महाकालेश्वर राजा बाबा मंदिर सुबह 4 बजे रात 8 बजे
मढ़िया महादेव मंदिर सुबह 5 बजे रात 7:30 बजे
सिद्धेश्वर मंदिर सुबह 4 बजे रात 7:30 बजे
बाक्स
समय के साथ श्रृंगार भी बदला
भोले बाबा की आराधना में अभिषेक के अलावा उनका श्रृंगार भी महत्वपूर्ण है, जो उनके अद्भूत व शांत स्वरूप के दर्शन कराते है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव का श्रृंगार रुद्राक्ष, बेलपत्र, अकउवा के फूल, धतूरा के फल से होता है, लेकिन वर्तमान में कई भक्त देशी विदेशी मनमोहक सुगंधित फूलों से श्रृंगार कराते है। छोटे से लेकर बडे़ मुकुटों में बेला, चमेली, गुड़हल, जंगली फूलों के अलावा यूरोपी फूल लगवाना भक्त पसंद करते है। इसके अलावा नगों और सुनहरी जरी का भी मुकुटों में प्रयोग किया जाता है। कृष्ण चंद्र शर्मा नारद ने बताया कि कई श्रद्धालु उज्जैन के महाकालेश्वर की श्रृंगार की तर्ज पर शिवलिंग का श्रृंगार कराते है।
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सुझाव
- लाइन में लगकर भगवान शिव के दर्शन करे।
- कोशिश करें कि भीड़ में एक वर्ष से छोटे बच्चे को लेकर मंदिर न जाए।
- किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु दिखने पर पुलिस को सूचित करे।
- घर के जरूरी सदस्यों का मोबाइल नंबर अवश्य रखे।
- कीमती जेवर दर्शन के समय पहनकर न जाए।
- दर्शन दौरान किसी भी प्रकार के विवाद से बचे।
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शिव को समर्पित सावन महीने का प्रत्येक सोमवार भक्तों के लिए अत्यधिक पवित्र और महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि सोमवार को अभिषेक, पूजन करने से भक्त पर शिव की विशेष कृपा हो जाती है। इस कृपा को पाने के लिए महानगर के सभी शिवालयों में भक्त ब्रह्म मुहूर्त से दिनभर तक जलाभिषेक करने के लिए उमडे़ंगे।
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महानगर के प्राचीन शिवालयों पानी वाली धर्मशाला स्थित हजारिया महादेव मंदिर, सुंदर पुरी का बाग बाहर बड़ागांव गेट स्थित राजा बाबा, महाकालेश्वर, बाहर बड़ागांव गेट स्थित भूतनाथ, ग्वालियर मार्ग स्थित श्री सिद्धेश्वर पीठ, गोविंद चौराहा स्थित मढ़िया महादेव मंदिर सहित कई शिव मंदिरों में भोले बाबा की पूजा व आराधना के लिए श्रद्धालु उमड़ेंगे। श्रद्धालुओं की भीड़ क्रम से पूजा करे, इसके लिए भी व्यवस्था की गई है।
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बेलपत्र, अकउवा के फूल व धतूरा अवश्य चढ़ाएं
शिव के जलाभिषेक व पूजन में बेलपत्र, चावल, अकउवा के फू ल, धतूरा चढ़ाए, इसके बाद इत्र, चंदन, धूप आदि भी अर्पित करे। नारद पुराण के अनुसार सोमवार व्रत में श्रद्धालु सुबह शिव को तो जल चढ़ाए, बल्कि मां गौरी की भी विधि विधान से पूजा करे। धर्मग्रंथों के अनुसार सोमवार के व्रत तीन प्रकार के होते है, जो सौम्य प्रदोष व्रत, पति सोमवार व्रत और सोलह सोमवार व्रत है।
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शिवालयों में मंगला आरती व महा आरती का समय
मंदिर मंगला आरती महा आरती
पानी वाली धर्मशाला सुबह 5 बजे रात 8 बजे
महाकालेश्वर राजा बाबा मंदिर सुबह 4 बजे रात 8 बजे
मढ़िया महादेव मंदिर सुबह 5 बजे रात 7:30 बजे
सिद्धेश्वर मंदिर सुबह 4 बजे रात 7:30 बजे
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समय के साथ श्रृंगार भी बदला
भोले बाबा की आराधना में अभिषेक के अलावा उनका श्रृंगार भी महत्वपूर्ण है, जो उनके अद्भूत व शांत स्वरूप के दर्शन कराते है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव का श्रृंगार रुद्राक्ष, बेलपत्र, अकउवा के फूल, धतूरा के फल से होता है, लेकिन वर्तमान में कई भक्त देशी विदेशी मनमोहक सुगंधित फूलों से श्रृंगार कराते है। छोटे से लेकर बडे़ मुकुटों में बेला, चमेली, गुड़हल, जंगली फूलों के अलावा यूरोपी फूल लगवाना भक्त पसंद करते है। इसके अलावा नगों और सुनहरी जरी का भी मुकुटों में प्रयोग किया जाता है। कृष्ण चंद्र शर्मा नारद ने बताया कि कई श्रद्धालु उज्जैन के महाकालेश्वर की श्रृंगार की तर्ज पर शिवलिंग का श्रृंगार कराते है।
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सुझाव
- लाइन में लगकर भगवान शिव के दर्शन करे।
- कोशिश करें कि भीड़ में एक वर्ष से छोटे बच्चे को लेकर मंदिर न जाए।
- किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु दिखने पर पुलिस को सूचित करे।
- घर के जरूरी सदस्यों का मोबाइल नंबर अवश्य रखे।
- कीमती जेवर दर्शन के समय पहनकर न जाए।
- दर्शन दौरान किसी भी प्रकार के विवाद से बचे।