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शताब्दी एक्सप्रेस को जून माह में पांच स्टेशनों से मिले केवल 2 यात्री

Thu, 21 Jul 2022 12:39 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 21 Jul 2022 12:39 AM IST
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Shatabdi Express got only 2 passengers from five stations in the month of June
झांसी। प्रीमियम ट्रेन शताब्दी एक्सप्रेस के झांसी मंडल में बढ़ाए गए स्टॉपेज रेलवे के राजस्व में किसी प्रकार का इजाफा नहीं कर पा रहे हैं। इस ट्रेन को जून माह में पांच स्टेशनों से केवल 2 पैसेंजर मिले थे। वहीं इस ट्रेन के जगह जगह रुकने से स्पीड पर तो असर आ ही रहा है इसका क्रेज भी बड़ी तेजी के साथ घट रहा है।
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रफ्तार के चलते ही शताब्दी एक्सप्रेस की गिनती भारतीय रेलवे की प्रीमियम ट्रेनों में होती रही है। शुरूआत में इसके चुनिंदा स्टॉपेज थे। नई दिल्ली से भोपाल के बीच करीब 708 किमी के सफर में यह गाड़ी आगरा कैंट, ग्वालियर, झांसी में ही ठहरती थी लेकिन, पिछले कुछ वर्षों के दौरान इसका स्टॉपेज बढ़ाकर मथुरा, धौलपुर, मुरैना एवं ललितपुर स्टेशन कर दिया गया। यहां स्टॉपेज भले तय कर दिए गए हों लेकिन, यहां शताब्दी को यात्रियों का टोटा झेलना पड़ रहा है।
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पिछले माह के यात्री रिकॉर्ड के मुताबिक नई दिल्ली से चलने वाली गाड़ी संख्या (12002) को भोपाल के लिए 7760 यात्री, आगरा से झांसी के लिए 1273, आगरा से भोपाल के लिए 1360, ग्वालियर से रानी कमलापति केे लिए 2613, नई दिल्ली से ग्वालियर 4596, नई दिल्ली से आगरा कैंट 6010 यात्री मिले लेकिन इसके बीच जितने छोटे स्टेशन हैं, वहां यात्रियों का टोटा है। आगरा से मुरैना के लिए महीने भर में सिर्फ 32 यात्री मिले जबकि मुरैना से ग्वालियर के लिए 5, भोपाल से रानी कमलापति के लिए 4 यात्रियों ने सफर किया। मुरैना से ग्वालियर के लिए 1, झांसी के 2, ललितपुर के लिए एक यात्री मिला। यही हाल भोपाल से चलने वाली शताब्दी (गाड़ी संख्या 12001) का है। इस गाड़ी को नई दिल्ली, आगरा कैंट, झांसी, भोपाल के लिए तो बड़ी संख्या में यात्री मिलते हैं लेकिन, छोटे स्टेशनों में यात्री नहीं होते। पिछले माह भोपाल से मथुरा के लिए 7, ग्वालियर से मुरैना के लिए एक, मुरैना से मथुरा दो, रानी कमलापति से नई दिल्ली दो, रानी कमलापति से मथुरा दो, रानी कमलापति से मुरैना दो जबकि झांसी से मुरैना के बीच शताब्दी से महज दो रेल यात्रियों ने ही सफर किया। इन स्टेशनों में अतिरिक्त ठहराव दिए जाने से ट्रेन की न सिर्फ गति प्रभावित होती है बल्कि उसकी समयबद्धता भी बिगड़ जाती है। वहीं, जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह का कहना है कि ट्रेनों का ठहराव लोगों की यात्रियों की मांग पर ही किया जाता है। छोटे स्टेशनोें की जरूरत को देखते हुए यहां गाड़ियों का ठहराव दिया गया है।
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