{"_id":"66413cd601a2f44a780fd9d4","slug":"seven-out-of-every-10-youth-are-getting-weak-bones-jhansi-news-c-11-1-jhs1004-314049-2024-05-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi News: हर 10 में सात युवाओं की हड्डियां मिल रहीं कमजोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi News: हर 10 में सात युवाओं की हड्डियां मिल रहीं कमजोर
विज्ञापन
- मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक विभाग द्वारा मरीजों की कराई जांचों में सामने आई हकीकत ॉ
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक विभाग में दिखाने आ रहे 18 से 40 साल तक के हर 10 में सात युवाओं की हड्डियां कमजोर मिल रही है। इसमें किसी की जरा सा झटका लगने पर हड्डी टूट जाती है तो किसी को तेज दर्द बना रहता है। जांच कराने पर ज्यादातर में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी मिलती है।
मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग में रोजाना सवा सौ से डेढ़ सौ मरीज ओपीडी में दिखाने के लिए आते हैं। ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अमित सहगल ने बताया कि बिगड़ी दिनचर्या, शारीरिक गतिविधियों में कमी, जंक फूड का अधिक सेवन करने से युवाओं की हड्डियां कमजोर होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। मरीजों की जांच कराने के बाद जो रिपोर्ट सामने आती है, उसमें हर 10 में सात युवाओं की हड्डियां कमजोर मिल रही हैं। ऐसे युवाओं में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी मिलती है। युवाओं की बोन मैरो डेफिसिएंसी जांच कराने पर ये माइनस एक से कम मिलने पर फ्रैक्चर का कारण बनती है। उन्होंने बताया कि हर 10 में चार बच्चों में भी विटामिन डी की कमी के चलते हड्डियां कमजोर या टेढ़ी होने की समस्या देखने को मिल रही है। जो आगे चलकर गठिया रोग का कारण बनती है। हालांकि, विटामिन डी की कमी आनुवांशिक भी होती है।
बच्चों की सेहत पर शुरू से ध्यान देना जरूरी
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने कहा कि बच्चाें की सेहत पर शुरू से ध्यान देना जरूरी है। आजकल बच्चों का बाहरी खेलकूद बंद हो गया है। बच्चे एसी में बैठकर मोबाइल, टीवी या इंडोर गेम्स खेलते रहते हैं। सलाह दी कि बच्चों को दिन में कुछ देर धूप में जरूर ले जाएं। इससे विटामिन डी की कमी नहीं होगी। जंक फूड की बजाए संतुलित आहार दें। फल, दूध आदि भोजन में शामिल करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक विभाग में दिखाने आ रहे 18 से 40 साल तक के हर 10 में सात युवाओं की हड्डियां कमजोर मिल रही है। इसमें किसी की जरा सा झटका लगने पर हड्डी टूट जाती है तो किसी को तेज दर्द बना रहता है। जांच कराने पर ज्यादातर में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी मिलती है।
मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग में रोजाना सवा सौ से डेढ़ सौ मरीज ओपीडी में दिखाने के लिए आते हैं। ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अमित सहगल ने बताया कि बिगड़ी दिनचर्या, शारीरिक गतिविधियों में कमी, जंक फूड का अधिक सेवन करने से युवाओं की हड्डियां कमजोर होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। मरीजों की जांच कराने के बाद जो रिपोर्ट सामने आती है, उसमें हर 10 में सात युवाओं की हड्डियां कमजोर मिल रही हैं। ऐसे युवाओं में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी मिलती है। युवाओं की बोन मैरो डेफिसिएंसी जांच कराने पर ये माइनस एक से कम मिलने पर फ्रैक्चर का कारण बनती है। उन्होंने बताया कि हर 10 में चार बच्चों में भी विटामिन डी की कमी के चलते हड्डियां कमजोर या टेढ़ी होने की समस्या देखने को मिल रही है। जो आगे चलकर गठिया रोग का कारण बनती है। हालांकि, विटामिन डी की कमी आनुवांशिक भी होती है।
विज्ञापन
बच्चों की सेहत पर शुरू से ध्यान देना जरूरी
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने कहा कि बच्चाें की सेहत पर शुरू से ध्यान देना जरूरी है। आजकल बच्चों का बाहरी खेलकूद बंद हो गया है। बच्चे एसी में बैठकर मोबाइल, टीवी या इंडोर गेम्स खेलते रहते हैं। सलाह दी कि बच्चों को दिन में कुछ देर धूप में जरूर ले जाएं। इससे विटामिन डी की कमी नहीं होगी। जंक फूड की बजाए संतुलित आहार दें। फल, दूध आदि भोजन में शामिल करें।
विज्ञापन