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‘सेटअप बाक्स’ लगाने में विभाग मान रहा कर चोरी
ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Tue, 09 Jun 2015 02:10 AM IST
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झांसी। वाणिज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान टीम (एसआईबी) ने केबल चलाने में उपयोग में आने वाले सेटअप बाक्स की खरीद में टैक्स चोरी मान रहा है। इसके विपरीत फर्म संचालक का कहना है कि चूंकि सेटअप बाक्स बेचे नहीं गए हैं, उपभोक्ताओं से एक्टीवेशन चार्ज लिया गया है, इस कारण उस पर कोई कर देयता नहीं बनती है।
विशेष अनुसंधान टीम ने पिछले माह डिप्टी कमिश्नर आर ए सेठ के नेतृत्व में नगर में केबल संचालित करने वाली फर्म की जांच की थी। जांच में पाया गया कि नगर के अलग- अलग क्षेत्रों में 16 केबल आपरेटर काम कर रहे हैं। इन ऑपरेटरों ने केबल उपभोक्ताओं को सेटअप बाक्स की मदद से संयोजन दे रखे हैं। प्रारंभिक जांच में फर्म के ग्रुप आपरेशन मैनेजर ने बताया कि उन्होंने ऑपरेटरों को 999 रुपये में आने वाले सेटअप बाक्स निशुल्क दिए हैं जबकि आपरेटरों से ज्ञात हुआ कि उनसे फर्म ने प्रति सेटअप बाक्स एक हजार रुपये लिए हैं। इस हिसाब से फर्म को छह करोड़ की बिक्री पर टैक्स अदा करना होगा।
हालांकि, विशेष अनुसंधान टीम इस संख्या को भी कम मान रही हैं। संबंधित अफसरों का मानना है कि एक बाक्स से एक ही टीवी को चलाया जा सकता है। हर दसवें घर (संयुक्त परिवार अथवा किराएदार) में दो या इससे अधिक संयोजन होंगे। इसी तरह होटलों के प्रत्येक कमरे आदि बड़े प्रतिष्ठानों में कई संयोजन होंगे। इस हिसाब से नगर में एक लाख से अधिक संयोजन होने चाहिए। एसआईबी टीम ने इस संख्या को बढ़ाने के लिए सूचनाएं एकत्रित करना शुरू कर दिया है। तदुपरांत रिपोर्ट खंड अधिकारी के पास भेजी जाएगी। खंड अधिकारी कर निर्धारण तय करेेंगे।
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विशेष अनुसंधान टीम ने पिछले माह डिप्टी कमिश्नर आर ए सेठ के नेतृत्व में नगर में केबल संचालित करने वाली फर्म की जांच की थी। जांच में पाया गया कि नगर के अलग- अलग क्षेत्रों में 16 केबल आपरेटर काम कर रहे हैं। इन ऑपरेटरों ने केबल उपभोक्ताओं को सेटअप बाक्स की मदद से संयोजन दे रखे हैं। प्रारंभिक जांच में फर्म के ग्रुप आपरेशन मैनेजर ने बताया कि उन्होंने ऑपरेटरों को 999 रुपये में आने वाले सेटअप बाक्स निशुल्क दिए हैं जबकि आपरेटरों से ज्ञात हुआ कि उनसे फर्म ने प्रति सेटअप बाक्स एक हजार रुपये लिए हैं। इस हिसाब से फर्म को छह करोड़ की बिक्री पर टैक्स अदा करना होगा।
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हालांकि, विशेष अनुसंधान टीम इस संख्या को भी कम मान रही हैं। संबंधित अफसरों का मानना है कि एक बाक्स से एक ही टीवी को चलाया जा सकता है। हर दसवें घर (संयुक्त परिवार अथवा किराएदार) में दो या इससे अधिक संयोजन होंगे। इसी तरह होटलों के प्रत्येक कमरे आदि बड़े प्रतिष्ठानों में कई संयोजन होंगे। इस हिसाब से नगर में एक लाख से अधिक संयोजन होने चाहिए। एसआईबी टीम ने इस संख्या को बढ़ाने के लिए सूचनाएं एकत्रित करना शुरू कर दिया है। तदुपरांत रिपोर्ट खंड अधिकारी के पास भेजी जाएगी। खंड अधिकारी कर निर्धारण तय करेेंगे।
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