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दूसरे दिन भी बैंकों में लटके रहे ताले, हड़ताल पर रहे कर्मचारी
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झांसी। बैंकों के निजीकरण के विरोध में बैंक कर्मचारियों की मंगलवार को दूसरे दिन भी हड़ताल जारी रही। इस दौरान हड़ताली कर्मचारियों ने धरना - प्रदर्शन कर सरकार की नीतियों की आलोचना की। दो दिन की हड़ताल में जिले में बैंकों का लगभग तीन सौ करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।
हड़ताल के दूसरे दिन भी बैंकों में सुबह से ही ताले लटके रहे। हड़ताली कर्मचारी सुबह सेंट्रल बैंक की मुख्य शाखा के बाहर जमा हुए और धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान यूएफबीयू के जिला संयोजक अशोक महावर ने कहा कि बैंकों के निजीकरण से आम जनता की बैंकों में जमा मेहनत की कमाई डूबने का खतरा बढ़ जाएगा। उप संयोजक जेपी किलेदार ने कहा कि बैंकों के निजी क्षेत्र में जाने से आम लोगों को ऋण पर अधिक ब्याज चुकाना होगा। एआईबीओसी के अध्यक्ष सुशील तिवारी ने कहा कि देश की आबादी के 70 फीसदी खाते राष्ट्रीयकृत बैंकों में हैं। इस आबादी के जमा धन को लूट से बचाने के लिए आंदोलन किया जा रहा है। एनसीबीई के जिला सचिव भान सिंह कुशवाहा ने कहा कि सरकार चंद पूंजीपतियों का हित साधते हुए जनता की पूंजी उन्हीं के हवाले करने जा रही है। सह संयोजक ज्ञानेंद्र मोहन अवस्थी ने बैंकों के राष्ट्रीकरण के बाद देश मजबूत हुआ है। इस दौरान सह संयोजक सुशील साहू, एनसीबीई के जिला उप सचिव अंकित सेठ, एआईपीएनबीओए के अध्यक्ष पीके तिवारी, सीबीआईएसए के सचिव अजय सिंह कुशवाहा, एनसीबीई के क्षेत्रीय सचिव रामानुज अग्निहोत्री समेत नेहा ठकरानी, निहारिका श्रीवास्तव, जितेंद्र कुमार, विनय कृष्ण यादव, हरीकृष्ण, आशीष स्वर्णकार, बीके तिवारी, अभिनव गुप्ता, देवेंद्र भारद्वाज, देवेंद्र वर्मा, सुधीर त्रिपाठी, अरविंद दुबे आदि ने भी विचार प्रकट किए।
अध्यक्षता राघवेंद्र सिंह यादव व प्रमोद दुबे ने की। सभा में सुरभि सिंह, ज्योति रायकवार, शिखा प्रियदर्शनी, मिथलेश कुमारी, निधि साहू, निहारिका नगाइच, पूर्वी गुप्ता, रुचि वर्मा, मानवेंद्र सोनी, ऋतिका शुक्ला, राजेश सोनकर, संजय पुरवार, तुलाराम, अमित साहू, दीपेश माहौर, पंकज ओझा, सिद्धार्थ वर्मा, राजेश गुप्ता, एसपी सिंह, बृजेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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एटीएम ने छोड़ा साथ, नकदी के लिए भटके लोग
झांसी। बैंकों की हड़ताल के दूसरे दिन मंगलवार को महानगर के ज्यादातर एटीएम भी साथ छोड़ गए। लोग नकदी के लिए एक एटीएम से दूसरे के चक्कर काटते रहे। जिन एटीएम से नकदी निकल रही थी, वहां लंबी-लंबी कतारें नजर आईं। लोग लाइनों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
कई एटीएम के चक्कर काटने के बाद इलाहाबाद बैंक के एटीएम पर पहुंचा हूं। यहां भी नकदी नहीं मिली। देखने में आया कि यहां केवल इलाहाबाद बैंक के एटीएम कार्ड धारकों को भी पैसा मिल रहा है। - धीरेंद्र डेनियल
बैंकों की हड़ताल पूर्व घोषित थी। ऐसे में एटीएम सुचारु चलते रहें, इसकी व्यवस्था पहले से ही की जानी चाहिए थी। लेकिन, इस पर ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में आम लोगों को नकदी के लिए परेशानी हो रही है। - संजय कुमार साहू
आज के दौर में लोग नकदी के लिए एटीएम पर निर्भर हो गए हैं। ऐसे में एटीएम भी साथ छोड़ गए। इससे भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। कई एटीएम के चक्कर काटने के बाद भी नकदी हाथ नहीं आ पाई। - मनोज कुमार
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से लेकर इलाइट चौराहे तक के एटीएम खंगाल चुके हैं, लेकिन पैसा कहीं नहीं मिला। एक एटीएम पर पैसा था भी, तो वहां लंबी लाइन लगी हुई थी। - शैलेंद्र तिवारी
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हड़ताल के दूसरे दिन भी बैंकों में सुबह से ही ताले लटके रहे। हड़ताली कर्मचारी सुबह सेंट्रल बैंक की मुख्य शाखा के बाहर जमा हुए और धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान यूएफबीयू के जिला संयोजक अशोक महावर ने कहा कि बैंकों के निजीकरण से आम जनता की बैंकों में जमा मेहनत की कमाई डूबने का खतरा बढ़ जाएगा। उप संयोजक जेपी किलेदार ने कहा कि बैंकों के निजी क्षेत्र में जाने से आम लोगों को ऋण पर अधिक ब्याज चुकाना होगा। एआईबीओसी के अध्यक्ष सुशील तिवारी ने कहा कि देश की आबादी के 70 फीसदी खाते राष्ट्रीयकृत बैंकों में हैं। इस आबादी के जमा धन को लूट से बचाने के लिए आंदोलन किया जा रहा है। एनसीबीई के जिला सचिव भान सिंह कुशवाहा ने कहा कि सरकार चंद पूंजीपतियों का हित साधते हुए जनता की पूंजी उन्हीं के हवाले करने जा रही है। सह संयोजक ज्ञानेंद्र मोहन अवस्थी ने बैंकों के राष्ट्रीकरण के बाद देश मजबूत हुआ है। इस दौरान सह संयोजक सुशील साहू, एनसीबीई के जिला उप सचिव अंकित सेठ, एआईपीएनबीओए के अध्यक्ष पीके तिवारी, सीबीआईएसए के सचिव अजय सिंह कुशवाहा, एनसीबीई के क्षेत्रीय सचिव रामानुज अग्निहोत्री समेत नेहा ठकरानी, निहारिका श्रीवास्तव, जितेंद्र कुमार, विनय कृष्ण यादव, हरीकृष्ण, आशीष स्वर्णकार, बीके तिवारी, अभिनव गुप्ता, देवेंद्र भारद्वाज, देवेंद्र वर्मा, सुधीर त्रिपाठी, अरविंद दुबे आदि ने भी विचार प्रकट किए।
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अध्यक्षता राघवेंद्र सिंह यादव व प्रमोद दुबे ने की। सभा में सुरभि सिंह, ज्योति रायकवार, शिखा प्रियदर्शनी, मिथलेश कुमारी, निधि साहू, निहारिका नगाइच, पूर्वी गुप्ता, रुचि वर्मा, मानवेंद्र सोनी, ऋतिका शुक्ला, राजेश सोनकर, संजय पुरवार, तुलाराम, अमित साहू, दीपेश माहौर, पंकज ओझा, सिद्धार्थ वर्मा, राजेश गुप्ता, एसपी सिंह, बृजेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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एटीएम ने छोड़ा साथ, नकदी के लिए भटके लोग
झांसी। बैंकों की हड़ताल के दूसरे दिन मंगलवार को महानगर के ज्यादातर एटीएम भी साथ छोड़ गए। लोग नकदी के लिए एक एटीएम से दूसरे के चक्कर काटते रहे। जिन एटीएम से नकदी निकल रही थी, वहां लंबी-लंबी कतारें नजर आईं। लोग लाइनों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
कई एटीएम के चक्कर काटने के बाद इलाहाबाद बैंक के एटीएम पर पहुंचा हूं। यहां भी नकदी नहीं मिली। देखने में आया कि यहां केवल इलाहाबाद बैंक के एटीएम कार्ड धारकों को भी पैसा मिल रहा है। - धीरेंद्र डेनियल
बैंकों की हड़ताल पूर्व घोषित थी। ऐसे में एटीएम सुचारु चलते रहें, इसकी व्यवस्था पहले से ही की जानी चाहिए थी। लेकिन, इस पर ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में आम लोगों को नकदी के लिए परेशानी हो रही है। - संजय कुमार साहू
आज के दौर में लोग नकदी के लिए एटीएम पर निर्भर हो गए हैं। ऐसे में एटीएम भी साथ छोड़ गए। इससे भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। कई एटीएम के चक्कर काटने के बाद भी नकदी हाथ नहीं आ पाई। - मनोज कुमार
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से लेकर इलाइट चौराहे तक के एटीएम खंगाल चुके हैं, लेकिन पैसा कहीं नहीं मिला। एक एटीएम पर पैसा था भी, तो वहां लंबी लाइन लगी हुई थी। - शैलेंद्र तिवारी