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घोटाला: बैंक वालों ने निष्क्रिय खातों से पैसा निकालकर अपने रिश्तेदारों के अकाउंट में डाला

Tue, 26 Jul 2022 01:18 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 26 Jul 2022 01:18 AM IST
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Scam: Bankers withdraw money from inactive accounts and put it in the account of their relatives
झांसी। सेंट्रल बैंक की चिरगांव शाखा में बैंककर्मियों ने आपस में मिलीभगत करके डेड खातों की रकम निकालकर उसे अपने रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर दी। इसके बाद यह पूरी मोटी रकम उन्होंने शेयर मार्केट में निवेश कर दी लेकिन, उनके इस खेल का भंडाफोड़ इसी शाखा में तैनात एक बैंककर्मी ने कर दिया। पूरे मामले की शिकायत उसने मुख्यालय अफसरों से कर दी। मुख्यालय से स्पेशल ऑडिट को यहां टीम भेजा गया। ऑडिट टीम घपले की कुल रकम की पड़ताल करने में जुटी है। बताया जा रहा शुरूआती ऑडिट शुरूआती जांच में मामला सही निकला। आरोपियों से गुपचुप तरीके से रिकवरी की तैयारी चल रही है। वहीं, बैंक अफसर अभी घपले के बारे में खुलकर बोलने को राजी नहीं हैं।
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सामान्यता तीन साल खाते में लेन-देन न होने वाले बैंक खाते अक्रिय कर दिए जाते हैं। हर बैंक शाखा में 200-300 बैंक खाते इस श्रेणी के होते हैं। अक्रिय खाता हो जाने से इनकी सीधी निगरानी नहीं होती। इनके रिकॉर्ड भी नियमित तौर पर तैयार नहीं होते। इनमें से कई खातों में लाखों रुपये पड़े रहते हैं लेकिन, इन पैसों का कोई क्लेम नहीं करता। आरबीआई के नियमों के मुताबिक पांच साल तक यह पैसा शाखा में रहता है। उसके बाद मुख्यालय के माध्यम से यह पैसा आरबीआई को भेज दिया जाता है लेकिन, इसके पहले ही यहां तैनात बैंककर्मियों ने खेल कर दिया। मुख्यालय पहुंची शिकायत के मुताबिक इन बैंक खातों की हर बात मालूम होने का फायदा उठाते हुए इन लोगों ने पहले अपने परिचित और रिश्तेदारों के बैंक में खाते खोले। उसके बाद इन डेड खातों की रकम अपने रिश्तेदारों के खाते में ट्रांसफर करते रहे। जब इसमें एक मोटी रकम एकत्रित हो गई तब यह पूरा पैसा निकाल लिया गया। यह पैसा सीधे शेयर मार्केट में निवेश कर दिया गया। यह शिकायत यहीं तैनात एक बैंककर्मी की ओर से मिलने पर मुख्यालय अफसरों मेें भी हड़कंप मच गया। उनकी ओर से स्पेशल ऑडिट टीम भेजी गई। ऑडिट टीम एक-एक खाते और वाउचर की जांच पड़ताल में जुटी है। मालूम चला है कि पिछले कुछ साल के वाउचर पलटे जाने के बाद ही गड़बड़ी पकड़ में आ गई। बताया जा रहा अब दोषियों से रिकवरी की तैयारी की जा रही है हालांकि बैंक अफसर इस बारे में कुछ भी खुलकर बोलने को राजी नहीं हैं। मुख्य प्रबंधक सुशील कुमार का कहना है अभी जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही सही बात मालूम चल सकेगी। वहीं, रीजनल मैनेजर संदीपन दास गुप्ता का कहना है कि अगर आवश्यकता होगी तब रिकवरी कराई जाएगी।
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