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शव की चीरफाड़ किए बिना ही पास हो गए एमबीबीएस के तीन बैच

Mon, 22 Feb 2021 02:26 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 22 Feb 2021 02:26 AM IST
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sav ki chirfad kiye bina hi pas ho gaye mmbs ke then bech
शव के चीरफाड़ के बिना ही एमबीबीएस के तीन बैच पास हो गए। - फोटो : ???? ????
शव की चीरफाड़ किए बिना ही पास हो गए एमबीबीएस के तीन बैच
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज को वर्ष 2017 के बाद से कोई भी शव नहीं मिल सके। इस कारण शव की चीरफाड़ किए बिना ही एमबीबीएस के तीन बैच पास हो गए। चिकित्सा शिक्षकों ने छात्रों को डेड बॉडी (शव) के पुराने पार्ट्स से ही शरीर से जुड़ी जानकारियां दीं। छात्रों को चरणबद्ध तरीके से ऑपरेशन करने का मौका नहीं मिल सका।
मेडिकल कॉलेज में साढ़े पांच साल का एमबीबीएस कोर्स होता है। छात्रों को प्रथम वर्ष में ही कैडेवर एनाटमी विषय पढ़ाया जाता है। इस दौरान उन्हें डेड बॉडी पर डिस्केशन कराया जाता है। नियमानुसार एक टेबल पर 10 छात्रों पर एक बॉडी होनी चाहिए। चूंकि, मेडिकल कॉलेज में 150 छात्र-छात्राओं का बैच है, ऐसे में कुल मिलाकर 15 डेडबॉडी हर साल उपलब्ध रहनी चाहिए। मेडिकल स्टूडेंट्स डेड बॉडी का हाथ, पैर एब्डोमन आदि का एक-एककर चरणबद्ध तरीके से ऑपरेशन करते हैं। इसके जरिए वो नस, अंगों से हड्डियों की दूरी आदि के बारे में सीखते हैं।
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ऑपरेशन कर मेडिकल पूरी तरह बॉडी से जुड़े अंगों और नसों, हड्डियों, शरीर के अंदर के पार्ट्स आदि के बारे में जान जाते हैं, जो कि आगे चलकर उन्हें अच्छा चिकित्सक बनाने में काफी अहम साबित होता है। मगर डेडबॉडी की कमी के चलते मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2017 के बाद से मृत शरीर मिल ही नहीं सका है। ऐसे में पिछले तीन बैच डेड बॉडी का बिना ऑपरेशन किए ही पास हो गए। हालांकि, इस दौरान चिकित्सा शिक्षकों ने मेडिकल स्टूडेंट्स को जार में प्रिजर्व किए हुए रखे बॉडी के पुराने पार्ट्स से शारीरिक अंगों के बारे में जानकारी दी।
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लोगों को देहदान के लिए करेंगे जागरूक
आगामी 19-20 मार्च को युग दधीचि संस्थान के संस्थापक झांसी आ रहे हैं। वो झांसी के लोगों को देहदान करने के लिए जागरूक करेंगे। ताकि, मरने के बाद भी लोगों का शरीर किसी काम आ सके। लगातार डेड बॉडी की कमी के चलते अब देहदान को बढ़ावा देना जरूरी है।

वर्जन..
वर्ष 2017 में अंतिम बार कॉलेज को डेड बॉडी प्राप्त हुई थीं, जिनके जरिए मेडिकल स्टूडेंटस ने काफी कुछ सीखा। इसके बाद बॉडी न मिल पाने के कारण एमबीबीएस स्टूडेंट्स को पुराने पार्ट्स के जरिए ही पढ़ाया गया। साथ ही हर संभव जानकारी देने का प्रयास किया गया। अब फिर से इस बार डेड बॉडी की उपलब्धता का प्रयास शुरू कर दिया गया है। कानपुर के एक संस्थान ने बॉडी उपलब्ध कराने पर सहमति भी दी है। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज झांसी।
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