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सोलह कलाओं से परिपूर्ण चंद्रमा शरद पूर्णिमा पर बरसाएगा अमृत
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लक्ष्मीमंदिर में मां की मूर्ती
झांसी। शरद पूर्णिमा पर वर्ष में एक बार सोलह कलाओं से परिपूर्ण चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसेगा। धन की देवी लक्ष्मी का प्राकट्य दिवस मनेगा। साथ ही, महानगर के श्रीकृष्ण मंदिरों में भगवान अपने दिव्य दर्शन देंगे। श्रद्धालु मोहक भजन गाएंगे। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर रात में खीर रखी जाती है। जिसे खाने से मनुष्य स्वस्थ रहता है।
अश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा जिसे शरद पूर्णिमा कहते हैं को साल की पूर्णिमाओं में खास माना जाता है। इस बार शरद पूर्णिमा पर्व 30 को मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के साथ ही लक्ष्मी जी की पूजा का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर सागर मंथन के समय लक्ष्मी जी का प्राकट्य हुआ था। ऐसे में उनकी पूजा का बड़ा महत्व है। महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार पूर्णिमा की तिथि शुक्रवार 30 अक्तूबर को शाम 5:40 बजे से शुरू हो जाएगी।
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यह तिथि शनिवार की रात आठ बजे तक रहेगी। शरद पूर्णिमा पर अश्विनी नक्षत्र और अमृत योग रहेगा। उनके अनुसार शरद पूर्णिमा का महत्व अर्द्धरात्रि का है। चंद्रमा की किरणों से अमृत टपकता है। ऐसे में रात में खुले आसमान में खीर रखी जाती है। जो सुबह खाते हैं। यह खीर आरोग्य प्रदान करता है। इधर ज्योतिषविद् डॉ. नाथूराम पांडेय के अनुसार शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। शरद पूर्णिमा कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। प्राचीन भारत में इस दिन बडे़ उत्सव होते रहे हैं।
दिव्य होगा कन्हैया का शृंगार, झांकी सजेगी
महानगर के कृष्ण मंदिरों में भगवान की दिव्य मूर्तियों का भव्य शृंगार होगा। गोपीनाथ जी के मंदिर में भगवान को गर्भगृह से बाहर विराजमान किया जाएगा। मध्य रात 12 बजे महा आरती होगी और खीर का प्रसाद लगेगा। रासलीला की झांकी भी सजायी जाएगी। इधर, कुंज बिहारी मंदिर में श्री कुंज बिहारी जू को चंद्रमा के सामान सफेद पोशाक धारण करायी जाएगी। परंपरागत भजन गाए जाएंगे। मुरली मनोहर मंदिर में विशेष श्रृंगार होगा।
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अश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा जिसे शरद पूर्णिमा कहते हैं को साल की पूर्णिमाओं में खास माना जाता है। इस बार शरद पूर्णिमा पर्व 30 को मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के साथ ही लक्ष्मी जी की पूजा का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर सागर मंथन के समय लक्ष्मी जी का प्राकट्य हुआ था। ऐसे में उनकी पूजा का बड़ा महत्व है। महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार पूर्णिमा की तिथि शुक्रवार 30 अक्तूबर को शाम 5:40 बजे से शुरू हो जाएगी।
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यह तिथि शनिवार की रात आठ बजे तक रहेगी। शरद पूर्णिमा पर अश्विनी नक्षत्र और अमृत योग रहेगा। उनके अनुसार शरद पूर्णिमा का महत्व अर्द्धरात्रि का है। चंद्रमा की किरणों से अमृत टपकता है। ऐसे में रात में खुले आसमान में खीर रखी जाती है। जो सुबह खाते हैं। यह खीर आरोग्य प्रदान करता है। इधर ज्योतिषविद् डॉ. नाथूराम पांडेय के अनुसार शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। शरद पूर्णिमा कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। प्राचीन भारत में इस दिन बडे़ उत्सव होते रहे हैं।
दिव्य होगा कन्हैया का शृंगार, झांकी सजेगी
महानगर के कृष्ण मंदिरों में भगवान की दिव्य मूर्तियों का भव्य शृंगार होगा। गोपीनाथ जी के मंदिर में भगवान को गर्भगृह से बाहर विराजमान किया जाएगा। मध्य रात 12 बजे महा आरती होगी और खीर का प्रसाद लगेगा। रासलीला की झांकी भी सजायी जाएगी। इधर, कुंज बिहारी मंदिर में श्री कुंज बिहारी जू को चंद्रमा के सामान सफेद पोशाक धारण करायी जाएगी। परंपरागत भजन गाए जाएंगे। मुरली मनोहर मंदिर में विशेष श्रृंगार होगा।