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फर्जी मार्कशीट लगाकर सफाई नायकों ने ले ली पदोन्नति

Thu, 15 Jul 2021 01:03 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 15 Jul 2021 01:03 AM IST
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Safai Nayaks took promotion by applying fake marksheet
झांसी। नगर निगम में पदोन्नत हुए सफाई नायकों की जैसे-जैसे जांच पूरी हो रही है उसमें बड़ा गोलमाल सामने आ रहा है। अब तक पांच सफाई नायकों की मार्कशीट में फर्जीवाड़ा मिल चुका। इन सफाई नायकों ने पदोन्नति के लिए जाली मार्कशीट का सहारा लिया। दोषी पाए गए एक सफाई नायक के खिलाफ निगम प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उसे वापस पुराने पद पर भेज दिया है।
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शासन ने झांसी के लिए कुल 27 सफाई नायक (हवलदार) के पद स्वीकृत किए हैं। इनका मुख्य काम सफाई समेत सफाई कर्मियों के काम की निगरानी करना है। इन हवलदारों के भरोसे ही सफाई व्यवस्था रहती है। पिछले साल फरवरी 2020 में तत्कालीन नगर आयुक्त मनोज कुमार के कार्यकाल में 19 सफाईकर्मी पदोन्नति पाकर सफाई नायक बना दिए गए। इसके लिए न्यूनतम योग्यता जूनियर हाईस्कूल उत्तीर्ण होना चाहिए। प्रमोशन के बाद जब पदोन्नत सफाईनायकों की शैक्षिक योग्यता जांची गई तब मालूम चला कई सफाई नायकों ने प्रमोशन के लिए फर्जी मार्कशीट का इस्तेमाल किया था। जांच में यह फर्जीवाड़ा अब उजागर हुआ। मालूम चला कि सफाई नायकों ने जानबूझकर ऐसे विद्यालय की मार्कशीट जमा कराई जिनका अस्तित्व ही नहीं। बेसिक शिक्षा विभाग ने इसकी पुष्टि की है। बीएसए कार्यालय से भेजी रिपोर्ट में कल्लू, संगीता एवं राजेश के विद्यालयों का अस्तित्व ही नहीं मिला जबकि हरविजय पुत्र सुकवासी की नाम ही नहीं मिला। इस नाम से किसी ने परीक्षा नहीं ही नहीं दी। एक अन्य सफाई नायक विकास ने व्यक्तिगत परीक्षा ही उत्तीर्ण की। निगम प्रशासन ने हरविजय को रिवर्ट करके उसके मूल पद पर वापस भेज दिया लेकिन, दूसरों के खिलाफ अभी कार्रवाई नहीं की है। अपर नगर आयुक्त शादाब असलम का कहना है कि अन्य के खिलाफ स्पस्ट आख्या नहीं मिली है। इनकी आख्या मिलने पर इनको भी वापस मूल पद पर भेज दिया जाएगा। बता दें, नगर निगम में 27 सफाई नायकों के मुकाबले 26 सफाई नायक नियमित जबकि 22 बतौर कार्यवाहक काम कर रहे हैं।
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मृतक आश्रितों केे नाम पर भी जमकर खेल
सफाई कर्मचारियों की नियमित भर्ती पिछले करीब पांच साल से बंद है। ऐसे में सफाई कर्मियों की नियुक्ति के लिए मृतक कोटे का इस्तेमाल हो रहा है। नियमानुसार परिवार में एक सरकारी कर्मचारी होने पर आश्रित को सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकती लेकिन, निगम में 26 मामले ऐसे सामने आ चुके जिनके परिवार में सरकारी नौकरी होने के बावजूद आश्रितों को सरकारी नौकरी थमा दी गई। इनमें अरूण पुत्र शिवचरन, कमल पुत्र नारायण, सुमित, प्रमोद, ओमकार, हरिशंकर, सचिन, दिनेश पुत्र मातू, दिनेश पुत्र प्रेमसिंह, मनोज, रामजी, कुंदन, सौरभ, मनोज, मन्नो, धर्मेंद्र, किरण, भूरी, मोहन, आरती, रेखा, नत्थु, सविता, विमला की नियुक्ति की जांच चल रही है। कुछ दिनों पहले नगर विकास उपसचिव कल्याण बनर्जी ने इस आधार पर नियुक्ति पाए कर्मचारियोें की सेवा समाप्त करने के भी निर्देश दिए हैं।
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