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सुविधाओं से महरूम यात्री
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Jul 2016 12:47 AM IST
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roadways, jhansi hindi news
- फोटो : amar ujala
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झांसी। एक तरफ तो रोडवेज ने किराया फिर बढ़ा दिया है, लेकिन दूसरी ओर यात्री सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। दस हजार से ज्यादा यात्रियों का रोज आवागमन है, लेकिन बारिश में उनके लिए सिर छुपाने तक के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। न तो पीने का पानी है और न ही ठहरने तथा बैठने के पुख्ता इंतजाम हैं।
महानगर के अंतर्राज्यीय बस स्टैंड पर यात्री सुविधा के नाम पर भले ही कुछ विकास कार्य कराए गए हों, लेकिन यह नदारद हैं। घोडे़, कुत्ते व गाय का विचरण, जगह-जगह फैले गंदगी के ढेर, जल भराव और उस पर गुमटी दुकानदारों का अतिक्रमण अंतर्राज्यीय बस स्टैंड की शक्ल को बद से बदतर पेश करता है। हालत यह है कि तीन हाईमास्ट व स्ट्रीट लाइट अधिकांश समय नहीं जलती हैं। ऐसे में कई मौकों पर बस स्टैंड पर घुप्प अंधेरा छा जाता है। यात्रियों एवं कर्मियों को स्वच्छ पानी के लिए भी यहां-वहां भटकना पड़ता है।
अमर उजाला की टीम से बातचीत में कई यात्रियों ने कहा कि बस स्टैंड की हालत प्रदेश में संभवत: सबसे खराब है। यहां यात्री सुविधा जीरो हैं। दरअसल, नगर निगम की जमीन पर बस स्टैंड चल रहा है। रोडवेज भी सौंदर्यीकरण का दायित्व नगर निगम पर डालता है। क्योंकि वह नगर निगम को प्रति बस 15 रुपया पार्किंग शुल्क के रूप में देता है।
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विभाग की ओर से यात्रियों को जो सुविधाएं दी जाती हैं, वह दे रहे हैं। यूपी रोडवेज के प्लेटफार्म पर सफाई के लिए कर्मचारी तैनात हैं। जगह मिलने पर यात्रियों को बैठने के लिए और व्यवस्था की जाएगी। एमपी रोडवेज का प्लेटफार्म मिलने पर वहां यात्री सुविधा के लिए सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
डीवी सिंह
आरएम रोडवेज
बस स्टैँड पर सफाई प्रतिदिन होती है, लेकिन निचला इलाका होने से जल भराव एवं गंदगी हो जाती है। वहीं लाइट व्यवस्था भी ठीक है, अगर कोई सूचना मिलती है तो स्ट्रीट लाइट व हाईमास्ट को ठीक करा दिया जाएगा।
रोहन सिंह, अपर नगर आयुक्त
गरौठा व कोंच से भेदभाव
झांसी। गरौठा व कोंच के साथ रोडवेज भेदभाव कर रहा है। ललितपुर, कानपुर सहित कई मार्गों पर रोडवेज की टनाटन बसें दौड़ रही हैं। वहीं गरौठा व कोंच के लिए पुरानी एवं जर्जर बसें दौड़ाई जा रही हैं।
भले ही रोडवेज ने यात्री किराए में वृद्धि कर दी हो, लेकिन सुविधा और बेहतर परिवहन साधन के नाम पर कोंच व गरौठा के यात्री काफी लंबे समय से भेदभाव झेल रहे हैं। फटी हुई सीटें, खिड़की के जाम शीशे, आपात चिकित्सा सामग्री व फायर किट सामग्री का अभाव, खिड़कियों में शर्ट फाड़ने को बेताब आड़ी तिरछी कीलें, साफ सफाई का अभाव उक्त मार्ग की बसों की पहचान है। इन दिनों हालत यह है कि गरौठा के लिए रोडवेज की निर्धारित बसें पूरे चक्कर भी नहीं लगा पा रही हैं। यात्रियों के मुताबिक झांसी से गरौठा व गरौठा से झांसी आने के लिए जरूरत से ज्यादा समय लग जाता है। क्योंकि उक्त मार्ग पर बसें अक्सर ब्रेक डाउन हो जाती हैं। उल्लेखनीय है कि गरौठा के लिए चार बसें हैं, जो दिन में आठ चक्कर लगाती हैं। वहीं काेंच के लिए छह बसें दौड़ती हैं।
गरौठा व कोंच का मार्ग काफी खराब है, ऐेसे में बसें अक्सर खराब होती रहती हैं, लेकिन जल्द ही गरौठा मार्ग पर इन बसों को हटाकर अच्छी से अच्छी बसें और दो नई बसें चलाई जाएंगी। इसके अलावा क ई मार्गों पर फर्जी विकलांग बनकर यात्रा करने वालों पर भी कार्यवाही की जाएगी।
अमर नाथ मेहता
सेवा प्रबंधक रोडवेज
कैमरे हैं खराब
अंतर्राज्यीय बस स्टैंड पर यूपी रोडवेज द्वारा लगे कैमरे इन दिनों खराब हैं। इन कैमरों की मदद से रोडवेज के कर्मचारी बस स्टैंड के कई हिस्सों एवं अपने बसों के संचालन पर बराबर नजर रखते आए हैं।
घर बैठे लें रोडवेज बसों की जानकारी
यात्री घर बैठे भी रोडवेज की बसों की संचालन की जानकारी उसके इंक्वायरी नंबर पर ले सकता है। 0510 - 2444970 पर यात्री न सिर्फ बसों के विषय में, बल्कि यात्री अपनी समस्या का भी निराकरण करा सकता है। यूपी रोडवेज की इंक्वायरी सेवा 24 घंटे सक्रिय है। वहीं दो कर्मचारी अंतर्राज्यीय बस स्टैंड पर यात्रियों की समस्या सुलझाने, उन्हें बैठाने आदि का कार्य करते हैं।
रोडवेज बसों की धुलाई व सफाई अब स्टैंड पर
रोडवेज बसों की धुलाई व सफाई अब डिपो के अलावा महानगर के अंतर्राज्यीय बस स्टैंड पर भी होगी। स्वच्छता अभियान के तहत मुख्यालय ने यह निर्णय लिया है। झांसी परिक्षेत्र में उरई व झांसी बस स्टैंड को चयनित किया गया है, जहां बसों की सफाई निजी संस्थाओं द्वारा की जाएगी। विभाग के अनुसार यह वह बसें हाेंगी, जो दो सौ किमी चलकर आई हाेंगी।
सरकारी कर्मी ही लगा रहे सरकार को चूना
झांसी। यह जानकार आश्चर्य होगा कि सरकारी कर्मचारी ही सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगा रहे हैं। रोडवेज के कुछ कंडक्टरों व ड्राइवरों के मुताबिक अपने कार्यस्थल पर आने - जाने के लिए प्रतिदिन सैकड़ों सरकारी कर्मी रोडवेज की बसों में सफर करते हैं। इनमें से कई फर्जी विकलांगता का प्रमाणपत्र लेकर किराए से पूरी तरह मुक्ति पा लेते हैं, जिनमें कई बैंक कर्मी, शिक्षक, डाक्टर आदि हैं जो पूरी तरह से स्वस्थ दिखते हैं। जालौन, उरई, ललितपुर मार्ग पर यह लोग सुबह, दोपहर व शाम की बसों में सफर करते दिख जाएंगे। इन कंडक्टरों के अनुसार बसों में विकलांग यात्रियों का कोटा स्पष्ट नहीं है। इन विकलांग यात्रियों से कोई किराया शुल्क नहीं लिया जाता है, ऐसे में सरकार की इस उदारता का पूरा लाभ कुछ लोग उठा रहे हैं।
यात्रियों की जुबानी
लगता ही नहीं कि यह अंतर्राज्यीय बस स्टैंड है
यहां ऐसा नहीं लगता कि यह अंतर्राज्यीय बस स्टैंड है। जगह- जगह गंदगी के ढेर और उड़ती मक्खियां यहां की व्यवस्था को दिखा रही हैं। स्वच्छ पानी की भी सुविधा नहीं दिखाई दे रही है।
महरौनी जा रहे महेंद्र
भेदभाव बरता जा रहा है गरौठा से
रोडवेज को सबसे ज्यादा कमाई राम नगर गरौठा मार्ग पर होती है। जर्जर बसें भी फुल रहती हैं। यहां जाने वाली दो बसें बंद कर दी गई र्हैं। कई बार बसें ब्रेक डाउन हो जाती है, जिससे काफी अतिरिक्त समय लग जाता है, आने जाने में। उक्त मार्ग पर कंडम बसें चलाकर भेदभाव बरता जा रहा है।
गरौठा जा रहे घनश्याम गुप्ता
शिवपुरी के लिए नहीं हैं सरकारी बसें
शिवपुरी के लिए यूपी रोडवेज की बस न होने और एमपी रोडवेज की बसें नहीं होेने पर सैकड़ों यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। निजी बसों में मनमाना किराया देना पड़ता है।
शिवपुरी जा रहे ब्रज भान सिंह यादव
गंदगी के ढेरों से घबराता है मन
यहां के बस स्टैंड पर गंदगी के ढेरों से मन घबराता है। अन्य शहरों के बस स्टैंडों के मुकाबले यहां सफाई की स्थिति काफी खराब है। यात्री शैड भी पर्याप्त नहीं हैं।
पिछोर जा रहे भरत
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महानगर के अंतर्राज्यीय बस स्टैंड पर यात्री सुविधा के नाम पर भले ही कुछ विकास कार्य कराए गए हों, लेकिन यह नदारद हैं। घोडे़, कुत्ते व गाय का विचरण, जगह-जगह फैले गंदगी के ढेर, जल भराव और उस पर गुमटी दुकानदारों का अतिक्रमण अंतर्राज्यीय बस स्टैंड की शक्ल को बद से बदतर पेश करता है। हालत यह है कि तीन हाईमास्ट व स्ट्रीट लाइट अधिकांश समय नहीं जलती हैं। ऐसे में कई मौकों पर बस स्टैंड पर घुप्प अंधेरा छा जाता है। यात्रियों एवं कर्मियों को स्वच्छ पानी के लिए भी यहां-वहां भटकना पड़ता है।
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अमर उजाला की टीम से बातचीत में कई यात्रियों ने कहा कि बस स्टैंड की हालत प्रदेश में संभवत: सबसे खराब है। यहां यात्री सुविधा जीरो हैं। दरअसल, नगर निगम की जमीन पर बस स्टैंड चल रहा है। रोडवेज भी सौंदर्यीकरण का दायित्व नगर निगम पर डालता है। क्योंकि वह नगर निगम को प्रति बस 15 रुपया पार्किंग शुल्क के रूप में देता है।
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विभाग की ओर से यात्रियों को जो सुविधाएं दी जाती हैं, वह दे रहे हैं। यूपी रोडवेज के प्लेटफार्म पर सफाई के लिए कर्मचारी तैनात हैं। जगह मिलने पर यात्रियों को बैठने के लिए और व्यवस्था की जाएगी। एमपी रोडवेज का प्लेटफार्म मिलने पर वहां यात्री सुविधा के लिए सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
डीवी सिंह
आरएम रोडवेज
बस स्टैँड पर सफाई प्रतिदिन होती है, लेकिन निचला इलाका होने से जल भराव एवं गंदगी हो जाती है। वहीं लाइट व्यवस्था भी ठीक है, अगर कोई सूचना मिलती है तो स्ट्रीट लाइट व हाईमास्ट को ठीक करा दिया जाएगा।
रोहन सिंह, अपर नगर आयुक्त
गरौठा व कोंच से भेदभाव
झांसी। गरौठा व कोंच के साथ रोडवेज भेदभाव कर रहा है। ललितपुर, कानपुर सहित कई मार्गों पर रोडवेज की टनाटन बसें दौड़ रही हैं। वहीं गरौठा व कोंच के लिए पुरानी एवं जर्जर बसें दौड़ाई जा रही हैं।
भले ही रोडवेज ने यात्री किराए में वृद्धि कर दी हो, लेकिन सुविधा और बेहतर परिवहन साधन के नाम पर कोंच व गरौठा के यात्री काफी लंबे समय से भेदभाव झेल रहे हैं। फटी हुई सीटें, खिड़की के जाम शीशे, आपात चिकित्सा सामग्री व फायर किट सामग्री का अभाव, खिड़कियों में शर्ट फाड़ने को बेताब आड़ी तिरछी कीलें, साफ सफाई का अभाव उक्त मार्ग की बसों की पहचान है। इन दिनों हालत यह है कि गरौठा के लिए रोडवेज की निर्धारित बसें पूरे चक्कर भी नहीं लगा पा रही हैं। यात्रियों के मुताबिक झांसी से गरौठा व गरौठा से झांसी आने के लिए जरूरत से ज्यादा समय लग जाता है। क्योंकि उक्त मार्ग पर बसें अक्सर ब्रेक डाउन हो जाती हैं। उल्लेखनीय है कि गरौठा के लिए चार बसें हैं, जो दिन में आठ चक्कर लगाती हैं। वहीं काेंच के लिए छह बसें दौड़ती हैं।
गरौठा व कोंच का मार्ग काफी खराब है, ऐेसे में बसें अक्सर खराब होती रहती हैं, लेकिन जल्द ही गरौठा मार्ग पर इन बसों को हटाकर अच्छी से अच्छी बसें और दो नई बसें चलाई जाएंगी। इसके अलावा क ई मार्गों पर फर्जी विकलांग बनकर यात्रा करने वालों पर भी कार्यवाही की जाएगी।
अमर नाथ मेहता
सेवा प्रबंधक रोडवेज
कैमरे हैं खराब
अंतर्राज्यीय बस स्टैंड पर यूपी रोडवेज द्वारा लगे कैमरे इन दिनों खराब हैं। इन कैमरों की मदद से रोडवेज के कर्मचारी बस स्टैंड के कई हिस्सों एवं अपने बसों के संचालन पर बराबर नजर रखते आए हैं।
घर बैठे लें रोडवेज बसों की जानकारी
यात्री घर बैठे भी रोडवेज की बसों की संचालन की जानकारी उसके इंक्वायरी नंबर पर ले सकता है। 0510 - 2444970 पर यात्री न सिर्फ बसों के विषय में, बल्कि यात्री अपनी समस्या का भी निराकरण करा सकता है। यूपी रोडवेज की इंक्वायरी सेवा 24 घंटे सक्रिय है। वहीं दो कर्मचारी अंतर्राज्यीय बस स्टैंड पर यात्रियों की समस्या सुलझाने, उन्हें बैठाने आदि का कार्य करते हैं।
रोडवेज बसों की धुलाई व सफाई अब स्टैंड पर
रोडवेज बसों की धुलाई व सफाई अब डिपो के अलावा महानगर के अंतर्राज्यीय बस स्टैंड पर भी होगी। स्वच्छता अभियान के तहत मुख्यालय ने यह निर्णय लिया है। झांसी परिक्षेत्र में उरई व झांसी बस स्टैंड को चयनित किया गया है, जहां बसों की सफाई निजी संस्थाओं द्वारा की जाएगी। विभाग के अनुसार यह वह बसें हाेंगी, जो दो सौ किमी चलकर आई हाेंगी।
सरकारी कर्मी ही लगा रहे सरकार को चूना
झांसी। यह जानकार आश्चर्य होगा कि सरकारी कर्मचारी ही सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगा रहे हैं। रोडवेज के कुछ कंडक्टरों व ड्राइवरों के मुताबिक अपने कार्यस्थल पर आने - जाने के लिए प्रतिदिन सैकड़ों सरकारी कर्मी रोडवेज की बसों में सफर करते हैं। इनमें से कई फर्जी विकलांगता का प्रमाणपत्र लेकर किराए से पूरी तरह मुक्ति पा लेते हैं, जिनमें कई बैंक कर्मी, शिक्षक, डाक्टर आदि हैं जो पूरी तरह से स्वस्थ दिखते हैं। जालौन, उरई, ललितपुर मार्ग पर यह लोग सुबह, दोपहर व शाम की बसों में सफर करते दिख जाएंगे। इन कंडक्टरों के अनुसार बसों में विकलांग यात्रियों का कोटा स्पष्ट नहीं है। इन विकलांग यात्रियों से कोई किराया शुल्क नहीं लिया जाता है, ऐसे में सरकार की इस उदारता का पूरा लाभ कुछ लोग उठा रहे हैं।
यात्रियों की जुबानी
लगता ही नहीं कि यह अंतर्राज्यीय बस स्टैंड है
यहां ऐसा नहीं लगता कि यह अंतर्राज्यीय बस स्टैंड है। जगह- जगह गंदगी के ढेर और उड़ती मक्खियां यहां की व्यवस्था को दिखा रही हैं। स्वच्छ पानी की भी सुविधा नहीं दिखाई दे रही है।
महरौनी जा रहे महेंद्र
भेदभाव बरता जा रहा है गरौठा से
रोडवेज को सबसे ज्यादा कमाई राम नगर गरौठा मार्ग पर होती है। जर्जर बसें भी फुल रहती हैं। यहां जाने वाली दो बसें बंद कर दी गई र्हैं। कई बार बसें ब्रेक डाउन हो जाती है, जिससे काफी अतिरिक्त समय लग जाता है, आने जाने में। उक्त मार्ग पर कंडम बसें चलाकर भेदभाव बरता जा रहा है।
गरौठा जा रहे घनश्याम गुप्ता
शिवपुरी के लिए नहीं हैं सरकारी बसें
शिवपुरी के लिए यूपी रोडवेज की बस न होने और एमपी रोडवेज की बसें नहीं होेने पर सैकड़ों यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। निजी बसों में मनमाना किराया देना पड़ता है।
शिवपुरी जा रहे ब्रज भान सिंह यादव
गंदगी के ढेरों से घबराता है मन
यहां के बस स्टैंड पर गंदगी के ढेरों से मन घबराता है। अन्य शहरों के बस स्टैंडों के मुकाबले यहां सफाई की स्थिति काफी खराब है। यात्री शैड भी पर्याप्त नहीं हैं।
पिछोर जा रहे भरत