{"_id":"6121618a8ebc3e799c6148fc","slug":"research-is-being-done-on-sanskrit-in-foreign-countries-also-jhansi-news-jhs2024562153","type":"story","status":"publish","title_hn":"विदेशों में भी संस्कृत पर किया जा हा है शोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विदेशों में भी संस्कृत पर किया जा हा है शोध
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। विश्व संस्कृत दिवस की पूर्व संध्या पर जीवनधारा फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में राजकीय संग्रहालय, क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई, क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र, जीवनधारा फाउंडेशन एवं बुंदेलखंड इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व शोध समिति द्वारा संस्कृत साहित्य में महिला सशक्तिकरण विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बाबूलाल तिवारी मुख्य अतिथि, डॉ. बीबी त्रिपाठी तथा क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे विशिष्ठ अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। संगोष्ठी में मौजूद छात्र-छात्राओं व नागरिकों को संबोधित करते हुए बाबूलाल तिवारी ने कहा कि आज हमारे देश के अलावा विदेशों में भी संस्कृत भाषा पर शोध किया जा रहा है। वेद, पुराण, उपनिषद आदि संस्कृत भाषा में ही लिखे गए हैं। हम सभी को संस्कृत का सम्मान करना चाहिए। डॉ. बीबी त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत एक मात्र ऐसी भाषा है जिस पर हम सभी को गर्व है। संस्कृत साहित्य में अनेक विदुषी एवं वीर महिलाओं के बारे में विस्तार से बताया गया है। समाज सेविका डॉ. नीति शास्त्री ने कहा कि किसी भी मंत्र का जाप संस्कृत में करने से हम सभी के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इतिहासकार राम प्रकाश गुप्ता राम प्रकाश गुप्ता ने संस्कृत को देववाणी बताते हुए नई पीढ़ी को संस्कारवान बनने के लिए संस्कृत का अध्ययन करने का महत्व बताया तथा विदेशों में इसकी लोकप्रियता पर प्रकाश डाला। इस मौके पर मोहन नेपाली, सोम तिवारी, शालिनी गुरबक्शानी, महिमा जायसवाल, मनमोहन मनु, सुदर्शन शिवहरे, ऋषभ, मयंक कुमार, मुकेश रायकवार, मुकेश कुमार मौजूद रहे। संचालन अर्जन सिंह चांद ने किया। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुरेश दुबे ने आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। संगोष्ठी में मौजूद छात्र-छात्राओं व नागरिकों को संबोधित करते हुए बाबूलाल तिवारी ने कहा कि आज हमारे देश के अलावा विदेशों में भी संस्कृत भाषा पर शोध किया जा रहा है। वेद, पुराण, उपनिषद आदि संस्कृत भाषा में ही लिखे गए हैं। हम सभी को संस्कृत का सम्मान करना चाहिए। डॉ. बीबी त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत एक मात्र ऐसी भाषा है जिस पर हम सभी को गर्व है। संस्कृत साहित्य में अनेक विदुषी एवं वीर महिलाओं के बारे में विस्तार से बताया गया है। समाज सेविका डॉ. नीति शास्त्री ने कहा कि किसी भी मंत्र का जाप संस्कृत में करने से हम सभी के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इतिहासकार राम प्रकाश गुप्ता राम प्रकाश गुप्ता ने संस्कृत को देववाणी बताते हुए नई पीढ़ी को संस्कारवान बनने के लिए संस्कृत का अध्ययन करने का महत्व बताया तथा विदेशों में इसकी लोकप्रियता पर प्रकाश डाला। इस मौके पर मोहन नेपाली, सोम तिवारी, शालिनी गुरबक्शानी, महिमा जायसवाल, मनमोहन मनु, सुदर्शन शिवहरे, ऋषभ, मयंक कुमार, मुकेश रायकवार, मुकेश कुमार मौजूद रहे। संचालन अर्जन सिंह चांद ने किया। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुरेश दुबे ने आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन