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सांप सीढ़ी, अष्टा चंगा जैसे पारंपरिक खेलों की आई याद

Wed, 29 Apr 2020 12:39 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 29 Apr 2020 12:39 AM IST
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Remember to childhood game
इलाहाबाद बैंक चौराहा पर लूडों खेल कर समय पास कर रहे बच्चे। अमर उजाला
झांसी। घरों में खेले जाने वाले जिन पारंपरिक खेलों को बच्चे भूल चुके थे। लॉकडाउन के पहरे ने पुन: वह सभी याद दिला दिए। बच्चे अब परिजनों के साथ सांप सीढ़ी, लूडो, अष्टा चंगा, चंदा पउवा, चपेटा, राजा मंत्री चोर सिपाही, चखरी जैसे अनेक परंपरागत खेलों में मस्त हो गए हैं। हालांकि कई बच्चे अब भी वीडियो गेम में दिलचस्पी दिखा रहे है। लेकिन अधिकांश अभिभावकों व बच्चों का कहना है, कि पारंपरिक खेल ही बेहतर है। इससे एक ाग्रता को बढ़ावा मिलता है। साथ ही हंसी खुशी का माहौल भी रहता है। तनाव कहीं भी नजर नहीं आता है।
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सांप सीढ़ी, लूडो और नागिन गिप्पी जैसे पारंपरिक खेल घर में ही खेलते हैं। इसमें दादाजी को भी शामिल कर लेते हैं। इन खेलों में बहुत मजा आता है।
सूर्यांश सिंह, आवास विकास
घर में कैरम, लूडो, शतरंज और चपेटा परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर खेलते हैं। इससे पूरा समय बीत जाता है और अच्छा भी लगता है।
पूर्वी, फ्रेंडस कालोनी
ऑनलाइन पढ़ाई के बाद घर में हम सभी बच्चे अष्टा चंगा, कैरम आदि खेलते हैं। इन खेलों में हिस्सा लेकर बहुत अच्छा लगता है।
संस्कार यादव, भगवंतपुरा
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